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मानसून सत्र 2026: 20 जुलाई से 13 अगस्त तक संसद, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने दी मंजूरी

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मानसून सत्र 2026: 20 जुलाई से 13 अगस्त तक संसद, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने दी मंजूरी

सारांश

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की मंजूरी के साथ संसद का मानसून सत्र 2026 आधिकारिक हो गया — 20 जुलाई से 13 अगस्त तक। अप्रैल के विशेष सत्र में अटके महिला आरक्षण विधेयक समेत कई अहम मुद्दे इस बार संसद की परीक्षा लेंगे।

मुख्य बातें

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने संसद के मानसून सत्र 2026 को आहूत करने की मंजूरी दी।
सत्र 20 जुलाई 2026 से शुरू होकर 13 अगस्त 2026 तक — कुल 25 दिन — चलेगा।
संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने 4 जुलाई 2026 को एक्स पर यह जानकारी साझा की।
इससे पहले 16-18 अप्रैल 2026 के विशेष सत्र में महिला आरक्षण विधेयक लोकसभा में पर्याप्त समर्थन के अभाव में पारित नहीं हो सका था।
विपक्ष महंगाई, बेरोज़गारी, कृषि और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है।

संसद का मानसून सत्र 2026 आधिकारिक तौर पर 20 जुलाई से 13 अगस्त 2026 तक आयोजित होगा। केंद्र सरकार की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने लोकसभा और राज्यसभा — दोनों सदनों को आहूत करने की औपचारिक मंजूरी दे दी है। संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरण रिजिजू ने शनिवार, 4 जुलाई 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर यह जानकारी साझा की।

मानसून सत्र का कार्यक्रम और सरकार की अपेक्षाएँ

मंत्री किरण रिजिजू ने अपनी पोस्ट में स्पष्ट किया कि यह सत्र 25 दिनों तक चलेगा और राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर सार्थक बहस एवं निर्णय के लिए महत्वपूर्ण मंच साबित होगा। सरकार की ओर से उम्मीद जताई गई है कि दोनों सदनों में जनहित और राष्ट्रहित से जुड़े विषयों पर व्यापक एवं रचनात्मक चर्चा होगी।

यह ऐसे समय में आया है जब संसद के विशेष सत्र के बाद पहली बार दोनों सदन पूर्ण मानसून सत्र के लिए एकत्र होंगे। सरकार की विधायी पाइपलाइन में कई लंबित विधेयक और नीतिगत प्रस्ताव शामिल हैं, जिन्हें इस सत्र में पेश किए जाने की संभावना है।

विपक्ष की रणनीति

विपक्षी दल महंगाई, बेरोज़गारी, कृषि संकट, आंतरिक सुरक्षा और विदेश नीति जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस सत्र में तीखी बहस और वाद-विवाद देखने को मिल सकते हैं, विशेष रूप से उन विषयों पर जो पिछले विशेष सत्र में अधूरे रह गए थे।

पृष्ठभूमि: अप्रैल का विशेष सत्र और महिला आरक्षण विधेयक

गौरतलब है कि इससे पहले 16 अप्रैल से 18 अप्रैल 2026 तक संसद का एक विशेष सत्र आयोजित किया गया था। उस सत्र में महिला आरक्षण विधेयक पेश किया गया था, किंतु लोकसभा में आवश्यक संख्याबल न जुटने के कारण वह पारित नहीं हो सका। अब मानसून सत्र में इस विधेयक के भविष्य पर भी निगाहें रहेंगी।

यह 2026 का दूसरा नियमित संसदीय सत्र है। भारतीय संसद में सामान्यतः तीन सत्र होते हैं — बजट, मानसून और शीतकालीन — और मानसून सत्र परंपरागत रूप से विधायी उत्पादकता की दृष्टि से सबसे व्यस्त माना जाता है।

आम जनता और नीति विशेषज्ञों की नज़र

राजनीतिक दलों के साथ-साथ नीति विशेषज्ञ और आम नागरिक भी इस सत्र पर नज़र रखेंगे। विभिन्न मंत्रालयों से जुड़े विधायी कार्यों के अतिरिक्त, कई राष्ट्रीय मुद्दों पर संसद में चर्चा की उम्मीद है। सत्र की कार्यसूची और विधेयकों की सूची आने वाले दिनों में सार्वजनिक की जाएगी।

मानसून सत्र 2026 का यह दौर न केवल विधायी बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी निर्णायक साबित हो सकता है — खासतौर पर तब, जब सरकार और विपक्ष दोनों अपनी-अपनी प्राथमिकताओं के साथ संसद में उतरने की तैयारी में हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस बार संदर्भ असाधारण है — अप्रैल के विशेष सत्र में महिला आरक्षण विधेयक की विफलता के बाद सरकार की विधायी साख दाँव पर है। असली सवाल यह है कि क्या सरकार इस बार संख्याबल जुटा पाएगी, या यह विधेयक एक बार फिर स्थगित होगा। साथ ही, विपक्ष के पास महंगाई और बेरोज़गारी के ताज़ा आँकड़े हैं — यदि सत्र हंगामेदार रहा, तो विधायी उत्पादकता का सवाल उठना तय है। संसदीय लोकतंत्र की विश्वसनीयता के लिए यह सत्र केवल बहस का मंच नहीं, बल्कि जवाबदेही की कसौटी भी है।
RashtraPress
4 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संसद का मानसून सत्र 2026 कब से कब तक चलेगा?
संसद का मानसून सत्र 2026 20 जुलाई 2026 से शुरू होकर 13 अगस्त 2026 तक चलेगा। यह कुल 25 दिनों का सत्र होगा जिसमें लोकसभा और राज्यसभा दोनों बैठेंगी।
मानसून सत्र 2026 को किसने मंजूरी दी?
केंद्र सरकार की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने संसद के दोनों सदनों को आहूत करने की औपचारिक मंजूरी दी। इसकी जानकारी संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने 4 जुलाई 2026 को एक्स पर साझा की।
मानसून सत्र 2026 में कौन-से प्रमुख मुद्दे उठने की संभावना है?
सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयक और नीतिगत प्रस्ताव पेश कर सकती है। विपक्ष महंगाई, बेरोज़गारी, कृषि, आंतरिक सुरक्षा और विदेश नीति पर सरकार से जवाब माँगने की तैयारी में है।
अप्रैल 2026 के विशेष सत्र में क्या हुआ था?
16 से 18 अप्रैल 2026 के विशेष सत्र में महिला आरक्षण विधेयक पेश किया गया था, लेकिन लोकसभा में आवश्यक संख्याबल न मिलने के कारण यह पारित नहीं हो सका। अब मानसून सत्र में इस विधेयक के भविष्य पर भी नज़रें टिकी हैं।
भारत में संसद के सत्र कितने और कौन-कौन से होते हैं?
भारतीय संसद में सामान्यतः तीन नियमित सत्र होते हैं — बजट सत्र (फरवरी-मई), मानसून सत्र (जुलाई-अगस्त) और शीतकालीन सत्र (नवंबर-दिसंबर)। आवश्यकता पड़ने पर विशेष सत्र भी बुलाए जाते हैं, जैसा अप्रैल 2026 में हुआ।
राष्ट्र प्रेस
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