लोकसभा मानसून सत्र: विपक्ष के हंगामे से 21 जुलाई को तीन बार स्थगन, बुधवार को फिर शुरू होगी कार्यवाही
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा की कार्यवाही 21 जुलाई 2026 को विपक्षी सांसदों के लगातार हंगामे और नारेबाजी के कारण तीन बार स्थगित करनी पड़ी और अंततः दिनभर के लिए सदन को बंद कर दिया गया। मानसून सत्र के दूसरे दिन भी कार्यवाही सामान्य रूप से नहीं चल सकी और सदन की अगली बैठक बुधवार सुबह 11 बजे निर्धारित की गई है।
मुख्य घटनाक्रम
सत्र की शुरुआत से ही विपक्षी सदस्य सदन के बीचों-बीच (वेल में) उतर आए और नारेबाजी करने लगे। अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठे दिलीप सैकिया ने सांसदों से बार-बार अपनी सीट पर लौटने, सदन की मर्यादा बनाए रखने और नियम 377 के तहत कार्यवाही चलने देने का अनुरोध किया। विपक्षी सदस्यों ने इन अनुरोधों को नजरअंदाज किया, जिससे पहली बार सदन स्थगित करना पड़ा।
स्पीकर ओम बिरला ने बार-बार हो रहे हंगामे के कारण सदन को दोपहर तक के लिए स्थगित किया। उन्होंने सदस्यों से अपील करते हुए कहा, 'क्या आप नहीं चाहते कि सदन चले? सभी को अपनी बात रखने का मौका मिलेगा।' दोपहर में कार्यवाही पुनः शुरू हुई, परंतु विपक्ष का विरोध जारी रहा।
दोपहर की बैठक की अध्यक्षता कर रही संध्या राय ने भी विपक्षी सदस्यों से व्यवस्था बनाए रखने की बार-बार अपील की। जब स्थिति नहीं सुधरी तो उन्होंने दूसरी बार स्थगन की घोषणा की। इसके बाद तीसरी बार सदन शुरू हुआ, लेकिन हंगामा थमने का नाम नहीं लिया और अंततः सदन को दिनभर के लिए स्थगित कर दिया गया।
विपक्ष की माँगें
विपक्षी दलों ने कई अहम मुद्दों पर सदन में चर्चा की माँग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। इनमें प्रमुख रूप से परीक्षा पेपर लीक का मामला और दिल्ली के जंतर-मंतर पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' के नेतृत्व में हुआ विरोध प्रदर्शन शामिल था। विपक्ष का कहना है कि सरकार इन मुद्दों पर बहस से बच रही है।
सोमवार से जारी है व्यवधान
गौरतलब है कि सोमवार 20 जुलाई को मानसून सत्र के पहले दिन भी यही स्थिति रही थी, जब बार-बार के स्थगनों के कारण संसद के दोनों सदनों — लोकसभा और राज्यसभा — की कार्यवाही बुरी तरह प्रभावित हुई थी। यह ऐसे समय में आया है जब मानसून सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयकों और बजट-संबंधी चर्चाओं को पूरा किया जाना था।
आगे क्या होगा
सदन की अगली बैठक बुधवार 22 जुलाई को सुबह 11 बजे होगी। यदि विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच कोई सहमति नहीं बनती, तो मानसून सत्र का बहुमूल्य समय व्यर्थ होने का खतरा बना रहेगा। संसदीय कार्य विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार स्थगन से सत्र के एजेंडे पर गंभीर असर पड़ सकता है।