जब अभिनेत्री दुलारी के दिन गुमनामी में थे, वहीदा रहमान बनीं उनके सहारा
सारांश
Key Takeaways
- दुलारी का संघर्ष और सफलता का सफर
- वहीदा रहमान का सहयोग महत्वपूर्ण था
- अल्जाइमर बीमारी के मुद्दे पर जागरूकता
- फिल्म उद्योग की अनकही कहानियां
- समाज में सहायता का महत्व
मुंबई, 17 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। फिल्म उद्योग की चमक-दमक के पीछे कई अनकही कहानियां छिपी होती हैं, जिनका पता बहुत कम लोगों को होता है। अभिनेत्री दुलारी की कहानी भी कुछ ऐसी ही है, जिन्होंने सैकड़ों फिल्मों में काम कर अपनी एक अलग पहचान बनाई। लेकिन, जब जीवन के अंतिम वर्षों में उन्हें सहारे की आवश्यकता पड़ी, तब वहीदा रहमान ने उनकी मदद के लिए आगे आकर आवाज उठाई।
दुलारी का जन्म 18 अप्रैल 1928 को हुआ था, और उनका असली नाम अंबिका गौतम था। वह एक साधारण परिवार से थीं। पिता की स्वास्थ्य समस्याओं और परिवार की आर्थिक स्थिति के कारण उन्हें बचपन में ही परिवार की जिम्मेदारियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने बहुत कम उम्र में काम करना शुरू किया और फिल्म उद्योग में कदम रखा।
उन्होंने अपने अभिनय करियर की शुरुआत फिल्म 'हमारी बात' से की। उस समय में, फिल्मों में काम करना आसान नहीं था, लेकिन दुलारी ने मेहनत और समर्पण से धीरे-धीरे अपनी पहचान बनाई। उन्होंने लगभग 135 फिल्मों में काम किया।
दुलारी ने कई यादगार फिल्में दीं, जिनमें 'जब प्यार किसी से होता है', 'मुझे जीने दो', 'अपना पराया', 'जीवन', 'तीसरी कसम', 'मजबूर' और 'दीवार' जैसी फिल्में शामिल हैं। इन फिल्मों में उन्होंने मां, चाची और परिवार के अन्य सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं। 1960 और 70 के दशक में वह लोकप्रिय अभिनेत्रियों में गिनी जाने लगीं।
निजी जीवन में दुलारी ने 1952 में जे. बी. जगताप से शादी की। विवाह के बाद उन्होंने लगभग नौ वर्षों तक फिल्मों से दूरी बना ली और अपने परिवार का ध्यान रखा। बाद में, उन्होंने फिल्मों में वापसी की और अपने करियर को आगे बढ़ाया। हालांकि, उन्होंने कभी भी मुख्य अभिनेत्री के रूप में काम नहीं किया, लेकिन अपने किरदारों से उन्होंने हमेशा दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी।
समय के साथ उनका करियर धीरे-धीरे समाप्त होने लगा और उनकी आखिरी फिल्म 'जिद्दी' थी। इसके बाद वह पूरी तरह से फिल्मों से दूर हो गईं। जीवन के अंतिम वर्षों में उनकी स्थिति काफी खराब हो गई थी। वह अल्जाइमर नामक बीमारी से जूझ रही थीं और लंबे समय तक बिस्तर पर ही रहीं।
इस दौरान उनकी स्थिति पर अधिकतर लोगों का ध्यान नहीं गया, लेकिन अभिनेत्री वहीदा रहमान ने उनकी हालत को उजागर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके प्रयासों के बाद सिने एंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन ने दुलारी को आर्थिक मदद देना शुरू किया। यह मदद उनके लिए उस समय अत्यंत आवश्यक थी, जब वह पूरी तरह दूसरों पर निर्भर हो चुकी थीं। अंततः, दुलारी का निधन पुणे के एक वृद्धाश्रम में हुआ। उन्होंने 84 वर्ष की आयु में अंतिम सांस ली।