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मल्लिकार्जुन खड़गे फिर बने राज्यसभा में नेता विपक्ष, 26 जून 2026 से मिली आधिकारिक मान्यता

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मल्लिकार्जुन खड़गे फिर बने राज्यसभा में नेता विपक्ष, 26 जून 2026 से मिली आधिकारिक मान्यता

सारांश

25 जून 2026 को कार्यकाल समाप्त होने के बाद तकनीकी रिक्तता आई, लेकिन कर्नाटक से पुनर्निर्वाचन और शपथ के साथ मल्लिकार्जुन खड़गे ने 26 जून से राज्यसभा में नेता विपक्ष की कमान फिर संभाल ली — आगामी मानसून सत्र से ठीक पहले।

मुख्य बातें

मल्लिकार्जुन खड़गे को 26 जून 2026 से राज्यसभा में विपक्ष के नेता के रूप में पुनः आधिकारिक मान्यता मिली।
25 जून 2026 को कार्यकाल समाप्त होने के कारण वे तकनीकी रूप से एक दिन के लिए पद पर नहीं रहे थे।
कर्नाटक से पुनर्निर्वाचित होकर लौटे खड़गे ने सोमवार को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ग्रहण की।
उपराष्ट्रपति एवं राज्यसभा सभापति सीपी राधाकृष्णन ने शपथ दिलाई।
मान्यता विपक्ष के नेताओं के वेतन और भत्ते अधिनियम, 1977 की धारा 2 के तहत दी गई।
खड़गे ने 'इंडिया' ब्लॉक के साथ आगामी मानसून सत्र में अधिक समन्वय का भरोसा दिलाया।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को 26 जून 2026 से राज्यसभा में विपक्ष के नेता के रूप में पुनः आधिकारिक मान्यता प्रदान कर दी गई है। राज्यसभा सचिवालय द्वारा जारी संसदीय बुलेटिन में यह स्पष्ट किया गया कि कर्नाटक से पुनर्निर्वाचित होकर सदन में लौटे खड़गे ने सोमवार को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ग्रहण की और इसी के साथ उन्होंने उच्च सदन में विपक्ष की कमान औपचारिक रूप से फिर से संभाल ली।

क्यों हुई तकनीकी रिक्तता

25 जून 2026 को खड़गे का राज्यसभा सदस्य के रूप में कार्यकाल समाप्त हो जाने के कारण वे 26 जून 2026 से तकनीकी रूप से नेता विपक्ष के पद पर नहीं रह गए थे। हालांकि, उनका पुनर्निर्वाचन उसी तिथि से प्रभावी हो गया था, जिससे यह रिक्तता अल्पकालिक रही।

आधिकारिक बुलेटिन में क्या कहा गया

राज्यसभा के महासचिव पी. सी. मोदी द्वारा जारी संसदीय बुलेटिन के अनुसार, विपक्ष के नेताओं के वेतन और भत्ते अधिनियम, 1977 की धारा 2 के प्रावधानों के तहत 26 जून 2026 से खड़गे को राज्यसभा में विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता दी गई है। यह मान्यता उक्त अधिनियम के अंतर्गत सभी उद्देश्यों के लिए प्रभावी मानी जाएगी।

शपथ ग्रहण और पुनर्मान्यता

भारत के उपराष्ट्रपति एवं राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने खड़गे को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इसके उपरांत राज्यसभा के सभापति ने उन्हें नेता विपक्ष के रूप में पुनः मान्यता प्रदान की। खड़गे वर्तमान में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं।

खड़गे का बयान और 'इंडिया' गठबंधन

खड़गे ने इस अवसर पर कहा कि वे नेता प्रतिपक्ष के रूप में उच्च सदन में जनता की आवाज पूरी निष्ठा से बुलंद करते रहेंगे। उन्होंने विभिन्न दलों के फ्लोर लीडर्स और विशेष रूप से विपक्षी 'इंडिया' ब्लॉक के सहयोग के प्रति आभार व्यक्त किया। खड़गे ने विश्वास जताया कि आगामी मानसून सत्र में विपक्ष पहले से अधिक समन्वय के साथ सरकार को जवाबदेह ठहराएगा।

आगामी सत्र से पहले महत्व

यह घटनाक्रम संसद के आगामी मानसून सत्र से ठीक पहले का है, जिसे राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नेता विपक्ष के रूप में खड़गे की भूमिका — राष्ट्रीय मुद्दों पर रणनीति बनाना, सरकार को घेरना और सदन में विपक्ष की एकजुट आवाज प्रस्तुत करना — अब औपचारिक रूप से पुनः स्थापित हो गई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह एक महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रश्न को रेखांकित करती है — क्या नेता विपक्ष का पद सदस्यता की निरंतरता पर निर्भर होना चाहिए, या यह पार्टी की संसदीय शक्ति से स्वतः जुड़ा हो? एक दिन की तकनीकी रिक्तता ने भले ही कोई व्यावहारिक असर न डाला हो, पर यह संसदीय प्रक्रियाओं की जटिलता को उजागर करती है। इससे भी बड़ा सवाल यह है कि आगामी मानसून सत्र में 'इंडिया' ब्लॉक की एकजुटता कितनी ठोस रहती है — खड़गे का दावा उत्साहजनक है, लेकिन गठबंधन की आंतरिक दरारें पहले भी सदन में दिखती रही हैं।
RashtraPress
29 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मल्लिकार्जुन खड़गे को राज्यसभा में नेता विपक्ष की मान्यता फिर से कब मिली?
खड़गे को 26 जून 2026 से राज्यसभा में विपक्ष के नेता के रूप में पुनः मान्यता दी गई है। यह मान्यता राज्यसभा सचिवालय के आधिकारिक संसदीय बुलेटिन में घोषित की गई।
खड़गे की राज्यसभा सदस्यता क्यों समाप्त हुई थी?
25 जून 2026 को खड़गे का राज्यसभा सदस्य के रूप में पिछला कार्यकाल समाप्त हो गया था, जिससे वे तकनीकी रूप से एक दिन के लिए नेता विपक्ष के पद पर नहीं रहे। हालांकि, उनका पुनर्निर्वाचन 26 जून 2026 से प्रभावी हो गया।
खड़गे को राज्यसभा में नेता विपक्ष की मान्यता किस कानून के तहत दी गई?
यह मान्यता विपक्ष के नेताओं के वेतन और भत्ते अधिनियम, 1977 की धारा 2 के प्रावधानों के तहत दी गई है। यह मान्यता उक्त अधिनियम के अंतर्गत सभी उद्देश्यों के लिए प्रभावी है।
खड़गे किस राज्य से राज्यसभा के लिए पुनर्निर्वाचित हुए?
मल्लिकार्जुन खड़गे कर्नाटक से राज्यसभा के लिए पुनर्निर्वाचित हुए हैं। उन्हें उपराष्ट्रपति एवं राज्यसभा सभापति सीपी राधाकृष्णन ने पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।
आगामी मानसून सत्र में खड़गे की क्या भूमिका होगी?
नेता विपक्ष के रूप में खड़गे राष्ट्रीय मुद्दों पर विपक्षी रणनीति तय करेंगे और सरकार को सदन में जवाबदेह ठहराएंगे। उन्होंने 'इंडिया' ब्लॉक के साथ पहले से अधिक समन्वय का भरोसा दिलाया है।
राष्ट्र प्रेस
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