मॉनसून सत्र के पहले दिन लोकसभा 7 बार स्थगित, विपक्ष के हंगामे से पूरा दिन बर्बाद
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा की कार्यवाही 20 जुलाई 2026 को संसद के मॉनसून सत्र के पहले ही दिन सात बार स्थगित करनी पड़ी, क्योंकि विपक्षी सांसदों ने पीठासीन अधिकारियों की बार-बार अपील के बावजूद सदन के भीतर नारेबाजी और हंगामा जारी रखा। अंततः सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई।
मुख्य घटनाक्रम
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सत्र की शुरुआत दिवंगत पूर्व सांसदों को श्रद्धांजलि देकर की। इसके तत्काल बाद विपक्षी सांसद सदन के वेल में उतर आए और नारेबाजी शुरू कर दी, जिससे कार्यवाही ठप हो गई।
पीठासीन अधिकारी जगदंबिका पाल ने सांसदों से सदन की मर्यादा बनाए रखने का आग्रह किया, किंतु विपक्ष ने हंगामा जारी रखा। पीठासीन अधिकारी दिलीप सैकिया ने भी सदस्यों से अपनी सीटों पर बैठने और शून्य काल में 'महत्वपूर्ण मुद्दों' पर चर्चा का अवसर लेने का अनुरोध किया, लेकिन शोर-शराबा कम नहीं हुआ।
सैकिया ने सदन में कहा, 'यह व्यवहार लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है… क्या आप नहीं चाहते कि सदन चले?'
बार-बार स्थगन का सिलसिला
सदन पहले दोपहर 1 बजे तक के लिए स्थगित किया गया। दोपहर में जब कार्यवाही फिर शुरू हुई, तो वह केवल सात मिनट तक चल सकी और विपक्ष की भारी नारेबाजी के कारण लोकसभा को दोपहर 12:30 बजे तक के लिए एक बार फिर स्थगित करना पड़ा। इस प्रकार दिनभर में कुल सात बार स्थगन हुआ और अंततः कार्यवाही अगले दिन मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दी गई।
स्पीकर और प्रधानमंत्री की अपील
अध्यक्ष ओम बिरला ने शांति बनाए रखने की अपील दोहराते हुए कहा, 'संसद लोकतंत्र का सर्वोच्च मंच है और सभी को बोलने का समय दिया जाएगा।'
सत्र की शुरुआत से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सदन के सुचारू कामकाज और सार्थक चर्चा के लिए अनुभवी सांसदों के ज्ञान की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, 'जब तर्क और सबूत मजबूत हों, तो कोई भी शांत रहकर भी अपनी बात असरदार ढंग से कह सकता है। हर आवाज को सुने जाने का मौका मिले और हर विचार का उचित सम्मान हो।'
आम जनता पर असर
गौरतलब है कि मॉनसून सत्र का पहला दिन परंपरागत रूप से सरकार की विधायी प्राथमिकताओं की झलक देता है। इस बार पूरे दिन की कार्यवाही ठप रहने से न केवल शून्य काल बाधित हुआ, बल्कि कई महत्वपूर्ण विधेयकों और सार्वजनिक मुद्दों पर चर्चा का अवसर भी नहीं मिल सका। यह ऐसे समय में हुआ जब देश कई आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों का सामना कर रहा है।
क्या होगा आगे
लोकसभा की कार्यवाही अब मंगलवार, 21 जुलाई को फिर से शुरू होगी। यह देखना होगा कि विपक्ष अपनी माँगों को लेकर किस रणनीति के साथ सदन में उपस्थित होता है और सरकार सत्र को सुचारू बनाने के लिए क्या कदम उठाती है।