राज्यसभा में 7 नए सदस्यों ने ली शपथ, मल्लिकार्जुन खरगे भी पुनर्निर्वाचित होकर पहुंचे उच्च सदन
सारांश
मुख्य बातें
29 जून 2026 को संसद भवन स्थित राज्यसभा कक्ष में नव-निर्वाचित और पुनर्निर्वाचित सात सदस्यों ने राज्यसभा सांसद के रूप में पद एवं गोपनीयता की शपथ ग्रहण की। भारत के उपराष्ट्रपति एवं राज्यसभा सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने इन सभी सदस्यों को शपथ दिलाई। इसी दिन कांग्रेस अध्यक्ष एवं राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे को भी कर्नाटक से पुनर्निर्वाचित होने के बाद उच्च सदन की सदस्यता की शपथ दिलाई गई।
किन सदस्यों ने ली शपथ
सोमवार को शपथ ग्रहण करने वाले सात सदस्यों में गुजरात से जितेंद्र मेघजीभाई कंजरिया और मानसिंह मेरामण परमार, कर्नाटक से एम. नागराजा, मध्य प्रदेश से तरुण चुघ, महाराष्ट्र से राजेंद्र हीरालाल जैन, मणिपुर से अधिकारिमायुम शारदा देवी और राजस्थान से डॉ. अलका सिंह शामिल रहीं।
इस प्रकार गुजरात से दो सदस्य और कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मणिपुर तथा राजस्थान से एक-एक सदस्य राज्यसभा में शामिल हुए।
भाषाई विविधता का प्रतिबिंब
शपथ ग्रहण समारोह में भारत की भाषाई विविधता स्पष्ट रूप से दिखी। चार सदस्यों ने हिंदी में शपथ ली, जबकि एम. नागराजा ने कन्नड़ में, एक सदस्य ने पंजाबी में और अधिकारिमायुम शारदा देवी ने मणिपुरी भाषा में शपथ या प्रतिज्ञान किया। संविधान के अनुच्छेद 99 के तहत सांसद अपनी मातृभाषा में शपथ लेने के अधिकारी हैं, जो सदन की बहुभाषिक पहचान को रेखांकित करता है।
समारोह में उपस्थित प्रमुख नेता
शपथ ग्रहण समारोह में राज्यसभा उपसभापति हरिवंश, सदन के नेता एवं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा, संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू, विधि एवं न्याय राज्यमंत्री अर्जुनराम मेघवाल, राज्यसभा सदस्य जयराम रमेश और प्रफुल्ल पटेल उपस्थित रहे। राज्यसभा महासचिव पी.सी. मोदी तथा सचिवालय के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।
खरगे की वापसी और पिछले सप्ताह का शपथ क्रम
मल्लिकार्जुन खरगे कर्नाटक से पुनर्निर्वाचित होकर उच्च सदन में लौटे और उन्हें भी सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। गौरतलब है कि 25 जून को भी राज्यसभा सभापति ने नवनिर्वाचित और पुनर्निर्वाचित 10 सदस्यों को शपथ दिलाई थी, जिनमें से कई ने अपनी मातृभाषा में शपथ ली थी। इस प्रकार एक ही सप्ताह में कुल 17 सदस्यों ने राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण की है।
आगे क्या
शपथ ग्रहण के साथ ही इन सभी सदस्यों ने राज्यसभा में अपनी संसदीय जिम्मेदारियों का औपचारिक रूप से निर्वहन शुरू कर दिया है। संबंधित राज्यों का प्रतिनिधित्व और सुदृढ़ हुआ है तथा आगामी संसद सत्रों में इन सांसदों की सक्रिय भागीदारी की उम्मीद की जा रही है।