10 अगस्त 2026
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राज्यसभा में मानसून सत्र: 10 अगस्त को तीसरी बार स्थगित हुई कार्यवाही, प्रश्नकाल फिर बाधित

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राज्यसभा में मानसून सत्र: 10 अगस्त को तीसरी बार स्थगित हुई कार्यवाही, प्रश्नकाल फिर बाधित

सारांश

मानसून सत्र में एक बार फिर संसदीय कार्यवाही ठप — राज्यसभा में 10 अगस्त को प्रश्नकाल तीन बार स्थगित हुआ। विपक्षी सांसद वेल तक पहुँचे, सभापति की अपील बेअसर रही। लोकसभा और राज्यसभा दोनों में यही हाल है।

मुख्य बातें

राज्यसभा में 10 अगस्त को विपक्षी हंगामे के कारण कार्यवाही तीन बार स्थगित हुई।
सदन सुबह 11 बजे शुरू हुआ, पहले 12 बजे तक और फिर दोपहर 2 बजे तक स्थगित किया गया।
शून्यकाल भी बाधित रहा — केवल कुछ ही सदस्यों को बोलने का मौका मिला।
विपक्षी सांसद सभापति सीपी राधाकृष्णन की कुर्सी के नज़दीक वेल में आकर नारेबाजी करते रहे।
मानसून सत्र में लोकसभा और राज्यसभा — दोनों सदनों में प्रश्नकाल लगातार बाधित हो रहा है।

राज्यसभा में 10 अगस्त 2026 को मानसून सत्र के दौरान विपक्षी सांसदों के भारी हंगामे के कारण प्रश्नकाल की कार्यवाही पूरी तरह बाधित रही और सदन को दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा। यह सोमवार को तीसरी बार था जब सदन की कार्यवाही हंगामे की भेंट चढ़ी।

मुख्य घटनाक्रम

सदन की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू होते ही कुछ देर में हंगामा भड़क उठा, जिसके चलते पहले कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित की गई। 12 बजे पुनः सदन की बैठक शुरू हुई और प्रश्नकाल आरंभ हुआ, लेकिन विपक्षी सांसद अपनी सीटों से उठकर वेल में आ गए और नारेबाजी जारी रखी। हंगामे के बीच कुछ सांसदों ने मंत्रियों से प्रश्न पूछे और मंत्रियों ने उत्तर भी दिए, परंतु शोरगुल इतना बढ़ गया कि प्रश्नकाल पूर्ण नहीं हो सका।

सभापति की अपील और विपक्ष का रुख

राज्यसभा सभापति सीपी राधाकृष्णन ने हंगामा कर रहे सांसदों से बार-बार अपनी सीटों पर लौटने का आग्रह किया। कुछ विपक्षी सांसद सभापति की कुर्सी के काफी नज़दीक वेल में आकर नारेबाजी करते रहे। सभापति की अपील का कोई असर न होने पर उन्होंने कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

शून्यकाल भी बाधित

इससे पहले शून्यकाल की कार्यवाही भी इसी तरह प्रभावित रही। शून्यकाल में केवल गिने-चुने सदस्यों को ही अपनी बात रखने का अवसर मिला। नारेबाजी और हंगामे के कारण शून्यकाल की कार्यवाही भी दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित की गई थी।

मानसून सत्र में लगातार गतिरोध

यह ऐसे समय में आया है जब संसद के मानसून सत्र में लोकसभा और राज्यसभा — दोनों सदनों में प्रश्नकाल लगातार हंगामे की भेंट चढ़ रहा है। गौरतलब है कि प्रश्नकाल संसदीय लोकतंत्र का वह अहम स्तंभ है जिसके ज़रिए सांसद सरकार से सीधे जवाबदेही माँगते हैं। इसके बाधित होने से आम जनता से जुड़े कई ज़रूरी मुद्दे सदन के पटल पर नहीं आ पाते। विपक्ष अपनी मांगों को लेकर लगातार दबाव बनाए हुए है, हालांकि उन मांगों का विस्तृत ब्यौरा सदन में स्पष्ट रूप से सामने नहीं आ सका।

आगे की स्थिति

सदन के दोपहर 2 बजे पुनः बैठने के बाद भी कार्यवाही सुचारु होगी या नहीं, यह विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच संभावित सहमति पर निर्भर करेगा। मानसून सत्र में इस तरह के व्यवधान संसदीय समय की भारी बर्बादी के रूप में देखे जा रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि प्रश्नकाल वह एकमात्र संवैधानिक अवसर है जब सरकार को सीधे जवाब देना होता है। यह पैटर्न नया नहीं है — पिछले कई मानसून सत्रों में भी यही दोहराया गया है — लेकिन इस बार दोनों सदनों में एक साथ गतिरोध की गंभीरता अधिक चिंताजनक है। असली सवाल यह है कि क्या सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों मिलकर सदन को कार्यशील बनाने की राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाएंगे, या संसदीय समय की यह बर्बादी जारी रहेगी।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

10 अगस्त को राज्यसभा की कार्यवाही क्यों स्थगित हुई?
विपक्षी सांसदों के भारी हंगामे और नारेबाजी के कारण राज्यसभा की कार्यवाही 10 अगस्त को तीन बार स्थगित करनी पड़ी। सांसद वेल में आकर सभापति की कुर्सी के नज़दीक नारेबाजी करते रहे, जिससे प्रश्नकाल पूर्ण नहीं हो सका।
राज्यसभा में प्रश्नकाल कितनी बार बाधित हुआ?
10 अगस्त को राज्यसभा में प्रश्नकाल तीन बार बाधित हुआ — सुबह 11 बजे, दोपहर 12 बजे और फिर अंततः दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगन हुआ। शून्यकाल भी इसी तरह प्रभावित रहा।
सभापति सीपी राधाकृष्णन ने क्या किया?
राज्यसभा सभापति सीपी राधाकृष्णन ने हंगामा कर रहे सांसदों से बार-बार अपनी सीटों पर लौटने का आग्रह किया। अपील का असर न होने पर उन्होंने कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
मानसून सत्र में संसद की स्थिति क्या है?
मानसून सत्र में लोकसभा और राज्यसभा — दोनों सदनों में प्रश्नकाल लगातार हंगामे की भेंट चढ़ रहा है। यह पैटर्न पूरे सत्र में बना हुआ है, जिससे संसदीय कार्यवाही और जनता से जुड़े मुद्दे प्रभावित हो रहे हैं।
प्रश्नकाल के बाधित होने से क्या नुकसान होता है?
प्रश्नकाल वह संवैधानिक अवसर है जिसमें सांसद सरकार से सीधे जवाबदेही माँगते हैं। इसके बाधित होने से आम जनता से जुड़े ज़रूरी मुद्दे सदन के पटल पर नहीं आ पाते और संसदीय समय की बर्बादी होती है।
राष्ट्र प्रेस
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