28 जुलाई 2026
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पीओके चुनाव पर भारत का कड़ा रुख: विदेश मंत्रालय ने कहा — अवैध कब्जे को छिपाने का दिखावा

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पीओके चुनाव पर भारत का कड़ा रुख: विदेश मंत्रालय ने कहा — अवैध कब्जे को छिपाने का दिखावा

सारांश

भारत ने पीओके में हो रहे तथाकथित चुनावों को सिरे से नकारते हुए इसे पाकिस्तान के अवैध कब्जे पर पर्दा डालने की कोशिश बताया। पहले ही चरण में हिंसा, एक की मौत और पीएमएल-एन व पीपीपी के बीच धांधली के आरोपों ने इस प्रक्रिया की विश्वसनीयता को और कमज़ोर कर दिया।

मुख्य बातें

विदेश मंत्रालय ने 28 जुलाई 2026 को पीओके में हो रहे तथाकथित विधानसभा चुनावों को अवैध कब्जे को छिपाने का दिखावा बताते हुए खारिज किया।
प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने दोहराया कि जम्मू, कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न और अविभाज्य अंग है।
पहले चरण के मतदान में एक व्यक्ति की मौत और कई घायल; पीपीपी ने कार्यकर्ता मुख्तार यूनुस (35 वर्ष) की हत्या का आरोप पीएमएल-एन पर लगाया।
बिलावल भुट्टो-जरदारी ने हत्या पर दुख जताते हुए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
भारत ने कहा कि पीओके में जारी जन आंदोलन वहाँ के आर्थिक शोषण और प्रशासनिक दमन की वास्तविकता को उजागर करते हैं।

भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने 28 जुलाई 2026 को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में कराए जा रहे तथाकथित विधानसभा चुनावों को पूरी तरह खारिज कर दिया। मंत्रालय ने स्पष्ट कहा कि यह प्रक्रिया पाकिस्तान के अवैध कब्जे को वैधता का आवरण देने और वहाँ जारी गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों से दुनिया का ध्यान भटकाने की एक सुनियोजित कोशिश है।

विदेश मंत्रालय का आधिकारिक बयान

मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में हो रहे चुनावों पर भारत का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि इस मसले पर भारत की स्थिति 'पूरी तरह स्पष्ट, सुसंगत और सर्वविदित' है। उन्होंने दोहराया कि जम्मू, कश्मीर और लद्दाख का संपूर्ण भूभाग — जिसमें पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले क्षेत्र भी सम्मिलित हैं — भारत का अभिन्न और अविभाज्य अंग है।

जायसवाल ने इस तथाकथित चुनावी प्रक्रिया को महज एक 'दिखावटी अभ्यास' करार दिया, जिसका असल मकसद पाकिस्तान के नाजायज कब्जे पर पर्दा डालना और वहाँ के लोगों पर हो रहे अत्याचारों को छिपाना है।

पीओके में जन-आक्रोश और दमन

प्रवक्ता ने कहा कि पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में लंबे अरसे से जारी जन आंदोलन और विरोध प्रदर्शन इस बात के ठोस प्रमाण हैं कि वहाँ की जनता आर्थिक शोषण, मौलिक अधिकारों से वंचित किए जाने और प्रशासनिक दमन का सामना कर रही है। उन्होंने कहा कि हाल ही में सामने आए विरोध-प्रदर्शनों के दृश्य इसी कड़वी वास्तविकता को उजागर करते हैं।

चुनाव में हिंसा और धांधली के आरोप

गौरतलब है कि पीओके में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच तीन चरणों में हो रहे इन चुनावों के पहले चरण में सोमवार को मतदान हुआ। यह चरण मारपीट, हिंसा और धांधली की घटनाओं के साये में रहा। पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) और पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (पीपीपी) ने मतदान के दौरान एक-दूसरे पर चुनावी गड़बड़ी के गंभीर आरोप लगाए, जिससे इस पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवालिया निशान खड़ा हो गया।

मतदान के दौरान एक व्यक्ति की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। पीपीपी ने आरोप लगाया कि नक्याल में मतदान के दौरान कोटली जिले में उसके 35 वर्षीय कार्यकर्ता मुख्तार यूनुस की हत्या कर दी गई। पार्टी के बयान के अनुसार, 'पीएमएल-एन के उम्मीदवारों की ओर से हुई गोलीबारी में मुख्तार यूनुस की मौत हो गई और दो अन्य घायल हो गए।'

पीपीपी के चेयरमैन बिलावल भुट्टो-जरदारी ने इस हत्या पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए वहाँ के चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए।

भारत का दीर्घकालिक रुख और संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब भारत-पाकिस्तान संबंध पहले से ही तनावपूर्ण दौर से गुजर रहे हैं। भारत लगातार यह स्थिति दोहराता रहा है कि पीओके में पाकिस्तान की किसी भी प्रशासनिक या चुनावी कार्रवाई को वह मान्यता नहीं देता। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस तरह की प्रक्रियाएँ अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भ्रमित करने की कोशिश हैं, न कि वहाँ के लोगों को वास्तविक लोकतांत्रिक अधिकार देने की।

आने वाले दिनों में भारत इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाता रह सकता है, जबकि पीओके में शेष चरणों के मतदान पर दुनिया की नज़रें टिकी रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

एक कार्यकर्ता की हत्या और पाकिस्तान की दो प्रमुख पार्टियों के बीच धांधली के आरोप खुद इस प्रक्रिया की खोखली वैधता को उजागर कर देते हैं। विदेश मंत्रालय ने 'मानवाधिकार उल्लंघन' और 'जन आंदोलन' का जो उल्लेख किया, वह भारत की कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा है — पाकिस्तान को आंतरिक दमन के आरोपी के रूप में अंतरराष्ट्रीय मंच पर घेरना। असली सवाल यह है कि क्या वैश्विक समुदाय इस बार केवल बयानबाज़ी से आगे जाकर पीओके की स्थिति पर ठोस प्रतिक्रिया देगा।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत ने पीओके चुनावों को क्यों खारिज किया?
भारत का कहना है कि पाकिस्तान द्वारा कराए जा रहे ये तथाकथित चुनाव पाकिस्तान के अवैध कब्जे को वैधता देने और वहाँ हो रहे मानवाधिकार उल्लंघनों से ध्यान भटकाने की कोशिश हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार, जम्मू, कश्मीर और लद्दाख का पूरा क्षेत्र भारत का अभिन्न अंग है और पाकिस्तान की किसी भी प्रशासनिक कार्रवाई को भारत मान्यता नहीं देता।
पीओके चुनाव के पहले चरण में क्या हुआ?
सोमवार को हुए पहले चरण के मतदान में हिंसा और धांधली की घटनाएँ सामने आईं। पीपीपी के कार्यकर्ता मुख्तार यूनुस (35 वर्ष) की कोटली जिले के नक्याल में कथित तौर पर गोलीबारी में मौत हो गई, जिसके लिए पीपीपी ने पीएमएल-एन को जिम्मेदार ठहराया। दो अन्य कार्यकर्ता भी घायल हुए।
रणधीर जायसवाल ने पीओके पर क्या कहा?
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 28 जुलाई को साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि इस मुद्दे पर भारत का रुख 'पूरी तरह स्पष्ट, सुसंगत और सर्वविदित' है। उन्होंने पीओके में चुनाव को 'दिखावटी प्रक्रिया' बताते हुए कहा कि वहाँ के जन आंदोलन आर्थिक शोषण और प्रशासनिक दमन की वास्तविकता को उजागर करते हैं।
बिलावल भुट्टो-जरदारी ने पीओके चुनाव पर क्या प्रतिक्रिया दी?
पीपीपी के चेयरमैन बिलावल भुट्टो-जरदारी ने कार्यकर्ता मुख्तार यूनुस की हत्या पर गहरा दुख जताया और पीओके के चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने पीएमएल-एन पर चुनावी हिंसा का आरोप लगाया।
पीओके पर भारत का आधिकारिक रुख क्या है?
भारत का आधिकारिक रुख यह है कि जम्मू, कश्मीर और लद्दाख — जिसमें पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले क्षेत्र भी शामिल हैं — भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा हैं। भारत पीओके में पाकिस्तान की किसी भी प्रशासनिक, चुनावी या शासन-संबंधी कार्रवाई को मान्यता नहीं देता।
राष्ट्र प्रेस
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