राज्यसभा में 19 सदस्यों ने ली शपथ, शरद पवार और अन्य नेताओं की वापसी
सारांश
Key Takeaways
- 19 नए सदस्यों ने राज्यसभा में शपथ ली।
- शरद पवार और अन्य वरिष्ठ नेता शामिल थे।
- सदस्यों ने विभिन्न भाषाओं में शपथ ग्रहण किया।
- यह आयोजन भारतीय लोकतंत्र की विविधता का प्रतीक है।
नई दिल्ली, 6 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। महाराष्ट्र, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और ओडिशा से चुने गए नेताओं ने सोमवार को राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ ग्रहण किया। यह महत्वपूर्ण कार्यक्रम संसद के उच्च सदन राज्यसभा में आयोजित हुआ। इस अवसर पर नवनिर्वाचित और पुनः निर्वाचित कुल 19 सदस्यों ने शपथ ली।
एनसीपी (एसपी) के प्रमुख शरद पवार, केंद्रीय मंत्री और महाराष्ट्र की रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) के नेता रामदास आठवले, एआईएडीएमके के वरिष्ठ नेता थंबीदुरई और डीएमके के तिरुची शिवा जैसे प्रमुख नेता शपथ लेने वालों में शामिल रहे हैं। ये सभी नेता फिर से राज्य सभा के सदस्य बने हैं। इस आयोजन का संचालन राज्यसभा के सभापति सी. पी. राधाकृष्णन ने किया।
शपथ लेने वाले सभी 19 सदस्यों में रामदास आठवले, माया चिंतामन इवनाते, शरदचंद्र पवार, रामराव सखाराम वडकुटे, ज्योति नागनाथ वाघमारे, क्रिस्टोफर मणिकम, अंबुमणि रामदोस, कोंस्टांडिन रवींद्रन, एल. के. सुधीश, एम. थंबीदुरई, तिरुची शिवा, बाबुल सुप्रियो बराल, मेनका गुरुस्वामी, राजीव कुमार, रुक्मिणी मलिक, बिस्वजीत सिन्हा, संतृप्त मिश्रा, दिलीप कुमार रे और मनमोहन सामल शामिल हैं।
इस अवसर पर सदस्यों ने विभिन्न भाषाओं में शपथ ली, जिससे भारत की भाषाई विविधता प्रदर्शित होती है। तीन सदस्यों ने मराठी, दो ने हिंदी, छह ने तमिल, एक ने अंग्रेजी, चार ने बंगाली और तीन ने ओड़िया में प्रतिज्ञान किया। राज्यवार प्रतिनिधित्व के अनुसार, महाराष्ट्र से पांच, तमिलनाडु से छह, पश्चिम बंगाल से पांच और ओडिशा से तीन सदस्य शामिल हुए। यह राज्यसभा की विविधता भारतीय लोकतंत्र की समावेशिता को दर्शाती है।
इस कार्यक्रम में संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कार्य मंत्री कीरेन रिजिजू, जनजातीय कार्य मंत्री जुअल ओराम, राज्यसभा के महासचिव पी. सी. मोदी और सचिवालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
यह ध्यान देने योग्य है कि नए सांसदों का शपथ ग्रहण लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। नवनिर्वाचित सदस्य अब संसद की कार्यवाही में सक्रिय रूप से भाग लेते हुए नीतिगत निर्णयों, विधायी कार्यों और जनहित से जुड़े मुद्दों को आगे बढ़ाने में अपनी भूमिका निभाएंगे।