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राज्यसभा में लगातार हंगामा, 4 अगस्त को भी प्रश्नकाल अधूरा; विपक्ष नियम 267 पर अड़ा

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राज्यसभा में लगातार हंगामा, 4 अगस्त को भी प्रश्नकाल अधूरा; विपक्ष नियम 267 पर अड़ा

सारांश

मानसून सत्र में राज्यसभा का प्रश्नकाल लगातार दूसरे दिन हंगामे की भेंट चढ़ा। विपक्ष नियम 267 के तहत चर्चा की माँग पर अड़ा रहा, सभापति राधाकृष्णन ने नोटिस अस्वीकार किए और सदन को दो बार स्थगित करना पड़ा। लोकसभा में भी यही स्थिति रही।

मुख्य बातें

4 अगस्त, मंगलवार को राज्यसभा में प्रश्नकाल हंगामे के कारण अधूरा रहा; सदन को दो बार स्थगित करना पड़ा।
सुबह 11 बजे शून्यकाल बाधित हुआ; 12 बजे से 2 बजे तक प्रश्नकाल भी पूरा नहीं हो सका।
विपक्षी सांसद नियम 267 के तहत विशेष चर्चा की माँग पर अड़े रहे; सभापति सी.पी.
राधाकृष्णन ने सभी नोटिस अस्वीकार किए।
नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के वक्तव्य के बाद सदन में तनाव और बढ़ा।
लोकसभा में भी मंगलवार को कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित रही; मानसून सत्र में दोनों सदनों की उत्पादकता प्रभावित।

मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा में 4 अगस्त, मंगलवार को एक बार फिर प्रश्नकाल की कार्यवाही हंगामे की भेंट चढ़ गई। सुबह 11 बजे सदन शुरू होते ही विपक्षी सांसदों के शोर-शराबे के कारण कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। 12 बजे पुनः शुरू होने पर भी गतिरोध बना रहा और प्रश्नकाल पूरा हुए बिना सदन को दोपहर 2 बजे तक के लिए फिर स्थगित कर दिया गया।

मुख्य घटनाक्रम

सुबह 11 बजे शून्यकाल की कार्यवाही के दौरान भी केवल कुछ ही सदस्यों को अपनी बात रखने का अवसर मिला। इसके बाद सदन में जबरदस्त नारेबाजी शुरू हो गई, जिसके चलते सभापति सी.पी. राधाकृष्णन को कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। 12 बजे प्रश्नकाल पुनः प्रारंभ हुआ, कुछ सांसदों ने प्रश्न पूछे और मंत्रियों ने शोरगुल के बीच उत्तर भी दिए, परंतु बढ़ते हंगामे के कारण प्रश्नकाल अधूरा रह गया।

विपक्ष की मांग और सभापति की प्रतिक्रिया

नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के वक्तव्य के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तनाव और बढ़ गया। बड़ी संख्या में विपक्षी सांसद अपनी सीटों से उठकर सभापति के आसन के निकट आ गए और नियम 267 के तहत विशेष चर्चा कराने की माँग पर अड़े रहे। सभापति राधाकृष्णन ने स्पष्ट किया कि नियम 267 के तहत दिए गए सभी नोटिस अस्वीकार कर दिए गए हैं। उन्होंने हाथों में पोस्टर लेकर प्रदर्शन करने वाले सांसदों पर नाराजगी जताते हुए इसे नियमों का उल्लंघन बताया, किंतु विरोध जारी रहा।

सोमवार से जारी है गतिरोध

यह स्थिति केवल मंगलवार तक सीमित नहीं है। सोमवार, 3 अगस्त को भी राज्यसभा में विपक्षी सांसद सभापति के आसन के समीप आकर नारेबाजी करते रहे और नियम 267 के तहत चर्चा की माँग पर अड़े रहे। यह ऐसे समय में आया है जब संसद का मानसून सत्र पहले से ही उत्पादकता के संकट से जूझ रहा है।

लोकसभा में भी यही स्थिति

गौरतलब है कि मानसून सत्र में संसद के दोनों सदनों में एक जैसी स्थिति बनी हुई है। लोकसभा में भी मंगलवार को सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। दोनों सदनों में प्रश्नकाल लगातार बाधित हो रहा है, जिससे संसदीय कार्यवाही की उत्पादकता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

आगे क्या

सत्र में शेष बचे दिनों में सरकार और विपक्ष के बीच इस गतिरोध के टूटने के आसार फिलहाल कम दिखते हैं। नियम 267 पर विपक्ष की हठ और सभापति द्वारा नोटिस अस्वीकार किए जाने की स्थिति में संसद की कार्यवाही आगे भी प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि मानसून सत्र की एक उभरती हुई प्रवृत्ति है जो संसदीय जवाबदेही के केंद्रीय तंत्र को कमज़ोर करती है। नियम 267 पर विपक्ष की हठ और सभापति द्वारा नोटिस की सामूहिक अस्वीकृति — दोनों मिलकर एक ऐसी स्थिति बनाते हैं जिसमें संवाद की जगह प्रदर्शन ले लेता है। आलोचकों का कहना है कि इस गतिरोध में दोनों पक्षों की भूमिका है — सरकार चर्चा से बचती दिखती है, और विपक्ष सदन की कार्यवाही को ही अपना मंच बना लेता है। करदाताओं के पैसे से चलने वाले संसद सत्र में जब प्रश्नकाल ही न हो, तो जनप्रतिनिधित्व का सबसे बुनियादी उद्देश्य पूरा नहीं होता।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

4 अगस्त को राज्यसभा में प्रश्नकाल क्यों नहीं चल सका?
विपक्षी सांसदों के हंगामे और नारेबाजी के कारण प्रश्नकाल की कार्यवाही पूरी नहीं हो सकी। सभापति सी.पी. राधाकृष्णन को सदन को पहले दोपहर 12 बजे और फिर 2 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा।
नियम 267 क्या है और विपक्ष इस पर क्यों अड़ा है?
नियम 267 राज्यसभा की प्रक्रिया का वह प्रावधान है जिसके तहत सदन के नियमित कार्यक्रम को स्थगित कर किसी अत्यावश्यक मुद्दे पर तत्काल चर्चा की जा सकती है। विपक्ष इस नियम के तहत अपने चुने हुए मुद्दों पर बहस कराना चाहता है, लेकिन सभापति ने सभी नोटिस अस्वीकार कर दिए हैं।
सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने विपक्ष के नोटिस क्यों अस्वीकार किए?
सभापति ने स्पष्ट किया कि नियम 267 के तहत दिए गए नोटिस स्वीकार नहीं किए गए हैं। उन्होंने हाथों में पोस्टर लेकर प्रदर्शन करने को नियमों का उल्लंघन बताया और सांसदों से अपनी सीटों पर लौटने का आग्रह किया, जिसे विपक्ष ने नहीं माना।
क्या लोकसभा में भी यही स्थिति रही?
हाँ, मंगलवार को लोकसभा में भी सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। मानसून सत्र में संसद के दोनों सदनों में प्रश्नकाल लगातार बाधित हो रहा है।
मानसून सत्र में संसद की कार्यवाही पर क्या असर पड़ रहा है?
लगातार हंगामे के कारण मानसून सत्र की उत्पादकता गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है। प्रश्नकाल — जो सरकार की जवाबदेही का प्रमुख माध्यम है — बार-बार अधूरा रह जाता है, जिससे सांसदों को अपने निर्वाचन क्षेत्र के मुद्दे उठाने का अवसर नहीं मिल पाता।
राष्ट्र प्रेस
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