17 अगस्त 2026
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मल्लिकार्जुन खड़गे फिर राज्यसभा नेता प्रतिपक्ष, 26 जून से प्रभावी; रिजिजू ने दी बधाई

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मल्लिकार्जुन खड़गे फिर राज्यसभा नेता प्रतिपक्ष, 26 जून से प्रभावी; रिजिजू ने दी बधाई

सारांश

मल्लिकार्जुन खड़गे की राज्यसभा में वापसी महज़ औपचारिकता नहीं — यह विपक्षी एकजुटता का संकेत है। 25 जून को कार्यकाल समाप्त होने के अगले ही दिन पुनर्नियुक्ति से स्पष्ट है कि कांग्रेस उच्च सदन में अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए तत्पर है।

मुख्य बातें

मल्लिकार्जुन खड़गे को 26 जून 2026 से राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में पुनः अधिसूचित किया गया।
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्रालय ने 3 जुलाई 2026 को आधिकारिक अधिसूचना जारी की।
नियुक्ति 'सैलरी एंड अलाउंसेज ऑफ लीडर्स ऑफ ऑपोजिशन इन पार्लियामेंट एक्ट, 1977' की धारा 2 और 9 के तहत हुई।
खड़गे का पिछला कार्यकाल 25 जून 2026 को समाप्त हुआ था; उच्च सदन में पुनर्निर्वाचन के बाद अगले दिन से पद बहाल हुआ।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने एक्स पर बधाई देते हुए सार्थक संसदीय सहयोग की इच्छा जताई।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को 26 जून 2026 से राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में पुनः आधिकारिक रूप से अधिसूचित कर दिया गया है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्रालय ने 3 जुलाई 2026 को यह अधिसूचना जारी की, जिससे उच्च सदन में विपक्ष की भूमिका को औपचारिक मान्यता मिल गई है।

अधिसूचना का कानूनी आधार

मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, 'सैलरी एंड अलाउंसेज ऑफ लीडर्स ऑफ ऑपोजिशन इन पार्लियामेंट एक्ट, 1977' की धारा 2 के तहत राज्यसभा के सभापति ने खड़गे को नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता दी। इसके बाद उसी अधिनियम की धारा 9 के तहत केंद्र सरकार ने उन्हें औपचारिक रूप से अधिसूचित किया।

पद रिक्ति और पुनर्नियुक्ति की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि खड़गे का पिछला राज्यसभा कार्यकाल 25 जून 2026 को समाप्त हो गया था, जिसके कारण उनका नेता प्रतिपक्ष का पद भी उसी दिन रिक्त हो गया था। उच्च सदन में पुनः निर्वाचित होने के बाद अगले ही दिन — 26 जून 2026 से — उन्हें इस पद के लिए दोबारा मान्यता दी गई। यह ऐसे समय में आया है जब संसद के आगामी सत्रों में कई महत्वपूर्ण विधायी मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस की संभावना है।

रिजिजू की बधाई और सहयोग का संदेश

अधिसूचना जारी होने के तुरंत बाद केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर खड़गे को बधाई दी। रिजिजू ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'मल्लिकार्जुन खड़गे को राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में अधिसूचित किए जाने पर हार्दिक बधाई। मैं सार्थक चर्चा सुनिश्चित करने और संसद की लोकतांत्रिक परंपराओं एवं मूल्यों को मजबूत करने के लिए उनके साथ मिलकर काम करने का इच्छुक हूं।' यह बधाई सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच संसदीय सौजन्य की परंपरा को दर्शाती है।

आगे की भूमिका और संसदीय महत्व

नेता प्रतिपक्ष के रूप में खड़गे की वापसी से राज्यसभा में विपक्षी खेमे को एक स्थापित और अनुभवी नेतृत्व मिला है। आने वाले संसदीय सत्रों में बजट, आर्थिक नीतियों और अन्य राष्ट्रीय मुद्दों पर होने वाली बहसों में उनकी भूमिका निर्णायक मानी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि खड़गे की निरंतरता विपक्षी एकजुटता के लिहाज़ से भी महत्वपूर्ण संकेत है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा आगामी सत्रों में होगी, जहाँ खड़गे को विपक्षी एकता बनाए रखते हुए सरकार को जवाबदेह ठहराना होगा।
RashtraPress
17 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मल्लिकार्जुन खड़गे को राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष कब से अधिसूचित किया गया है?
खड़गे को 26 जून 2026 से राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में अधिसूचित किया गया है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्रालय ने 3 जुलाई 2026 को इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी की।
खड़गे का नेता प्रतिपक्ष का पद पहले क्यों समाप्त हुआ था?
उनका राज्यसभा सदस्यता का कार्यकाल 25 जून 2026 को पूरा हो गया था, जिससे नेता प्रतिपक्ष का पद स्वतः रिक्त हो गया। उच्च सदन में पुनः निर्वाचित होने के बाद उन्हें 26 जून 2026 से दोबारा इस पद के लिए मान्यता दी गई।
किस कानून के तहत राज्यसभा नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति होती है?
'सैलरी एंड अलाउंसेज ऑफ लीडर्स ऑफ ऑपोजिशन इन पार्लियामेंट एक्ट, 1977' की धारा 2 के तहत राज्यसभा सभापति मान्यता देते हैं और धारा 9 के तहत केंद्र सरकार आधिकारिक अधिसूचना जारी करती है।
किरेन रिजिजू ने खड़गे को बधाई क्यों दी?
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने अधिसूचना जारी होने के बाद एक्स पर बधाई देते हुए सार्थक संसदीय चर्चा और लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत करने के लिए मिलकर काम करने की इच्छा जताई।
राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका क्या होती है?
नेता प्रतिपक्ष उच्च सदन में विपक्षी दलों का आधिकारिक प्रतिनिधि होता है और सरकारी नीतियों, विधेयकों तथा राष्ट्रीय मुद्दों पर विपक्ष का पक्ष रखता है। यह संवैधानिक पद सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाता है।
राष्ट्र प्रेस
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