मल्लिकार्जुन खड़गे फिर राज्यसभा नेता प्रतिपक्ष, 26 जून से प्रभावी; रिजिजू ने दी बधाई
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को 26 जून 2026 से राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में पुनः आधिकारिक रूप से अधिसूचित कर दिया गया है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्रालय ने 3 जुलाई 2026 को यह अधिसूचना जारी की, जिससे उच्च सदन में विपक्ष की भूमिका को औपचारिक मान्यता मिल गई है।
अधिसूचना का कानूनी आधार
मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, 'सैलरी एंड अलाउंसेज ऑफ लीडर्स ऑफ ऑपोजिशन इन पार्लियामेंट एक्ट, 1977' की धारा 2 के तहत राज्यसभा के सभापति ने खड़गे को नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता दी। इसके बाद उसी अधिनियम की धारा 9 के तहत केंद्र सरकार ने उन्हें औपचारिक रूप से अधिसूचित किया।
पद रिक्ति और पुनर्नियुक्ति की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि खड़गे का पिछला राज्यसभा कार्यकाल 25 जून 2026 को समाप्त हो गया था, जिसके कारण उनका नेता प्रतिपक्ष का पद भी उसी दिन रिक्त हो गया था। उच्च सदन में पुनः निर्वाचित होने के बाद अगले ही दिन — 26 जून 2026 से — उन्हें इस पद के लिए दोबारा मान्यता दी गई। यह ऐसे समय में आया है जब संसद के आगामी सत्रों में कई महत्वपूर्ण विधायी मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस की संभावना है।
रिजिजू की बधाई और सहयोग का संदेश
अधिसूचना जारी होने के तुरंत बाद केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर खड़गे को बधाई दी। रिजिजू ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'मल्लिकार्जुन खड़गे को राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में अधिसूचित किए जाने पर हार्दिक बधाई। मैं सार्थक चर्चा सुनिश्चित करने और संसद की लोकतांत्रिक परंपराओं एवं मूल्यों को मजबूत करने के लिए उनके साथ मिलकर काम करने का इच्छुक हूं।' यह बधाई सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच संसदीय सौजन्य की परंपरा को दर्शाती है।
आगे की भूमिका और संसदीय महत्व
नेता प्रतिपक्ष के रूप में खड़गे की वापसी से राज्यसभा में विपक्षी खेमे को एक स्थापित और अनुभवी नेतृत्व मिला है। आने वाले संसदीय सत्रों में बजट, आर्थिक नीतियों और अन्य राष्ट्रीय मुद्दों पर होने वाली बहसों में उनकी भूमिका निर्णायक मानी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि खड़गे की निरंतरता विपक्षी एकजुटता के लिहाज़ से भी महत्वपूर्ण संकेत है।