19 जुलाई 2026
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मानसून सत्र से पहले रिजिजू की अपील: संसद में हंगामा नहीं, रचनात्मक बहस करें सभी दल

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मानसून सत्र से पहले रिजिजू की अपील: संसद में हंगामा नहीं, रचनात्मक बहस करें सभी दल

सारांश

मानसून सत्र की पूर्व संध्या पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष को सीधा संदेश दिया — हंगामे से राजनीतिक लाभ नहीं मिलता, रचनात्मक बहस करें। 20 जुलाई से 13 अगस्त तक चलने वाले सत्र में 19 बैठकें होंगी और कई अहम विधेयक सूचीबद्ध हैं।

मुख्य बातें

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने 19 जुलाई 2026 को सर्वदलीय बैठक से पहले सभी दलों से सहयोग की अपील की।
संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त 2026 तक चलेगा — कुल 19 बैठकें प्रस्तावित।
रिजिजू ने कहा कि संसद में व्यवधान से किसी को राजनीतिक लाभ नहीं मिलता और जनता के धन व समय की बर्बादी होती है।
सर्वदलीय बैठक संसद भवन एनेक्सी के मुख्य समिति कक्ष में आयोजित की गई।
सरकार ने कहा कि विरोध का सही तरीका बहस है, न कि सदन की कार्यवाही बाधित करना।

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने 19 जुलाई 2026 को सभी राजनीतिक दलों से संसद के मानसून सत्र को सुचारू रूप से चलाने में सहयोग देने की अपील की। सर्वदलीय बैठक से पूर्व पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने स्पष्ट किया कि सदन में व्यवधान डालने से न किसी दल को राजनीतिक फायदा होता है और न ही जनता इसे स्वीकार करती है — बल्कि इससे जनता के धन और समय दोनों की बर्बादी होती है।

मानसून सत्र का कार्यक्रम

संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलेगा। लगभग चार सप्ताह के इस सत्र में कुल 19 बैठकें प्रस्तावित हैं। सत्र शुरू होने से एक दिन पहले सरकार ने संसद भवन एनेक्सी के मुख्य समिति कक्ष में सभी दलों के फ्लोर नेताओं की सर्वदलीय बैठक बुलाई, जिसमें दोनों सदनों की कार्यवाही प्रभावी ढंग से संचालित करने पर सहमति बनाने का प्रयास किया गया।

रिजिजू का विपक्ष को संदेश

रिजिजू ने कहा, 'संसद सभी की है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को सरकार के कामकाज और विधेयकों पर रचनात्मक चर्चा में हिस्सा लेना चाहिए।' उन्होंने यह भी कहा कि 'यह साबित हो चुका है कि संसद में व्यवधान पैदा करने से राजनीतिक लाभ नहीं मिलता। इसलिए सभी दलों से आग्रह है कि वे संसद के सुचारू संचालन में योगदान दें।'

उन्होंने जोर देकर कहा कि विरोध दर्ज कराने का सही तरीका बहस है, न कि सदन की कार्यवाही को बाधित करना। साथ ही उन्होंने आश्वस्त किया कि सरकार विपक्ष की बात सुनेगी और विपक्ष से भी यही अपेक्षा रखती है।

संसदीय लोकतंत्र पर जोर

संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि भारत एक संसदीय लोकतंत्र है, जहाँ निर्वाचित प्रतिनिधियों को अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है। उनके अनुसार, सदन में जोरदार बहस होनी चाहिए और हर पार्टी व सदस्य अपने विचार रखने के लिए स्वतंत्र है। उन्होंने कहा कि संसद जितनी बेहतर तरीके से चलेगी, देश को उतना ही अधिक लाभ मिलेगा।

पिछले सत्रों का संदर्भ

गौरतलब है कि पिछले कई सत्रों में विपक्षी दलों द्वारा किए गए व्यवधानों के कारण सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई है, जिससे कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर पर्याप्त चर्चा नहीं हो पाई। रिजिजू ने इसी पृष्ठभूमि में यह स्पष्ट किया कि इस तरह की गतिविधियाँ न जनता को पसंद हैं और न ही इनसे किसी दल को चुनावी फायदा मिलता है।

आगे क्या होगा

मानसून सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयक और सरकारी कामकाज सूचीबद्ध हैं। सरकार ने सभी दलों को भरोसा दिलाया है कि उनके पक्ष को सुना जाएगा। अब देखना यह होगा कि विपक्ष इस अपील को किस रूप में लेता है और 20 जुलाई से शुरू होने वाला सत्र कितना उत्पादक रहता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

विपक्ष शर्तें रखता है, और सत्र अक्सर हंगामे में ही शुरू होता है। असली सवाल यह है कि क्या सरकार ने विपक्ष की उन चिंताओं को सुनने का कोई ठोस ढाँचा दिया है जो उन्हें सदन में उठानी हैं — या यह अपील एकतरफा है। व्यवधान निश्चित रूप से अनुत्पादक हैं, लेकिन यह भी उतना ही सच है कि जब विपक्ष को लगता है कि उसकी बात सुनी नहीं जाती, तो हंगामा उसका अंतिम हथियार बन जाता है। संसदीय उत्पादकता की जिम्मेदारी केवल विपक्ष पर नहीं डाली जा सकती।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संसद का मानसून सत्र 2026 कब से कब तक चलेगा?
संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई 2026 से शुरू होकर 13 अगस्त 2026 तक चलेगा। इस चार सप्ताह के सत्र में कुल 19 बैठकें प्रस्तावित हैं।
किरेन रिजिजू ने विपक्ष से क्या अपील की?
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सभी राजनीतिक दलों से मानसून सत्र को सुचारू रूप से चलाने में सहयोग देने की अपील की। उन्होंने कहा कि संसद में व्यवधान से किसी को राजनीतिक लाभ नहीं मिलता और विरोध का सही तरीका रचनात्मक बहस है।
सर्वदलीय बैठक क्यों बुलाई गई और कहाँ हुई?
मानसून सत्र शुरू होने से पहले सभी दलों में सहमति बनाने के लिए सरकार ने 19 जुलाई को सर्वदलीय बैठक बुलाई। यह बैठक संसद भवन एनेक्सी के मुख्य समिति कक्ष में आयोजित की गई।
संसद में व्यवधान से क्या नुकसान होता है?
रिजिजू के अनुसार, संसद में व्यवधान से जनता के धन और समय दोनों की बर्बादी होती है। साथ ही, उन्होंने कहा कि यह साबित हो चुका है कि हंगामे से किसी भी दल को राजनीतिक फायदा नहीं मिलता।
मानसून सत्र 2026 में क्या होगा?
मानसून सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयक और सरकारी कामकाज सूचीबद्ध हैं। सरकार ने सभी दलों को भरोसा दिलाया है कि उनका पक्ष सुना जाएगा और रचनात्मक चर्चा के लिए पूरा अवसर दिया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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