लोकसभा में मानसून सत्र ठप: विपक्ष के हंगामे से सदन दोपहर 2 बजे तक स्थगित, अमित शाह से बयान की मांग
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा की कार्यवाही 6 अगस्त, गुरुवार को एक बार फिर विपक्ष के हंगामे की भेंट चढ़ गई, जब स्पीकर ओम बिरला की बार-बार की अपीलों के बावजूद नारेबाजी और प्रदर्शन नहीं रुके और सदन को दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा। संसद के मानसून सत्र में यह गतिरोध लगातार बना हुआ है और सत्र की शुरुआत से अब तक प्रश्नकाल एक भी दिन सुचारु रूप से नहीं चल पाया है।
विपक्ष की मांगें
विपक्षी सांसद मुख्य रूप से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से सदन में बयान की माँग कर रहे हैं। इसके साथ ही राम मंदिर चढ़ावा मामले में लगे आरोपों का मुद्दा भी विपक्ष उठा रहा है। इन दोनों मुद्दों पर विपक्ष के रुख के कारण सदन में कोई भी सार्थक चर्चा संभव नहीं हो पाई है।
सरकारी कामकाज पर असर
हंगामे के चलते प्रश्नकाल पूरी तरह बाधित रहा है, जिससे जरूरी सरकारी विधायी कामकाज ठप पड़ा है। हालाँकि, बुधवार को इसी अफरातफरी के बीच लोकसभा ने एक महत्त्वपूर्ण विधेयक ध्वनिमत से पारित किया, जिसके तहत अदालतों में बैंक से जुड़े डिजिटल और वर्चुअल रिकॉर्ड को साक्ष्य के रूप में मान्यता दी जाएगी। इस कानून का उद्देश्य बैंकिंग साक्ष्य कानून को नए जमाने के डिजिटल लेनदेन के अनुकूल बनाना है, लेकिन हंगामे के कारण इस पर कोई विस्तृत चर्चा नहीं हो सकी।
सरकार की प्रतिक्रिया
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) और समाजवादी पार्टी लगातार भगवान राम का विरोध करती आई हैं। रिजिजू ने यह भी कहा कि संसद परिसर में राम मंदिर चढ़ावे को लेकर विपक्ष द्वारा किए गए प्रदर्शन से देशभर के लोगों की भावनाएँ आहत हुई हैं।
रिजिजू ने कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल का नाम लेते हुए कहा, 'वेणुगोपाल अच्छे इंसान हैं, लेकिन वे अपने साथियों को शालीनता नहीं सिखा पा रहे। सरकार चर्चा के लिए तैयार है।' उन्होंने विपक्ष पर जानबूझकर संसद को चलने न देने का आरोप लगाया।
आगे क्या
यह ऐसे समय में आया है जब मानसून सत्र में कई अहम विधेयक सूचीबद्ध हैं और गतिरोध जारी रहने से उनके पारित होने पर सवाल खड़े हो रहे हैं। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब मानसून सत्र हंगामे की भेंट चढ़ा हो — पिछले कई सत्रों में भी इसी तरह के व्यवधान देखे गए हैं। स्पीकर ओम बिरला के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शेष सत्र में सदन की उत्पादकता कैसे सुनिश्चित की जाए।