लोकसभा मानसून सत्र: विपक्ष के हंगामे से प्रश्नकाल ठप, स्पीकर ओम बिरला ने 2 बजे तक स्थगित किया
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा में मानसून सत्र के 9वें दिन, गुरुवार 30 जुलाई 2026 को, विपक्ष के हंगामे ने एक बार फिर प्रश्नकाल को बाधित कर दिया। स्पीकर ओम बिरला ने महज दो मिनट के भीतर सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित करने का निर्णय लिया। यह लगातार कई दिनों से जारी व्यवधान की श्रृंखला की नवीनतम कड़ी है।
सदन में क्या हुआ
सुबह 11 बजे संसद सत्र की शुरुआत होते ही कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के पदक विजेताओं को बधाई दी गई। इसके बाद स्पीकर ने प्रश्नकाल आरंभ किया। परंतु विपक्षी सदस्यों ने 'लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक 2026' पर बहस के दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी के भाषण के मुद्दे को लेकर नारेबाजी शुरू कर दी।
स्पीकर की चेतावनी और सदन का स्थगन
स्पीकर ओम बिरला ने हंगामा करते सदस्यों से अपील करते हुए कहा, 'मैंने कई बार आग्रह किया है कि प्रश्नकाल संसद सदस्यों का अधिकार है। प्रश्नकाल के अंदर सरकार की जवाबदेही भी तय होती है। मैंने सदन के माध्यम और फ्लोर लीडरों की बैठक में भी सभी से आग्रह किया कि सदन में प्रश्नकाल को बाधित न करें। प्रश्नकाल महत्वपूर्ण समय होता है।' उन्होंने सदस्यों से पूछा कि क्या वे प्रश्नकाल नहीं चलाना चाहते, किंतु विपक्षी सदस्य शांत नहीं हुए और अंततः कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
पृष्ठभूमि: एंटी पेपर लीक विधेयक का पारित होना
इससे एक दिन पहले, बुधवार 29 जुलाई को, लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक 2026 — जिसे एंटी पेपर लीक विधेयक भी कहा जा रहा है — लोकसभा में ध्वनि मत से पारित हो गया। दो दिनों की बहस के बाद पारित यह विधेयक पेपर लीक और परीक्षा-संबंधी गड़बड़ियों पर कड़े कानूनी उपाय लागू करने का रास्ता खोलता है।
गौरतलब है कि यह विधेयक ऐसे समय में पारित हुआ है, जब नीट पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे और तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था।
आम जनता और संसदीय कार्यवाही पर असर
प्रश्नकाल वह समय होता है जब सांसद सरकार से सीधे जवाब माँग सकते हैं। बार-बार इसके बाधित होने से न केवल संसदीय कार्यकुशलता प्रभावित होती है, बल्कि जनता के प्रतिनिधित्व का अधिकार भी कमज़ोर होता है। आलोचकों का कहना है कि इस प्रकार के निरंतर व्यवधान से मानसून सत्र का बहुमूल्य समय नष्ट हो रहा है।
आगे क्या
दोपहर 2 बजे सदन की कार्यवाही फिर से शुरू होने पर देखा जाएगा कि विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच कोई सहमति बन पाती है या नहीं। मानसून सत्र में अभी कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा होनी बाकी है।