4 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

जीडीपी ग्रोथ पर परमेश्वर का केंद्र से सवाल: प्रति व्यक्ति आय बांग्लादेश से भी कम, रोजगार कहाँ है?

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
जीडीपी ग्रोथ पर परमेश्वर का केंद्र से सवाल: प्रति व्यक्ति आय बांग्लादेश से भी कम, रोजगार कहाँ है?

सारांश

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री परमेश्वर ने केंद्र की जीडीपी-केंद्रित सोच को चुनौती दी — IMF के आंकड़े सामने रखते हुए बताया कि भारत की प्रति व्यक्ति आय 2,813 डॉलर, बांग्लादेश के 2,911 डॉलर से भी कम है। 333.19 अरब डॉलर के व्यापारिक घाटे और युवा बेरोजगारी के बीच उन्होंने रोजगार-केंद्रित विकास की माँग रखी।

मुख्य बातें

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री जी.
परमेश्वर ने 4 सितंबर को केंद्र सरकार की जीडीपी-केंद्रित आर्थिक नीति पर सवाल उठाए।
IMF के अनुमान के अनुसार 2026 में भारत की प्रति व्यक्ति जीडीपी 2,813 डॉलर — बांग्लादेश के अनुमानित 2,911 डॉलर से कम।
वित्त वर्ष 2025-26 में व्यापारिक घाटा बढ़कर 333.19 अरब डॉलर ; 2026-27 की पहली तिमाही में चालू खाते का घाटा 4.2 अरब डॉलर ।
परमेश्वर ने जीडीपी के नए आधार वर्ष ( 2022-23 ) और कार्यप्रणाली में बदलाव पर स्वतंत्र समीक्षा की माँग की।
'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' के बावजूद महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आयात निर्भरता बरकरार: परमेश्वर।
उपमुख्यमंत्री ने MSME को मजबूती, मजदूरी वृद्धि और शिक्षित युवाओं के लिए रोजगार-केंद्रित मैन्युफैक्चरिंग की माँग की।

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने शुक्रवार, 4 सितंबर को बेंगलुरु में केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि भारत की ऊंची जीडीपी वृद्धि दर का जश्न तब तक अधूरा है, जब तक इसका लाभ आम नागरिकों — युवाओं, मजदूरों और मध्यम वर्गीय परिवारों — तक नहीं पहुंचता। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश को सिर्फ जीडीपी का बड़ा आंकड़ा नहीं, बल्कि बेहतर रोजगार, अधिक आय और आर्थिक सुरक्षा की दरकार है।

मुख्य घटनाक्रम

'हर भारतीय तक पहुंचे विकास, सिर्फ जीडीपी का आंकड़ा नहीं' शीर्षक से जारी अपने बयान में परमेश्वर ने कहा, "जीडीपी का आंकड़ा समृद्धि का प्रमाणपत्र नहीं है। दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने के बावजूद भारत की प्रति व्यक्ति आय अभी भी काफी कम है।" उन्होंने रोजगार, प्रति व्यक्ति आय, विनिर्माण क्षेत्र और परिवारों की क्रय शक्ति को लेकर केंद्र से जवाब माँगा।

परमेश्वर ने 2011-12 से बदलकर 2022-23 किए गए जीडीपी के नए आधार वर्ष, नई कार्यप्रणाली, डेटा स्रोतों और अनुमान लगाने के तरीकों पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, कोविड-19 के बाद आई आर्थिक गिरावट के मुकाबले दिखाई जा रही ऊंची वृद्धि दर की स्वतंत्र समीक्षा और अधिक पारदर्शिता अनिवार्य है।

प्रति व्यक्ति आय: बांग्लादेश से पीछे

उपमुख्यमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अनुमान का हवाला देते हुए एक चौंकाने वाला तथ्य रखा — 2026 में भारत की प्रति व्यक्ति जीडीपी करीब 2,813 डॉलर रहने का अनुमान है, जो बांग्लादेश के अनुमानित 2,911 डॉलर से भी कम है। यह आंकड़ा उस समय और प्रासंगिक हो जाता है जब भारत खुद को विश्व की सबसे तेज बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में पेश करता है।

परमेश्वर ने केंद्र से यह स्पष्ट करने की माँग की कि 7–8 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि का उन युवाओं के लिए क्या अर्थ है, जिन्हें योग्यता के अनुरूप नौकरी नहीं मिल रही, जिन परिवारों की क्रय शक्ति पर दबाव है और जो कम वेतन या अस्थिर रोजगार पर निर्भर हैं।

व्यापारिक घाटा और बाहरी असंतुलन

परमेश्वर ने भारत की बाहरी आर्थिक स्थिति पर भी गंभीर चिंता जताई। उनके अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में चालू खाते का घाटा 4.2 अरब डॉलर और व्यापारिक घाटा 86.1 अरब डॉलर रहा। वहीं, 2025-26 में व्यापारिक घाटा बढ़कर 333.19 अरब डॉलर तक पहुंच गया।

उन्होंने कहा कि तेल की कीमतों, भू-राजनीतिक तनाव, आयात पर निर्भरता और वैश्विक व्यापार में व्यवधानों के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था अब भी संवेदनशील बनी हुई है। गौरतलब है कि 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं के बावजूद महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आयात निर्भरता बरकरार है।

रोजगार-केंद्रित विकास की माँग

उपमुख्यमंत्री ने रोजगार-आधारित विकास पर जोर देते हुए कहा कि भारत को ऐसी मैन्युफैक्चरिंग की जरूरत है जो लाखों रोजगार पैदा करे, MSME को मजबूत बनाए, मजदूरी बढ़ाए और शिक्षित युवाओं के लिए अवसर उपलब्ध कराए। उन्होंने कर्नाटक के आर्थिक मॉडल का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य ने तकनीक, नवाचार, मानव संसाधन, उद्यमिता, विनिर्माण और वैश्विक भागीदारी के जरिए टिकाऊ विकास का उदाहरण पेश किया है।

परमेश्वर ने अपनी बात को इन शब्दों में समेटा: "भारत को सिर्फ ऊंची जीडीपी नहीं चाहिए। भारत को ज्यादा आय, बेहतर रोजगार, मजबूत निर्यात, प्रतिस्पर्धी विनिर्माण और आर्थिक सुरक्षा चाहिए।"

आगे की राह

परमेश्वर का यह बयान ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार हाल की जीडीपी वृद्धि दर को भारत की आर्थिक मजबूती के प्रमाण के रूप में प्रस्तुत कर रही है। आलोचकों का कहना है कि विकास की वास्तविक कसौटी यही है कि यह समावेशी और टिकाऊ हो तथा आम भारतीयों के जीवन में वास्तविक सुधार लाए — न कि केवल समग्र जीडीपी के आंकड़ों तक सीमित रहे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इनका राजनीतिक महत्व कम नहीं — क्योंकि ये तय करते हैं कि 'विकास' की कहानी किस आधार पर बनती है। 333.19 अरब डॉलर का व्यापारिक घाटा और आयात निर्भरता यह संकेत देते हैं कि 'आत्मनिर्भर भारत' अभी एक आकांक्षा है, उपलब्धि नहीं।
RashtraPress
4 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जी. परमेश्वर ने जीडीपी ग्रोथ पर केंद्र सरकार से क्या सवाल पूछे?
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने 4 सितंबर को कहा कि 7–8 प्रतिशत की जीडीपी वृद्धि तब तक अर्थहीन है जब तक रोजगार, प्रति व्यक्ति आय और परिवारों की क्रय शक्ति नहीं बढ़ती। उन्होंने जीडीपी के नए आधार वर्ष (2022-23) और कार्यप्रणाली में बदलाव पर भी स्वतंत्र समीक्षा की माँग की।
IMF के अनुसार भारत की प्रति व्यक्ति आय बांग्लादेश से कम क्यों है?
IMF के अनुमान के अनुसार 2026 में भारत की प्रति व्यक्ति जीडीपी करीब 2,813 डॉलर रहने का अनुमान है, जबकि बांग्लादेश की 2,911 डॉलर। परमेश्वर ने इस आंकड़े को उद्धृत करते हुए तर्क दिया कि उच्च समग्र जीडीपी वृद्धि दर का लाभ आम नागरिकों तक नहीं पहुंच रहा।
भारत का व्यापारिक घाटा 2025-26 में कितना रहा?
परमेश्वर के अनुसार 2025-26 में भारत का व्यापारिक घाटा बढ़कर 333.19 अरब डॉलर हो गया। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में चालू खाते का घाटा 4.2 अरब डॉलर और व्यापारिक घाटा 86.1 अरब डॉलर रहा।
परमेश्वर ने रोजगार-केंद्रित विकास के लिए क्या सुझाव दिए?
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि भारत को ऐसी मैन्युफैक्चरिंग चाहिए जो लाखों रोजगार पैदा करे, MSME को मजबूत बनाए, मजदूरी बढ़ाए और शिक्षित युवाओं के लिए अवसर उपलब्ध कराए। उन्होंने मजबूत निर्यात और प्रतिस्पर्धी विनिर्माण को भी प्राथमिकता देने की बात कही।
'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' पर परमेश्वर का क्या कहना है?
परमेश्वर ने कहा कि इन महत्वाकांक्षी योजनाओं के बावजूद महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आयात निर्भरता अभी भी बनी हुई है। उनके अनुसार आर्थिक विकास ऐसा होना चाहिए जो भारत की आर्थिक संप्रभुता को भी वास्तविक रूप से मजबूत करे।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 5 घंटे पहले
  2. 2 दिन पहले
  3. 4 दिन पहले
  4. 2 सप्ताह पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 9 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 1 साल पहले