लोकसभा मॉनसून सत्र: विपक्षी हंगामे से दूसरी बार स्थगित हुई कार्यवाही, INDIA गठबंधन की बैठक में बनी रणनीति
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा की कार्यवाही मंगलवार, 21 जुलाई को मॉनसून सत्र के दूसरे दिन विपक्षी सांसदों की लगातार नारेबाजी और हंगामे के कारण दूसरी बार स्थगित करनी पड़ी। सदन की अध्यक्षता कर रहीं संध्या राय की बार-बार की अपीलों का विपक्षी सदस्यों पर कोई असर नहीं पड़ा, जिसके बाद उन्होंने कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित करने की घोषणा की।
मुख्य घटनाक्रम
दिन की शुरुआत से ही सदन में तनाव का माहौल था। इससे पहले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने लगातार हंगामे के चलते कार्यवाही पहली बार दोपहर तक के लिए स्थगित की थी। विपक्षी सदस्यों की नारेबाजी थमने का नाम नहीं ले रही थी, जिससे सदन का सामान्य कामकाज पूरी तरह ठप हो गया।
बिरला ने सदस्यों से अपील करते हुए कहा, 'क्या आप नहीं चाहते कि सदन चले? सभी सदस्यों को अपनी बात रखने का पूरा मौका मिलेगा।' बावजूद इसके, विरोध जारी रहा और अंततः कार्यवाही दूसरी बार स्थगित करनी पड़ी।
INDIA गठबंधन की रणनीतिक बैठक
संसदीय कार्यवाही शुरू होने से पहले INDIA गठबंधन के नेताओं ने दिनभर की संसदीय रणनीति तय करने के लिए बैठक की। इस बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की सांसद सुप्रिया सुले समेत विपक्ष के कई अन्य वरिष्ठ नेता शामिल हुए।
विपक्ष के प्रमुख मुद्दे
विपक्षी दलों ने कई ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा की माँग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। इनमें परीक्षा पेपर लीक का मामला और नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुआ विरोध प्रदर्शन प्रमुख रूप से शामिल था। गौरतलब है कि यह वही स्थिति है जो सोमवार, 20 जुलाई को मॉनसून सत्र के पहले दिन भी देखी गई थी, जब दोनों सदनों का कामकाज हंगामे की भेंट चढ़ गया था।
आगे का कार्यक्रम
हंगामे के बावजूद लोकसभा में सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा और उसे पारित करने की प्रक्रिया पूरी किए जाने की योजना है। यह विधेयक सत्र के प्रमुख विधायी एजेंडे में शामिल है।
यह ऐसे समय में आया है जब मॉनसून सत्र के शुरुआती दोनों दिन व्यवधान की भेंट चढ़ चुके हैं, जिससे विपक्ष और सरकार के बीच संसदीय कार्यवाही को लेकर टकराव और गहरा होता दिख रहा है। आने वाले दिनों में सत्र की दिशा काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों पक्ष संवाद का कोई रास्ता निकाल पाते हैं या नहीं।