लोकसभा में विपक्ष का हंगामा: प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई पर माफी की मांग, कार्यवाही 12 बजे तक स्थगित
सारांश
मुख्य बातें
संसद के मानसून सत्र के दूसरे सप्ताह की शुरुआत सोमवार, 27 जुलाई को भी हंगामे के साथ हुई, जब लोकसभा में विपक्षी सदस्यों ने प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग के मुद्दे पर जोरदार नारेबाजी की और स्पीकर ओम बिरला की बार-बार की अपील के बावजूद सदन की कार्यवाही ठप कर दी। अंततः स्पीकर ने सदन को दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित करने का निर्णय लिया।
विपक्ष की मांग और हंगामे का कारण
विपक्षी सदस्यों ने सदन में प्रवेश करते ही तख्तियां उठाकर नारेबाजी शुरू कर दी। उनकी मुख्य मांग थी कि गृह मंत्री अमित शाह प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस के बल प्रयोग पर सदन में जवाब दें और सरकार इस कार्रवाई के लिए माफी मांगे। प्रश्नकाल शुरू होने देने की स्पीकर की अपीलों को दरकिनार करते हुए विपक्ष ने अपना विरोध जारी रखा।
स्पीकर ओम बिरला की कड़ी चेतावनी
हंगामे पर नाराजगी जताते हुए स्पीकर ओम बिरला ने कहा, 'सदन के अंदर यह (हंगामा) अच्छा प्रयास नहीं है। सदन की मर्यादाएं और इसकी सारी व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी सभी सदस्यों की है। मैं कुछ दिनों से सदस्यों के व्यवहार और आचरण को देख रहा हूं। यह (हंगामा) सदन की मर्यादाओं के अनुरूप नहीं है। यह बिल्कुल उचित नहीं है।'
उन्होंने आगे चेतावनी दी, 'मुझे ऐसे सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई करनी होगी, जो सदन की मर्यादाओं और परंपराओं को समाप्त करने का प्रयास कर रहे हैं। आप संवाद करें, चर्चा करें और महत्वपूर्ण मुद्दों पर बात करें, लेकिन तख्तियां लेकर आना सही नहीं है।' इसके बाद उन्होंने सदन को दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।
कार्यवाही की शुरुआत: राष्ट्रमंडल खेलों में भारत की जीत पर बधाई
हंगामे से पहले, सुबह 11 बजे लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही स्पीकर बिरला ने स्कॉटलैंड के ग्लासगो में चल रहे 23वें राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय खिलाड़ियों की उपलब्धियों पर सदन को बधाई दी। उन्होंने बताया कि भारोत्तोलन की 48 किलोग्राम वर्ग में मीराबाई चानू ने स्वर्ण पदक जीता है, जबकि ऋषिकांत सिंह और राजा मुथुपांडी ने रजत पदक हासिल किया।
स्पीकर ने यह भी उल्लेख किया कि पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार ने कांस्य पदक जीतकर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने सदन की ओर से सभी विजेता खिलाड़ियों, उनके कोच और टीम इंडिया को हार्दिक बधाई दी।
व्यापक संदर्भ: मानसून सत्र में लगातार व्यवधान
गौरतलब है कि मानसून सत्र के पहले सप्ताह से ही विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तनातनी बनी हुई है। यह ऐसे समय में आया है जब संसद में कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा होनी है। लगातार स्थगन से प्रश्नकाल और शून्यकाल प्रभावित हो रहे हैं, जो आम नागरिकों के मुद्दे उठाने का प्रमुख मंच है। आलोचकों का कहना है कि बार-बार होने वाले व्यवधान संसदीय लोकतंत्र की उत्पादकता पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
आगे क्या
स्पीकर की कार्रवाई की चेतावनी के बाद देखना होगा कि दोपहर बाद की बैठक में विपक्ष अपना रुख नरम करता है या नहीं। सरकार की ओर से अभी तक माफी की मांग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। मानसून सत्र के शेष दिनों में यह गतिरोध संसद की कार्यक्षमता की बड़ी परीक्षा बनेगा।