मानसून सत्र पहले दिन ही बाधित: लोकसभा तीन बार स्थगित, NEET पेपर लीक पर विपक्ष का हंगामा
सारांश
मुख्य बातें
संसद के मानसून सत्र 2024 के पहले ही दिन, 20 जुलाई को लोकसभा में प्रश्नकाल और शून्यकाल दोनों हंगामे की भेंट चढ़ गए। NEET पेपर लीक विवाद पर विपक्षी दलों के सांसदों के लगातार हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही सुबह 11 बजे से शुरू होकर तीन बार स्थगित करनी पड़ी। राज्यसभा में भी यही स्थिति रही और वहाँ भी कार्यवाही तीन बार बाधित हुई।
मुख्य घटनाक्रम
सुबह 11 बजे लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही दिवंगत सांसदों को श्रद्धांजलि दी गई। इसके तुरंत बाद विपक्षी सदस्यों ने नारेबाजी शुरू कर दी। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विपक्ष के सांसदों से अपनी सीट पर बैठने और सदन चलाने में सहयोग करने का अनुरोध किया, लेकिन हंगामा नहीं थमा।
इसके बाद अध्यक्ष ने कार्यवाही पहली बार दोपहर 12 बजे तक स्थगित की। दोपहर में कार्यवाही पुनः शुरू होने के बाद मात्र सात मिनट चली और विपक्ष की भारी नारेबाजी के बीच सदन को दूसरी बार स्थगित करना पड़ा।
दोपहर 12.30 बजे कार्यवाही फिर शुरू होने पर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के सांसदों की नारेबाजी जारी रही। पीठासीन अधिकारी दिलीप सैकिया ने विपक्षी सदस्यों से कहा, 'सुबह से लगातार आप लोग सदन को बाधित कर रहे हैं। यह ठीक नहीं है। असम, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों में बाढ़ से गंभीर हालात हैं और लोग परेशानी में हैं। ऐसे मुद्दों पर चर्चा की जा सकती है।' उन्होंने यह भी कहा कि शून्यकाल सांसदों के लिए महत्वपूर्ण समय होता है और विपक्ष का यह व्यवहार उचित नहीं है। बार-बार अनुरोध के बावजूद हंगामा जारी रहा और सदन को तीसरी बार दोपहर 1 बजे तक स्थगित करना पड़ा।
राज्यसभा में भी यही हाल
राज्यसभा में सुबह 11 बजे कार्यवाही की शुरुआत नए सदस्यों को शपथ दिलाने से हुई। कुछ ही देर बाद विपक्षी सदस्यों ने NEET पेपर लीक और प्रदर्शनकारी छात्रों का मुद्दा उठाते हुए हंगामा शुरू कर दिया, जिससे कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित करनी पड़ी।
दोपहर में कार्यवाही शुरू होने पर मात्र एक मिनट सदन चला और फिर इसे 12.30 बजे तक स्थगित किया गया। 12.30 बजे पुनः शुरू होने के एक मिनट के भीतर ही राज्यसभा को तीसरी बार स्थगित कर दिया गया।
NEET विवाद: हंगामे की मूल वजह
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में NEET-UG पेपर लीक को लेकर छात्रों का आक्रोश चरम पर है और विपक्षी दल इस मुद्दे पर सरकार को संसद में घेरने की रणनीति पर काम कर रहे थे। गौरतलब है कि मानसून सत्र की शुरुआत से पहले ही विपक्ष ने स्पष्ट संकेत दे दिए थे कि वह इस मुद्दे पर सदन में जोरदार बहस की माँग करेगा।
यह पहली बार नहीं है जब संसद के किसी सत्र का पहला दिन हंगामे की भेंट चढ़ा हो। विशेषज्ञों का कहना है कि बार-बार होने वाले इस व्यवधान से न केवल संसदीय समय बर्बाद होता है, बल्कि महत्वपूर्ण जनहित के मुद्दे — जैसे उत्तर-पूर्व की बाढ़ — भी अनसुने रह जाते हैं।
आगे की स्थिति
मानसून सत्र के शेष दिनों में NEET विवाद, बजट और अन्य विधायी कार्यों पर चर्चा होनी है। यदि विपक्ष का रुख यही रहा, तो सत्र की उत्पादकता पर गंभीर सवाल उठ सकते हैं। सदन की कार्यवाही आगे सुचारू रूप से चल सके, इसके लिए सर्वदलीय बैठक की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।