13 अगस्त 2026
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पीओके अत्याचारों के खिलाफ ब्रसेल्स में कश्मीरी प्रवासियों का मार्च, यूएन दफ्तर तक जुलूस

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पीओके अत्याचारों के खिलाफ ब्रसेल्स में कश्मीरी प्रवासियों का मार्च, यूएन दफ्तर तक जुलूस

सारांश

यूरोप में कश्मीरी प्रवासियों का गुस्सा अब सड़कों पर उतर आया है — ब्रसेल्स में यूरोपियन पार्लियामेंट से यूएन दफ्तर तक मार्च निकाला गया। जेकेएचआरओ के अनुसार पीओके में 5 जून से 5 अगस्त के बीच 93 नागरिकों की मौत दर्ज हुई है। इटली और ब्रिटेन के बाद बेल्जियम में यह विरोध अंतरराष्ट्रीय दबाव की बढ़ती माँग का संकेत है।

मुख्य बातें

बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स में कश्मीरी प्रवासियों ने 13 अगस्त 2026 को यूरोपियन पार्लियामेंट से यूएन कार्यालय तक विरोध मार्च निकाला।
जम्मू-कश्मीर मानवाधिकार वेधशाला (जेकेएचआरओ) ने 5 जून से 5 अगस्त 2026 के बीच पीओके में 93 नागरिकों की मौत दर्ज की।
पिछले हफ्ते इटली के बोलोग्ना में भी हज़ारों कश्मीरी प्रवासियों ने इसी मुद्दे पर विरोध मार्च निकाला था।
ब्रिटिश सांसद लियाम बायरन और अदनान हुसैन ने पीओके में नागरिकों पर कथित बल प्रयोग की स्वतंत्र जाँच की माँग की।
नागरिक समाज संगठन जेएएसी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पाकिस्तानी सेना के अभियान रोकने की अपील की।

बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स में बसे कश्मीरी प्रवासी समुदाय ने 13 अगस्त 2026 को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में पाकिस्तानी सेना द्वारा किए जा रहे कथित अत्याचारों के विरोध में एक बड़ा प्रदर्शन मार्च निकाला। यह जुलूस यूरोपियन पार्लियामेंट से शुरू होकर संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के ब्रसेल्स कार्यालय तक पहुँचा, जहाँ प्रदर्शनकारियों ने अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की माँग की।

मुख्य घटनाक्रम

प्रदर्शनकारियों ने बुधवार को पाकिस्तानी सेना के खिलाफ नारे लगाए और पीओके में हो रहे मानवाधिकार उल्लंघनों की ओर वैश्विक ध्यान खींचने की अपील की। इन उल्लंघनों में ज़रूरी सेवाओं पर प्रतिबंध और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर बल का कथित क्रूर इस्तेमाल शामिल है। प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तानी अधिकारियों की कार्रवाइयों की स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जाँच की माँग भी उठाई।

मानवाधिकार संस्था के आँकड़े

पीओके स्थित मानवाधिकार दस्तावेजीकरण संस्था जम्मू-कश्मीर मानवाधिकार वेधशाला (जेकेएचआरओ) ने 5 जून से 5 अगस्त के बीच कब्जे वाले इलाके में बढ़ती अशांति के दौरान 93 नागरिकों की मौत दर्ज की है। यह आँकड़ा इस हफ्ते की शुरुआत में सामने आया और इसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है।

यूरोप में व्यापक विरोध की लहर

ब्रसेल्स से पहले, पिछले हफ्ते हज़ारों कश्मीरी प्रवासियों ने इटली के बोलोग्ना शहर में भी विरोध मार्च निकाला था। वहाँ प्रदर्शनकारियों ने नागरिक समाज संगठन 'जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' (जेएएसी) के साथ एकजुटता जताई और पीओके में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के अभियान समाप्त करने की माँग की। जेएएसी ने सोशल मीडिया पर कहा कि इटली में कश्मीरियों ने जोरदार प्रदर्शन किया और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वे पाकिस्तानी सेना द्वारा निहत्थे नागरिकों के कथित 'नरसंहार' के खिलाफ आवाज उठाएं। जेएएसी ने कहा, 'शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी केवल अपने बुनियादी अधिकारों की माँग कर रहे हैं।'

ब्रिटिश सांसदों की प्रतिक्रिया

हाल ही में कई ब्रिटिश सांसदों ने भी पीओके में सरकार-विरोधी प्रदर्शनों के दौरान नागरिकों पर पाकिस्तानी सेना की कथित क्रूरता पर गहरी चिंता जताई थी। ब्रिटिश लेबर पार्टी के सांसद लियाम बायरन ने कहा था कि पीओके में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की खबरें बेहद चिंताजनक हैं। एक अन्य ब्रिटिश सांसद अदनान हुसैन ने नागरिकों की हत्या को 'त्रासदी' बताते हुए माँग की कि पाकिस्तानी अधिकारियों द्वारा अत्यधिक या गैर-कानूनी बल के किसी भी कथित इस्तेमाल की पूर्ण, स्वतंत्र और पारदर्शी जाँच होनी चाहिए।

आगे क्या होगा

यूरोप के विभिन्न देशों में कश्मीरी प्रवासियों के बढ़ते विरोध प्रदर्शन अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पीओके के मुद्दे को और अधिक दृश्यता दे रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि जब तक संयुक्त राष्ट्र और पश्चिमी सरकारें ठोस कदम नहीं उठातीं, तब तक ये प्रदर्शन जारी रह सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है — और यही वह बिंदु है जहाँ अंतरराष्ट्रीय मीडिया और सरकारें प्रायः चुप्पी साध लेती हैं। ब्रिटिश सांसदों की प्रतिक्रिया संकेत देती है कि पश्चिमी संसदों में यह मुद्दा धीरे-धीरे जगह बना रहा है, पर औपचारिक कूटनीतिक दबाव अभी दूर की कौड़ी है।
RashtraPress
13 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ब्रसेल्स में कश्मीरी प्रवासियों ने विरोध मार्च क्यों निकाला?
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में पाकिस्तानी सेना द्वारा कथित अत्याचारों और मानवाधिकार उल्लंघनों के विरोध में बेल्जियम के कश्मीरी प्रवासियों ने यह मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों ने अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप और स्वतंत्र जाँच की माँग की।
जेकेएचआरओ ने पीओके में कितनी मौतें दर्ज की हैं?
जम्मू-कश्मीर मानवाधिकार वेधशाला (जेकेएचआरओ) के अनुसार, 5 जून से 5 अगस्त 2026 के बीच पीओके में बढ़ती अशांति के दौरान 93 नागरिकों की मौत दर्ज की गई है। यह आँकड़ा इस हफ्ते सामने आया और इसने अंतरराष्ट्रीय चिंता को और बढ़ा दिया है।
जेएएसी (JAAC) क्या है और इसकी भूमिका क्या है?
'जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी' (जेएएसी) पीओके का एक नागरिक समाज संगठन है जो वहाँ के नागरिकों के अधिकारों के लिए आवाज उठाता है। इटली और बेल्जियम के प्रदर्शनकारियों ने जेएएसी के साथ एकजुटता व्यक्त करते हुए पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के अभियान समाप्त करने की माँग की।
ब्रिटिश सांसदों ने पीओके पर क्या कहा है?
ब्रिटिश लेबर पार्टी के सांसद लियाम बायरन ने पीओके में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की खबरों को बेहद चिंताजनक बताया। सांसद अदनान हुसैन ने नागरिकों की हत्या को 'त्रासदी' कहते हुए पाकिस्तानी अधिकारियों द्वारा बल प्रयोग की पूर्ण, स्वतंत्र और पारदर्शी जाँच की माँग की।
क्या यूरोप के अन्य देशों में भी ऐसे विरोध प्रदर्शन हुए हैं?
हाँ, ब्रसेल्स से पहले इटली के बोलोग्ना में हज़ारों कश्मीरी प्रवासियों ने विरोध मार्च निकाला था। यूरोप के कई देशों में कश्मीरी प्रवासी समुदाय पीओके में मानवाधिकार उल्लंघनों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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