राज्यसभा मानसून सत्र: पवन खेड़ा, सुष्मिता देव, सतीश पुनिया सहित 9 नए सांसदों ने ली शपथ
सारांश
मुख्य बातें
संसद के मानसून सत्र 2025 के पहले दिन सोमवार, 20 जुलाई को राज्यसभा में नौ नए एवं पुनर्निर्वाचित सदस्यों ने सदस्यता की शपथ ग्रहण की। राज्यसभा सभापति सी.पी. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में हुई इस शपथ ग्रहण प्रक्रिया के साथ ही विभिन्न दलों के ये प्रतिनिधि औपचारिक रूप से उच्च सदन के सदस्य बन गए। शपथ ग्रहण के दौरान सदन का माहौल कुछ समय के लिए तनावपूर्ण भी रहा, जब विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी की।
किन सांसदों ने ली शपथ
कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कर्नाटक से निर्वाचित होकर पहली बार राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण की। भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ओर से पश्चिम बंगाल से सुष्मिता देव, सुखेंदु शेखर रॉय और प्रकाश चिक बाराईक ने शपथ ली। राजस्थान से डॉ. सतीश पुनिया, मध्य प्रदेश से महेश केवट और गुजरात से डॉ. मुकेश भाई ने भी सदस्यता की शपथ ग्रहण की।
पूर्वोत्तर भारत का प्रतिनिधित्व भी इस बार मजबूत हुआ। मिजोरम से खियांगटे लालत्लुआंगकीमा तथा मेघालय से नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP) के जेम्स पगसांग ने भी राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ली।
पवन खेड़ा की राज्यसभा में एंट्री
कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता पवन खेड़ा लंबे समय से राष्ट्रीय स्तर पर सरकार के विरुद्ध मुखर भूमिका निभाते रहे हैं। कर्नाटक से राज्यसभा में पहुँचकर वे अब उच्च सदन में भी कांग्रेस की आवाज़ को धार देने की स्थिति में होंगे। यह उनका संसदीय सफर का पहला पड़ाव है।
BJP के पूर्व TMC नेताओं का राज्यसभा प्रवेश
गौरतलब है कि सुष्मिता देव, सुखेंदु शेखर रॉय और प्रकाश चिक बाराईक — तीनों पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) से जुड़े रहे हैं और बाद में BJP में शामिल हुए। पश्चिम बंगाल से इन तीनों का राज्यसभा में प्रवेश BJP के पूर्वी भारत में राजनीतिक विस्तार की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब पार्टी बंगाल में अपनी संगठनात्मक पकड़ मजबूत करने की कोशिश में है।
शपथ के दौरान सदन में हंगामा
सुष्मिता देव और महेश केवट के शपथ ग्रहण के दौरान विपक्षी दलों के कई सांसदों ने नारेबाजी की। हालांकि, राज्यसभा सभापति सी.पी. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में शपथ ग्रहण की प्रक्रिया निर्बाध रूप से जारी रही और सभी सदस्यों ने अपनी-अपनी शपथ पूरी की।
आगे क्या होगा
मानसून सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयकों और राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा अपेक्षित है। नए सदस्यों के उच्च सदन में आने से विभिन्न दलों के बलाबल और रणनीतिक समीकरणों में बदलाव आएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत से आए नए सांसद क्षेत्रीय मुद्दों को संसदीय मंच पर नई ऊर्जा से उठा सकते हैं।