मल्लिकार्जुन खड़गे ने राज्यसभा सदस्य के रूप में ली शपथ, कर्नाटक से हुए थे निर्विरोध पुनर्निर्वाचित
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 29 जून 2026 को संसद भवन, नई दिल्ली में राज्यसभा सदस्य के रूप में पद एवं गोपनीयता की शपथ ग्रहण की। कर्नाटक से निर्विरोध पुनर्निर्वाचित होने के बाद यह उनका नया कार्यकाल है, जिससे वे संसद के उच्च सदन में विपक्ष का नेतृत्व निरंतर जारी रखेंगे। भारत के उपराष्ट्रपति एवं राज्यसभा के सभापति सी. पी. राधाकृष्णन ने उन्हें शपथ दिलाई।
शपथ समारोह में कौन-कौन रहे उपस्थित
शपथ ग्रहण समारोह में राजनीतिक जगत की कई प्रमुख हस्तियाँ मौजूद रहीं। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी, राज्यसभा में सदन के नेता जे. पी. नड्डा, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू, केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा सहित अनेक वरिष्ठ नेता एवं गणमान्य व्यक्ति इस अवसर पर उपस्थित रहे। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति ने इस समारोह को संसदीय परंपरा की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण बना दिया।
खड़गे का संदेश: जनता की आवाज़ बुलंद करने की प्रतिबद्धता
शपथ ग्रहण के बाद खड़गे ने कहा कि उन्हें एक बार फिर राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने का अवसर मिला है, जो उनके लिए गर्व और बड़ी जिम्मेदारी का विषय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नेता प्रतिपक्ष के रूप में वे उच्च सदन में जनता की आवाज़ पूरी निष्ठा और दृढ़ता से उठाते रहेंगे। उन्होंने उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन और उपसभापति हरिवंश के प्रति सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।
इंडिया गठबंधन और मानसून सत्र की तैयारी
खड़गे ने कांग्रेस नेतृत्व — विशेष रूप से सोनिया गांधी और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी — के साथ-साथ पार्टी सांसदों, कार्यकर्ताओं और समर्थकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने इंडिया गठबंधन और व्यापक विपक्ष के फ्लोर नेताओं के सहयोग की भी सराहना की। खड़गे ने विश्वास जताया कि आगामी मानसून सत्र में विपक्ष पहले से अधिक समन्वय के साथ कार्य करेगा और सरकार को जनता के प्रति जवाबदेह बनाने का प्रयास करेगा।
25 जून को भी हुए थे 10 सदस्यों के शपथ ग्रहण
गौरतलब है कि इससे पूर्व 25 जून को राज्यसभा सभापति सी. पी. राधाकृष्णन ने नवनिर्वाचित और पुनर्निर्वाचित 10 सदस्यों को शपथ एवं प्रतिज्ञान दिलाया था। इन सदस्यों में प्रवीण चक्रवर्ती, देबाशीष सामंतराय, सना सतीश बाबू, विजय चिंतकायाला, भाष्यम राम कृष्ण, लिंगामनेनी रमेश, राजेश परमानंद शुक्ला, बैद्यनाथ राम, परिमल नथवानी और ताई टागाक शामिल रहे। कई सांसदों ने अपनी मातृभाषा में शपथ ली, जो संसदीय विविधता का प्रतीक रही। खड़गे ने अपने संदेश का समापन 'जय बापू, जय भीम, जय संविधान, जय हिंद' के साथ किया — जो उनकी वैचारिक प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।