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राज्यसभा में नियम 267 विवाद: मानसून सत्र में फिर हंगामा, प्रश्नकाल बाधित, दोनों सदन 2 बजे तक स्थगित

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राज्यसभा में नियम 267 विवाद: मानसून सत्र में फिर हंगामा, प्रश्नकाल बाधित, दोनों सदन 2 बजे तक स्थगित

सारांश

संसद का मानसून सत्र एक बार फिर हंगामे की भेंट चढ़ा — राज्यसभा में विपक्ष ने छात्र प्रदर्शनों पर नियम 267 के तहत चर्चा की माँग को लेकर प्रश्नकाल ही नहीं होने दिया। सभापति राधाकृष्णन ने नोटिस अस्वीकार किए, लोकसभा भी स्थगित रही।

मुख्य बातें

राज्यसभा में 3 अगस्त को प्रश्नकाल विपक्षी हंगामे के कारण पूरी तरह बाधित रहा।
विपक्ष नियम 267 के तहत छात्र प्रदर्शनों के दौरान पुलिस बल के कथित इस्तेमाल पर चर्चा की माँग कर रहा था।
राधाकृष्णन ने नियम 267 के सभी नोटिस अस्वीकार किए और कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित की।
लोकसभा की कार्यवाही भी दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दी गई।
मानसून सत्र में अब तक प्रश्नकाल व शून्यकाल का अधिकांश समय हंगामे की भेंट चढ़ चुका है।

राज्यसभा में सोमवार, 3 अगस्त को एक बार फिर प्रश्नकाल हंगामे की भेंट चढ़ गया, जब विपक्षी सांसदों ने नियम 267 के तहत छात्र प्रदर्शनों से जुड़े मुद्दों पर तत्काल चर्चा की माँग को लेकर जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। लोकसभा में भी यही स्थिति रही और वहाँ की कार्यवाही भी उतने ही समय के लिए स्थगित की गई।

मुख्य घटनाक्रम

सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसद अपनी सीटों से उठकर सभापति के आसन के निकट आ गए और नारेबाजी करने लगे। कई सांसदों के हाथों में पोस्टर भी थे, जिसे सभापति राधाकृष्णन ने सदन के नियमों का उल्लंघन बताते हुए कड़ी नाराजगी जताई। उनके बार-बार अनुरोध के बावजूद विपक्षी सांसद अपनी सीटों पर नहीं लौटे।

सभापति ने स्पष्ट किया कि नियम 267 के तहत दिए गए सभी नोटिस अस्वीकार कर दिए गए हैं और यह पहली बार नहीं है — पूर्व में भी इस नियम के तहत चर्चा की अनुमति नहीं दी गई थी। इस घोषणा के बाद सदन में हंगामा और तेज हो गया, जिसके चलते सभापति को कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।

विपक्ष की माँग

राज्यसभा में प्रतिपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि विपक्षी सांसदों ने नियम 267 के तहत नोटिस दिए हैं। विपक्ष की माँग है कि हाल के छात्र प्रदर्शनों के दौरान पुलिस बल के कथित इस्तेमाल और उससे जुड़े अन्य मुद्दों पर सदन में विस्तृत चर्चा हो। विपक्षी दलों का तर्क है कि यह मामला राष्ट्रीय महत्व का है और इसे प्रश्नकाल से पहले उठाया जाना चाहिए।

सभापति का रुख

सभापति राधाकृष्णन ने दोटूक शब्दों में कहा कि नियम 267 के तहत दिए गए नोटिस स्वीकार नहीं किए गए हैं और यह बात सदन को पहले भी बताई जा चुकी है। उन्होंने सांसदों से संसदीय मर्यादा बनाए रखने की अपील की, लेकिन विरोध जारी रहा। बढ़ते व्यवधान को देखते हुए उन्होंने कार्यवाही स्थगित करने का निर्णय लिया।

मानसून सत्र पर असर

गौरतलब है कि संसद के मौजूदा मानसून सत्र में अब तक प्रश्नकाल और शून्यकाल का अधिकांश समय इसी प्रकार के हंगामे की भेंट चढ़ चुका है। विधायी कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो रहा है और कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा टलती जा रही है। यह ऐसे समय में आया है जब सरकार के पास मानसून सत्र में कई विधेयक पारित कराने का एजेंडा है।

आगे क्या

दोपहर 2 बजे के बाद दोनों सदनों की कार्यवाही फिर से शुरू होने की उम्मीद थी, लेकिन विपक्ष के रुख को देखते हुए सत्र में सामान्य कामकाज बहाल होना अनिश्चित बना हुआ है। यदि दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बनी, तो मानसून सत्र के शेष दिनों में भी व्यवधान जारी रह सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

या उस विपक्ष की जो सदन को ही बंधक बना लेता है। मानसून सत्र में प्रश्नकाल और शून्यकाल का लगातार बाधित होना लोकतांत्रिक जवाबदेही के लिए गंभीर संकेत है, क्योंकि यही वह समय होता है जब सरकार को सीधे जवाब देना पड़ता है।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राज्यसभा में नियम 267 क्या है और विपक्ष इसकी माँग क्यों कर रहा है?
नियम 267 के तहत राज्यसभा में सूचीबद्ध कामकाज को स्थगित कर किसी अत्यावश्यक सार्वजनिक महत्व के मुद्दे पर तत्काल चर्चा कराई जा सकती है। विपक्ष इस नियम के तहत हाल के छात्र प्रदर्शनों के दौरान पुलिस बल के कथित इस्तेमाल पर चर्चा चाहता है, जिसे सभापति ने अस्वीकार कर दिया है।
3 अगस्त को राज्यसभा की कार्यवाही क्यों स्थगित हुई?
विपक्षी सांसदों ने नियम 267 के तहत चर्चा की माँग को लेकर सदन में जोरदार नारेबाजी की और सभापति के आसन के निकट आ गए। हंगामा थमने के कोई संकेत न देखकर सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दी।
मल्लिकार्जुन खड़गे का इस मामले में क्या रुख है?
राज्यसभा में प्रतिपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने स्पष्ट किया कि विपक्षी सांसदों ने नियम 267 के तहत नोटिस दिए हैं और वे छात्र प्रदर्शनों से जुड़े मुद्दों पर सदन में विस्तृत चर्चा चाहते हैं। उनके अनुसार यह राष्ट्रीय महत्व का विषय है।
मानसून सत्र में कितनी बार कार्यवाही बाधित हुई है?
मौजूदा मानसून सत्र में अब तक प्रश्नकाल और शून्यकाल का अधिकांश समय हंगामे की भेंट चढ़ चुका है। 3 अगस्त का व्यवधान इसी क्रम की एक और कड़ी है, जिससे विधायी कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
लोकसभा में 3 अगस्त को क्या हुआ?
लोकसभा में भी 3 अगस्त को हंगामे की स्थिति बनी रही और वहाँ की कार्यवाही भी दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। दोनों सदनों में एक साथ व्यवधान से संसद का पूरा दिन प्रभावित रहा।
राष्ट्र प्रेस
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