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संसद मानसून सत्र 2025: विपक्ष के हंगामे से लोकसभा स्थगित, मोदी ने की सार्थक चर्चा की अपील

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संसद मानसून सत्र 2025: विपक्ष के हंगामे से लोकसभा स्थगित, मोदी ने की सार्थक चर्चा की अपील

सारांश

संसद का मानसून सत्र पहले दिन ही विपक्षी हंगामे की भेंट चढ़ गया — लोकसभा दोपहर तक स्थगित। PM मोदी ने तर्क और तथ्य से चर्चा की अपील की, लेकिन विपक्ष वेल में उतर आया। यह उस पुराने पैटर्न की पुनरावृत्ति है जिसमें संसद के बहुमूल्य घंटे व्यवधान में गँवा दिए जाते हैं।

मुख्य बातें

संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई को नई दिल्ली में विपक्षी नारेबाजी और हंगामे के साथ शुरू हुआ।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बार-बार शांति की अपील के बावजूद सदन की कार्यवाही दोपहर तक के लिए स्थगित की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सत्र से पहले सभी सांसदों से सार्थक चर्चा में भाग लेने का आह्वान किया।
मोदी ने कहा — 'जहां तथ्य और तर्क होते हैं, वहां तूफान के लिए जगह नहीं होती।' विपक्षी सदस्य वेल में उतरे और नारे लगाए, जो पिछले कई सत्रों में भी दोहराया जा चुका पैटर्न है।

संसद का मानसून सत्र सोमवार, 20 जुलाई को नई दिल्ली में विपक्षी सांसदों की जोरदार नारेबाजी और हंगामे के साथ शुरू हुआ। सत्र के पहले ही दिन विपक्षी सदस्य लोकसभा के वेल में उतर आए और नारे लगाने लगे, जिसके चलते लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सदन की कार्यवाही दोपहर तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। यह घटनाक्रम संसदीय सत्रों में बार-बार देखे जाने वाले उस पैटर्न की पुनरावृत्ति है जिसमें सत्र का पहला दिन उत्पादक चर्चा की बजाय व्यवधान की भेंट चढ़ जाता है।

मुख्य घटनाक्रम

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कार्यवाही की शुरुआत दिवंगत सांसदों को श्रद्धांजलि देकर की। इसके तुरंत बाद विपक्षी बेंचों से नारेबाजी शुरू हो गई और सदन में हंगामे का माहौल बन गया। बिरला ने बार-बार शांति बनाए रखने की अपील करते हुए कहा, 'संसद लोकतंत्र का सर्वोच्च मंच है और सभी को बोलने का समय दिया जाएगा।' परंतु विपक्ष के सदस्यों का व्यवधान जारी रहा और अंततः अध्यक्ष को सदन स्थगित करना पड़ा।

प्रधानमंत्री का संदेश

सदन की कार्यवाही शुरू होने से पूर्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी सांसदों को सदन में सक्रिय भागीदारी के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि देश ने रफ्तार पकड़ ली है और संसद की सकारात्मक भावना उस रफ्तार में नई ऊर्जा भर सकती है।

मोदी ने अनुभवी सांसदों की भूमिका पर जोर देते हुए कहा, 'हमारे सदन में बहुत अनुभवी सांसद भी हैं, चाहे दल उनका कोई भी हो। उनके पास लंबा अनुभव है। ऐसे समय में उनके अनुभव और ज्ञान की देश व संसद को जरूरत है। आज के लिए संसद का चलना, सार्थक चर्चा होना और मिल-जुलकर देश को आगे ले जाने का संकल्प लेना — मैं समझता हूं कि यह समय की मांग है।'

युवाओं और राष्ट्रभक्ति का आह्वान

प्रधानमंत्री ने देश के युवाओं की आकांक्षाओं का हवाला देते हुए कहा, 'एस्पिरेशन से भरे हुए देश के युवाओं की मांग है कि हम आगे बढ़ें। आज समय की मांग है कि राष्ट्रनिष्ठा से भरे हुए राष्ट्रभक्ति के लिए जी रही आवाज को सदन में उचित मंच मिलता रहे।' उन्होंने तर्क और तथ्य पर आधारित चर्चा की वकालत करते हुए कहा, 'जहां तथ्य और तर्क होते हैं, वहां तूफान के लिए जगह नहीं होती है।'

संसदीय व्यवधान का व्यापक संदर्भ

गौरतलब है कि पिछले कई मानसून सत्रों में भी पहले दिन इसी तरह के हंगामे देखे गए हैं। बजट सत्र 2025 और उससे पहले के कई सत्रों में भी विपक्ष ने वेल में उतरकर कार्यवाही बाधित की थी। यह ऐसे समय में हुआ है जब संसद के समक्ष कई महत्वपूर्ण विधेयक और नीतिगत मुद्दे विचाराधीन हैं। आलोचकों का कहना है कि बार-बार होने वाले स्थगन से संसद की उत्पादकता पर गंभीर असर पड़ता है और जनता के मुद्दे अनसुने रह जाते हैं।

आगे की राह

दोपहर बाद कार्यवाही फिर से शुरू होने की उम्मीद थी। मानसून सत्र में कई अहम विधेयकों पर चर्चा और पारित होने की संभावना है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या सत्तापक्ष और विपक्ष सार्थक संवाद की राह निकाल पाते हैं, या व्यवधान का यह सिलसिला आगे भी जारी रहता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सवाल यह है कि सत्तापक्ष ने विपक्ष की उन मूल चिंताओं को दूर करने के लिए क्या किया जो बार-बार व्यवधान का कारण बनती हैं। संसदीय उत्पादकता के आँकड़े बताते हैं कि पिछले कई सत्रों में निर्धारित समय का बड़ा हिस्सा स्थगन में गँवाया गया है। जब तक दोनों पक्ष सदन के भीतर संवाद की जगह बनाने को प्राथमिकता नहीं देते, 'सार्थक चर्चा' एक आदर्श वाक्य ही बना रहेगा।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संसद का मानसून सत्र 2025 क्यों स्थगित हुआ?
20 जुलाई को मानसून सत्र के पहले दिन विपक्षी सांसद लोकसभा के वेल में उतर आए और जोरदार नारेबाजी करने लगे। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की बार-बार शांति की अपील के बावजूद हंगामा जारी रहा, जिसके कारण सदन की कार्यवाही दोपहर तक के लिए स्थगित करनी पड़ी।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने हंगामे पर क्या कहा?
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदस्यों से शांति बनाए रखने की बार-बार अपील की। उन्होंने कहा कि 'संसद लोकतंत्र का सर्वोच्च मंच है और सभी को बोलने का समय दिया जाएगा।' इसके बावजूद व्यवधान नहीं रुका।
PM मोदी ने मानसून सत्र से पहले क्या कहा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सत्र शुरू होने से पहले सभी सांसदों को सदन में सक्रिय और सार्थक भागीदारी के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि देश ने रफ्तार पकड़ी है और संसद की सकारात्मक भावना उस रफ्तार को नई ऊर्जा दे सकती है। उन्होंने तर्क और तथ्य पर आधारित चर्चा की वकालत की।
क्या संसद के मानसून सत्र में पहले दिन हंगामा होना सामान्य है?
कथित तौर पर पिछले कई मानसून और बजट सत्रों में भी पहले दिन इसी तरह के व्यवधान देखे गए हैं। आलोचकों का कहना है कि यह एक दोहराया जाने वाला पैटर्न बन चुका है जिसमें संसद के बहुमूल्य घंटे स्थगन में गँवा दिए जाते हैं।
मानसून सत्र में आगे क्या होने की उम्मीद है?
दोपहर बाद कार्यवाही फिर से शुरू होने की उम्मीद थी। मानसून सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा और मतदान होने की संभावना है। यह देखना अहम होगा कि सत्तापक्ष और विपक्ष सार्थक संवाद की राह निकाल पाते हैं या नहीं।
राष्ट्र प्रेस
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