कांग्रेस और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एक ही दिन राज्यसभा में हुए आमने-सामने
सारांश
Key Takeaways
- कांग्रेस और भाजपा के अध्यक्षों की उपस्थिति ने राजनीतिक माहौल को गर्म किया।
- नितिन नवीन का यह राज्यसभा में पहला कार्यकाल है।
- विधायी मुद्दों पर बहस की गति तेज हो सकती है।
- सदन में कई वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी है।
- राजनीतिक गतिविधियां और अधिक केंद्रित रहने वाली हैं।
नई दिल्ली, 16 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। देश की राजनीति में गुरुवार को एक दिलचस्प घटना घटित हुई, जब सत्ताधारी पार्टी और विपक्षी दल दोनों के राष्ट्रीय अध्यक्ष एक ही सदन में उपस्थित हुए। कांग्रेस और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राज्यसभा में सदस्यों के रूप में दिखे। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने राज्यसभा सदस्य के तौर पर शपथ लेकर अपने संसदीय करियर की औपचारिक शुरुआत की। जबकि कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे पहले से ही राज्यसभा के सदस्य हैं।
इस घटनाक्रम की खास बात यह है कि इससे पहले भी ऐसा संयोग बन चुका है, जब भाजपा के राज्यसभा सांसद एवं केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा पार्टी अध्यक्ष थे। उस समय कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष थे, और भाजपा के तत्कालीन अध्यक्ष जेपी नड्डा नेता सदन थे। वर्तमान में भी जेपी नड्डा नेता सदन के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। अब भाजपा के नए अध्यक्ष भी राज्यसभा सदस्य बन गए हैं।
इस प्रकार, दोनों प्रमुख राष्ट्रीय दलों के शीर्ष नेतृत्व का राज्यसभा में होना, सदन की कार्यवाही को और अधिक राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बनाता है। गुरुवार को राज्यसभा की कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही समय बाद नए सदस्यों को शपथ दिलाई गई। इस दौरान भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के साथ-साथ भाजपा के वरिष्ठ नेता विनोद तावड़े, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंघवी, असम से प्रमोद बोरो और बिहार से उपेंद्र कुशवाहा ने भी बारी-बारी से शपथ ली।
भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन का यह राज्यसभा सांसद के रूप में पहला कार्यकाल है। वे बिहार से राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए हैं। उनके शपथ लेने के साथ ही संसद के उच्च सदन में भाजपा की रणनीतिक मौजूदगी और मजबूत हो गई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्यसभा में शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी से महत्वपूर्ण विधायी मुद्दों पर सीधी बहस व रणनीतिक निर्णयों की गति और तेज हो सकती है। यह संकेत भी है कि आने वाले समय में संसद के उच्च सदन में राजनीतिक गतिविधियां और अधिक प्रभावशाली और केंद्रित रहने वाली हैं।
गौरतलब है कि विभिन्न दलों के कई वरिष्ठ नेता इस समय राज्यसभा के सदस्य हैं। इनमें भारतीय जनता पार्टी के जेपी नड्डा, कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी, नेता विपक्ष एवं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, एनसीपी(एसपी) प्रमुख शरद पवार जैसे नेता शामिल हैं।
शरद पवार समेत 19 लोगों ने कुछ दिन पहले ही राज्यसभा के सदस्य के रूप में शपथ ली है। इनके साथ-साथ महाराष्ट्र, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और ओडिशा से चुनकर आए अन्य नेताओं ने भी राज्यसभा सांसद के तौर पर शपथ ली थी। केंद्रीय मंत्री एवं महाराष्ट्र की रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) के नेता रामदास अठावले, एआईएडीएमके के वरिष्ठ नेता थंबीदुरई एवं डीएमके के वरिष्ठ तिरुची शिवा जैसे नेता शामिल थे। ये सभी नेता फिर से राज्यसभा के सदस्य बने हैं।