लोकसभा मानसून सत्र: विपक्ष के हंगामे से प्रश्नकाल बाधित, सदन 12 बजे तक स्थगित
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा की कार्यवाही सोमवार, 3 अगस्त 2026 को विपक्षी सांसदों के जोरदार हंगामे के चलते दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई, जब प्रश्नकाल शुरू होते ही सदन में शोर-शराबा भड़क उठा। नई दिल्ली में संसद के मानसून सत्र में यह व्यवधान लगातार जारी है और विधायी कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
सत्र की शुरुआत और हंगामे का क्रम
सदन की कार्यवाही सुबह 11 बजे एक सकारात्मक माहौल में शुरू हुई, जब लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने ग्लासगो में कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन करने वाले भारतीय पदक विजेताओं को बधाई दी। उन्होंने खिलाड़ियों के समर्पण, अनुशासन और उत्कृष्ट उपलब्धियों की सराहना की।
हालाँकि, जैसे ही प्रश्नकाल की बारी आई, विपक्षी सदस्यों ने नारेबाजी और हंगामा शुरू कर दिया। अध्यक्ष बिरला ने नाराज़गी जाहिर करते हुए कहा, 'क्या आप सभी संसद की कार्यवाही में बाधा डालने का पहले से ही मन बनाकर आते हैं? प्रश्नकाल बहुत महत्वपूर्ण है। मैं आपसे अनुरोध करता हूँ कि सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलने दें। इस तरह सदन में बाधा डालना संसदीय परंपराओं के खिलाफ है।'
बार-बार की अपील के बावजूद हंगामा थमा नहीं, और अंततः अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन को दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।
विपक्ष के मुद्दे और संसद परिसर में प्रदर्शन
स्थगन के बाद विपक्षी सांसद संसद परिसर में उतर आए और राम मंदिर दान प्रकरण को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान 'चंदा चोरों — गद्दी छोड़ो' के नारे लगाए गए।
गौरतलब है कि मानसून सत्र के पिछले कई दिनों से विपक्षी दल तीन प्रमुख मुद्दों पर सरकार को घेर रहे हैं — परीक्षा पेपर लीक, जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई, और राम मंदिर दान में कथित अनियमितताएँ। यह ऐसे समय में आया है जब सरकार के पास संसद में पेश करने के लिए कई महत्वपूर्ण विधेयक लंबित हैं।
सरकार की विधायी तैयारी
व्यवधानों के बावजूद केंद्र सरकार ने दोनों सदनों में महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने की योजना बनाई है। लोकसभा की कार्य-सूची के अनुसार, केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह 'द इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्टीट्यूट बिल, 2026' पेश करने वाले हैं, जबकि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सदन में 'द बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल-2026' विचार के लिए लाएँगी।
संसदीय कामकाज पर असर
यह ऐसी पहली बार नहीं है जब मानसून सत्र में इस तरह के व्यवधान देखे गए हों। विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार स्थगन से न केवल विधायी एजेंडा पिछड़ता है, बल्कि संसदीय प्रश्नकाल — जो कार्यपालिका की जवाबदेही का सबसे महत्वपूर्ण मंच है — भी बाधित होता है। आलोचकों का कहना है कि दोनों पक्षों को संसदीय मर्यादा बनाए रखने की जिम्मेदारी है।
आगे क्या
सरकार और विपक्ष के बीच तनाव को देखते हुए आने वाले दिनों में भी मानसून सत्र के सुचारू संचालन पर प्रश्नचिह्न बना हुआ है। सभी पक्षों की नज़र इस बात पर होगी कि क्या लंबित विधेयक — विशेषकर बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल और इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्टीट्यूट बिल — इस सत्र में पारित हो पाएँगे।