गिलगित-बाल्टिस्तान चुनाव पर भारत का कड़ा विरोध: MEA बोला — यह भारत का अभिन्न अंग
सारांश
मुख्य बातें
भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने 5 जून 2026 को पाकिस्तान के समक्ष औपचारिक और कड़ा विरोध दर्ज कराया, जब पाकिस्तान ने 7 जून 2026 को पाकिस्तान-अधिकृत गिलगित-बाल्टिस्तान में तथाकथित विधानसभा चुनाव कराने की घोषणा की। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के सभी क्षेत्र — जिनमें गिलगित-बाल्टिस्तान भी सम्मिलित है — भारत के अभिन्न और अविभाज्य अंग हैं। यह बयान उस समय आया जब पाकिस्तान ने पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर (POK) की विधानसभा की सभी सीटों के लिए 27 जुलाई को भी मतदान कराने की घोषणा की है।
भारत का आधिकारिक पक्ष
विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान में कहा गया कि 1947 में जम्मू-कश्मीर का भारत में पूर्ण, वैध और अपरिवर्तनीय विलय हुआ था। इसलिए पाकिस्तान द्वारा इस क्षेत्र में कोई भी चुनावी या प्रशासनिक प्रक्रिया आयोजित करना भारत की संप्रभुता का सीधा उल्लंघन है। मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान इन क्षेत्रों पर अवैध और बलपूर्वक कब्जा बनाए हुए है और उसे यह क्षेत्र खाली करने चाहिए।
चुनाव से नहीं छिपेंगे मानवाधिकार उल्लंघन
विदेश मंत्रालय ने यह भी रेखांकित किया कि गिलगित-बाल्टिस्तान और पाकिस्तान-अधिकृत अन्य क्षेत्रों में मानवाधिकार उल्लंघन, राजनीतिक दमन, आर्थिक शोषण और नागरिक स्वतंत्रता पर प्रतिबंध जैसी गंभीर समस्याएँ विद्यमान हैं। मंत्रालय ने कहा कि इन मूल समस्याओं को चुनावी प्रक्रिया की आड़ में नहीं छिपाया जा सकता।
संयुक्त राष्ट्र में भारत की पहले की आवाज़
गौरतलब है कि पिछले वर्ष संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत के स्थायी मिशन की प्रथम सचिव भाविका मंगलानंदन ने भी इसी मुद्दे पर पाकिस्तान को आड़े हाथों लिया था। उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान-अधिकृत क्षेत्रों में लोग अपने मूल अधिकारों के लिए विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, किंतु पाकिस्तानी सेना और उससे जुड़े समूहों द्वारा उनका दमन किया जा रहा है। उन्होंने प्राकृतिक संसाधनों के अवैध दोहन का भी उल्लेख किया था।
1948 का संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव और भारत का रुख
भारत ने यह भी याद दिलाया कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के 1948 के प्रस्ताव में पाकिस्तान को जम्मू-कश्मीर से अपनी सेना और नागरिकों को हटाने का निर्देश दिया गया था। बावजूद इसके, पाकिस्तान आज भी उस क्षेत्र के एक हिस्से पर अवैध कब्जा बनाए हुए है। भारत सरकार ने दोहराया कि वह अधिकृत क्षेत्रों की स्थिति बदलने के किसी भी प्रयास को पूरी तरह अस्वीकार करती है।
आगे क्या
पाकिस्तान द्वारा 7 जून को गिलगित-बाल्टिस्तान और 27 जुलाई को POK में चुनाव कराने की योजना के बीच भारत का यह विरोध कूटनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर और अधिक प्रखरता से उठा सकता है।