17 अगस्त 2026
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BJP राष्ट्रीय टीम में UP के 8 नेता, स्मृति ईरानी महामंत्री; 2027 से पहले जातीय-मुस्लिम दांव

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BJP राष्ट्रीय टीम में UP के 8 नेता, स्मृति ईरानी महामंत्री; 2027 से पहले जातीय-मुस्लिम दांव

सारांश

2027 से पहले BJP का बड़ा संगठनात्मक दांव — UP से 8 नेताओं को राष्ट्रीय टीम में जगह, दो महामंत्री, ओबीसी मोर्चे की नई कमान और दो मुस्लिम चेहरे। समाजवादी पार्टी के पीडीए समीकरण को तोड़ने की सीधी कोशिश।

मुख्य बातें

BJP की नई राष्ट्रीय टीम में उत्तर प्रदेश से 8 नेताओं को विभिन्न पदों पर जगह मिली है।
स्मृति ईरानी और हरीश द्विवेदी को राष्ट्रीय महामंत्री बनाया गया; 8 में से 2 महामंत्री UP से।
तारिक मंसूर और कुंवर बासित अली को टीम में शामिल कर पार्टी ने मुस्लिम समाज तक पहुँच का संकेत दिया।
राज्यसभा सदस्य अमरपाल मौर्य को राष्ट्रीय ओबीसी मोर्चे की कमान सौंपी गई।
रेखा वर्मा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष; भोला सिंह और संगीता यादव राष्ट्रीय मंत्री बनाए गए।
अरुण सिंह , सुरेंद्र नागर , लक्ष्मीकांत बाजपेयी और राधामोहन को नई टीम में जगह नहीं मिली।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 17 अगस्त 2026 को घोषित अपनी नई राष्ट्रीय संगठन टीम में उत्तर प्रदेश को असाधारण प्रतिनिधित्व दिया है — कुल आठ नेताओं को अलग-अलग पदों पर स्थान देकर पार्टी ने 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले अपनी सामाजिक और संगठनात्मक रणनीति का संकेत दे दिया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की इस टीम में ओबीसी, महिला और अल्पसंख्यक — तीनों समीकरणों को एक साथ साधने की कोशिश स्पष्ट नज़र आती है।

महामंत्री पद पर UP का दोहरा दावा

नई राष्ट्रीय टीम में आठ राष्ट्रीय महामंत्रियों में से दो उत्तर प्रदेश से हैं — स्मृति ईरानी और हरीश द्विवेदी। अन्य राज्यों को इस पद पर अधिकतम एक-एक प्रतिनिधित्व मिला है। यह असंतुलन सोचा-समझा है: उत्तर प्रदेश BJP का सबसे बड़ा चुनावी राज्य है और 2027 में वहाँ जो होगा, वह 2029 के लोकसभा चुनाव की दिशा तय करेगा।

मुस्लिम प्रतिनिधित्व — सोचा-समझा सियासी संकेत

इस बार BJP ने संगठन में अल्पसंख्यक चेहरों को प्रमुखता से शामिल किया है। प्रो. तारिक मंसूर और कुंवर बासित अली को राष्ट्रीय टीम में जगह देकर पार्टी ने मुस्लिम समाज तक राजनीतिक पहुँच बनाने का संकेत दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह कदम समाजवादी पार्टी के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समीकरण की काट के रूप में देखा जा रहा है।

ओबीसी मोर्चे की कमान — अमरपाल मौर्य को बड़ी जिम्मेदारी

उत्तर प्रदेश के राज्यसभा सदस्य अमरपाल मौर्य को राष्ट्रीय ओबीसी मोर्चे की अध्यक्षता सौंपी गई है। मौर्य इससे पहले प्रदेश महामंत्री की भूमिका निभा चुके हैं। पार्टी ने उत्तर प्रदेश से ओबीसी समाज की दो महिलाओं को भी राष्ट्रीय टीम में शामिल कर महिला और पिछड़ा वर्ग — दोनों समीकरणों को एक साथ साधने का प्रयास किया है।

उपाध्यक्ष और मंत्री पदों पर भी UP की मजबूत मौजूदगी

13 राष्ट्रीय उपाध्यक्षों में उत्तर प्रदेश के दो चेहरे शामिल हैं, जिनमें रेखा वर्मा का नाम प्रमुख है। 16 राष्ट्रीय मंत्रियों में बुलंदशहर के सांसद भोला सिंह और संगीता यादव को जगह दी गई है। इस प्रकार राष्ट्रीय संगठन के विभिन्न स्तरों पर उत्तर प्रदेश की कुल आठ नेताओं की उपस्थिति पार्टी की चुनावी प्राथमिकताओं को रेखांकित करती है।

किन्हें नहीं मिली जगह — अनुपस्थिति भी चर्चा में

नई टीम में कुछ वरिष्ठ और प्रभावशाली चेहरों की गैरमौजूदगी भी चर्चा का विषय बनी है। लंबे समय से राष्ट्रीय संगठन में सक्रिय अरुण सिंह को इस बार स्थान नहीं मिला। इसके अलावा नोएडा के राज्यसभा सदस्य सुरेंद्र नागर, मेरठ के राज्यसभा सदस्य लक्ष्मीकांत बाजपेयी और गोरखपुर के राधामोहन को भी राष्ट्रीय टीम से बाहर रखा गया है। राजनीतिक हलकों में इन बदलावों की व्याख्या संगठन में पीढ़ी परिवर्तन और नई सामाजिक प्राथमिकताओं के संकेत के रूप में की जा रही है।

आगे क्या

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि BJP की यह टीम महज प्रशासनिक फेरबदल नहीं, बल्कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की पूर्व-तैयारी है। ओबीसी, महिला और अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व को एक साथ साधने की यह कोशिश बताती है कि पार्टी समाजवादी पार्टी के सामाजिक गठबंधन को सीधी चुनौती देने की स्थिति में आना चाहती है। अब देखना होगा कि संगठनात्मक ढाँचे में यह बदलाव ज़मीनी स्तर पर कितना प्रभावी साबित होता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह प्रतिनिधित्व नीतिगत बदलाव में तब्दील होगा या सिर्फ चुनावी बैनर तक सीमित रहेगा। ओबीसी मोर्चे को मजबूत करना समाजवादी पार्टी के पीडीए आख्यान का सीधा जवाब है, लेकिन संगठनात्मक फेरबदल और मतदाता विश्वास के बीच की खाई को पाटना अभी बाकी है।
RashtraPress
17 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

BJP की नई राष्ट्रीय टीम में उत्तर प्रदेश से कितने और कौन-से नेता शामिल हैं?
उत्तर प्रदेश से कुल 8 नेताओं को जगह मिली है। इनमें महामंत्री स्मृति ईरानी और हरीश द्विवेदी, उपाध्यक्ष रेखा वर्मा, ओबीसी मोर्चा अध्यक्ष अमरपाल मौर्य, मंत्री भोला सिंह व संगीता यादव और अल्पसंख्यक प्रतिनिधि प्रो. तारिक मंसूर व कुंवर बासित अली शामिल हैं।
BJP ने मुस्लिम नेताओं को राष्ट्रीय टीम में क्यों शामिल किया?
पार्टी ने प्रो. तारिक मंसूर और कुंवर बासित अली को टीम में जगह देकर मुस्लिम मतदाताओं तक राजनीतिक पहुँच मजबूत करने का संकेत दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह कदम समाजवादी पार्टी के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समीकरण की काट के रूप में देखा जा रहा है।
अमरपाल मौर्य को राष्ट्रीय ओबीसी मोर्चे की जिम्मेदारी क्यों दी गई?
अमरपाल मौर्य उत्तर प्रदेश के राज्यसभा सदस्य हैं और पहले प्रदेश महामंत्री रह चुके हैं। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले ओबीसी वोट बैंक को साधने के लिए उन्हें राष्ट्रीय ओबीसी मोर्चे की कमान दी गई है।
किन वरिष्ठ नेताओं को इस बार BJP राष्ट्रीय टीम से बाहर रखा गया?
अरुण सिंह, नोएडा के राज्यसभा सदस्य सुरेंद्र नागर, मेरठ के राज्यसभा सदस्य लक्ष्मीकांत बाजपेयी और गोरखपुर के राधामोहन को नई राष्ट्रीय टीम में जगह नहीं मिली। इनकी अनुपस्थिति को संगठन में पीढ़ी परिवर्तन के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
UP में BJP की यह संगठनात्मक रणनीति 2027 चुनाव के लिए कितनी अहम है?
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि उत्तर प्रदेश BJP का सबसे निर्णायक राज्य है और 2027 का नतीजा 2029 के लोकसभा चुनाव की दिशा तय करेगा। ओबीसी, महिला और अल्पसंख्यक — तीनों समीकरणों को एक साथ साधने की यह कोशिश बताती है कि पार्टी समाजवादी पार्टी के सामाजिक गठबंधन को सीधी चुनौती देने की तैयारी में है।
राष्ट्र प्रेस
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