मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी ने यूसीसी को मुसलमानों के खिलाफ बताया, एआईएमपीएलबी का समर्थन किया

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मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी ने यूसीसी को मुसलमानों के खिलाफ बताया, एआईएमपीएलबी का समर्थन किया

सारांश

मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी ने यूसीसी के खिलाफ अपनी आवाज उठाई है, इसे मुसलमानों के हितों के खिलाफ बताते हुए एआईएमपीएलबी का समर्थन किया। जानें इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर उनका क्या कहना है।

Key Takeaways

  • यूसीसी को मुसलमानों के खिलाफ बताया गया।
  • मौलाना रिजवी ने एआईएमपीएलबी का समर्थन किया।
  • सीएम योगी के बयान पर विवाद।
  • पश्चिम बंगाल में बदलाव की इच्छा।
  • सीएए के तहत नागरिकता की चर्चा।

बरेली, 4 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। उत्तराखंड में यूनिफॉर्म सिविल कोड का ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) विरोध कर रहा है। इस पर मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी ने शनिवार को अपनी प्रतिक्रिया देते हुए यूसीसी को मुसलमानों के खिलाफ बताया और बोर्ड का समर्थन किया।

मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत करते हुए कहा, "उत्तराखंड की सरकार ने यूसीसी लागू किया, इसके बाद गुजरात में भी यह लागू किया गया। अब असम के चुनाव में यह मुद्दा बहुत महत्वपूर्ण हो गया है। खुद वहां के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ऐलान करते हैं कि असम में चुनाव जीतने के बाद यूसीसी लागू किया जाएगा। मुसलमान यूसीसी को कभी मंजूर नहीं करेंगे। एआईएमपीएलबी ने जो कहा है, मैं उसका समर्थन करता हूं।"

उन्होंने पश्चिम बंगाल चुनाव को लेकर कहा, "बंगाल की जनता बदलाव चाहती है। वहीं, कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी खुद पार्टी लाइन से हटकर बात कर रहे हैं। वह भाजपा का डर दिखाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि जनता विकास के नाम पर वोट देना चाहती है। वह चाहती है कि 15 साल तक ममता बनर्जी को मौका दिया गया, अब बदलाव होना चाहिए। पूरे 15 साल में ममता बनर्जी ने जो कार्य किए हैं, उस कार्य को लेकर वहां की जनता संतुष्ट नहीं है, इसलिए वह बदलाव चाहती है।"

मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी ने कहा, "मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घुसपैठ को लेकर जो भी बयान दिया है, वह बिल्कुल गलत है। मैं उनके बयान से सहमत नहीं हूं। 1971 में जब भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध हुआ और बांग्लादेश बना, उसमें भारत की खास भूमिका थी। उस दौरान कई लोग भारत आए, जिन्हें नई पहचान दी गई। बहुत से ऐसे लोग हैं, जिन्हें यहां पर नागरिकता दी गई है।"

उन्होंने आगे कहा, "पीलीभीत में बहुत सारे ऐसे गांव हैं, जहां पर लोगों को सीएए के कानून के तहत राष्ट्रीयता दी गई। उन्हें मकान, जमीनें, राशन कार्ड और पहचान पत्र दिए गए और भारत की नागरिकता दी गई। क्या केवल मुसलमान ही बांग्लादेश से भारत में आए? ऐसा बिल्कुल नहीं है। हिंदू और मुसलमान दोनों समुदाय के लोग भारत आए। सीएम योगी का बयान पक्षपातपूर्ण है।"

Point of View

मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी का बयान भारतीय राजनीति के एक महत्वपूर्ण पहलू को उजागर करता है। यूसीसी का विषय देश में धार्मिक समानता और न्याय के मुद्दों को छेड़ता है, जो सभी समुदायों के लिए महत्वपूर्ण है।
NationPress
06/04/2026

Frequently Asked Questions

यूसीसी क्या है?
यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) एक ऐसा कानून है जो सभी नागरिकों के लिए समान व्यक्तिगत कानूनों की स्थापना की बात करता है।
एआईएमपीएलबी का क्या उद्देश्य है?
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का उद्देश्य मुस्लिम समुदाय के व्यक्तिगत कानूनों की रक्षा करना है।
मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी का यूसीसी पर क्या कहना है?
उन्होंने यूसीसी को मुसलमानों के खिलाफ बताया और एआईएमपीएलबी का समर्थन किया।
सीएए का क्या महत्व है?
सीएए बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से धार्मिक उत्पीड़न के शिकार लोगों को भारतीय नागरिकता देने की बात करता है।
उत्तराखंड में यूसीसी लागू करने का क्या प्रभाव है?
उत्तराखंड में यूसीसी लागू करने से विभिन्न धार्मिक समुदायों में असहमति और विवाद की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
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