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GDP 7.8% ग्रोथ पर सियासी घमासान: मनोज झा बोले — गरीबों के बीच जाकर बताएं, बेबी ने आंकड़ों में हेरफेर का लगाया आरोप

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GDP 7.8% ग्रोथ पर सियासी घमासान: मनोज झा बोले — गरीबों के बीच जाकर बताएं, बेबी ने आंकड़ों में हेरफेर का लगाया आरोप

सारांश

भारत की 7.8% GDP वृद्धि दर ने सियासी अखाड़े में नई बहस छेड़ दी है। RJD सांसद मनोज झा ने संविधान के अनुच्छेद 39 का हवाला देकर गरीबों की कसौटी पर आंकड़े परखने की माँग की, जबकि CPI(M) के बेबी ने रघुराम राजन जैसे अर्थशास्त्रियों का हवाला देते हुए हेरफेर का सीधा आरोप लगाया।

मुख्य बातें

भारत की GDP वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत के आंकड़े पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस शुरू।
बिहार मंत्री श्रवण कुमार ने 2005 से पहले और बाद के बिहार की तुलना कर विकास को सही ठहराया।
RJD सांसद मनोज झा ने संविधान के अनुच्छेद 39 का हवाला देते हुए गरीबों के बीच जाकर ग्रोथ की हकीकत बताने की माँग की।
बेबी ने रघुराम राजन समेत अर्थशास्त्रियों का हवाला देते हुए GDP आंकड़ों में हेरफेर का आरोप लगाया।
CPI(M) अपने पोलित ब्यूरो में इस मुद्दे पर चर्चा कर एक-दो दिन में आधिकारिक बयान जारी करेगी।

भारत की 7.8 प्रतिशत GDP वृद्धि दर के हालिया आंकड़े को लेकर नई दिल्ली में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस छिड़ गई है। जहाँ सरकार समर्थक नेता इसे विकास का प्रमाण बता रहे हैं, वहीं विपक्षी दलों ने इस आंकड़े की विश्वसनीयता और ज़मीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

सत्तापक्ष का रुख: बिहार के बदलाव को बताया आधार

बिहार सरकार के मंत्री श्रवण कुमार ने विपक्ष की आलोचना को खारिज करते हुए कहा, 'उनसे कहिए कि वे 2005 से पहले के बिहार और 2005 के बाद के बिहार की तुलना करें।' उन्होंने तर्क दिया कि पहले गाँवों में सड़क, स्कूल, बिजली, पानी और अस्पताल जैसी बुनियादी सुविधाएँ नहीं थीं, जबकि आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। मंत्री ने कहा, 'शहर की तरह आज बिहार के गाँव हैं।'

विपक्ष की चुनौती: संविधान के अनुच्छेद 39 का हवाला

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद मनोज झा ने GDP के आंकड़े को आम जनता की कसौटी पर परखने की माँग की। उन्होंने कहा, 'प्रधानमंत्री यह आर्थिक वृद्धि की बात किसी निम्न या गरीब वर्ग के बीच जाकर कहें, तब इस वृद्धि की हकीकत सामने आएगी।' झा ने संविधान के अनुच्छेद 39 का उल्लेख करते हुए कहा कि आर्थिक नीतियों का मूल्यांकन उसी कसौटी पर होना चाहिए, जिसमें संसाधनों के न्यायपूर्ण वितरण की बात कही गई है।

वामपंथ का प्रहार: आंकड़ों में हेरफेर का आरोप

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [CPI(M)] के महासचिव एम. ए. बेबी ने इस ग्रोथ रेट को 'तथाकथित उछाल' करार दिया। उन्होंने कहा कि पूर्व वित्त सचिव और著名 अर्थशास्त्रियों ने खुद इस अनुमान की असलियत उजागर की है। बेबी ने रघुराम राजन जैसे अर्थशास्त्रियों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि 'जीडीपी आंकड़ों के ज़रिए जो जबरदस्त ग्रोथ रेट दिखाई जा रही है, वह असल में आंकड़ों में हेरफेर का नतीजा है।' गौरतलब है कि GDP पद्धति और आधार वर्ष को लेकर विशेषज्ञों में पहले से बहस चल रही है।

CPI(M) का अगला कदम: पोलित ब्यूरो में होगी चर्चा

बेबी ने यह भी बताया कि CPI(M) इस मुद्दे पर अपने पोलित ब्यूरो में विस्तृत चर्चा करेगी और बैठक के बाद जारी बयान में पार्टी का आधिकारिक नजरिया सार्वजनिक किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह जानकारी 'एक-दो दिन में' सामने आएगी। यह ऐसे समय में आया है जब विभिन्न आर्थिक संस्थाएँ भारत की वास्तविक विकास गति को लेकर अलग-अलग अनुमान पेश कर रही हैं।

आम जनता पर असर: ग्रोथ और आजीविका के बीच की खाई

आलोचकों का कहना है कि उच्च GDP वृद्धि दर और आम नागरिक की क्रय शक्ति के बीच का अंतर एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। रोजगार, महँगाई और असंगठित क्षेत्र की स्थिति जैसे पैमानों पर जब तक स्थिति नहीं सुधरती, तब तक GDP के आंकड़े आम जनता की समृद्धि का पूरा चित्र नहीं दे सकते। आने वाले दिनों में इस बहस के और तेज होने के आसार हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि यह वृद्धि किसके लिए है। संविधान के अनुच्छेद 39 का मनोज झा का संदर्भ महज राजनीतिक बयानबाजी नहीं — यह उस संरचनात्मक प्रश्न की ओर इशारा है जिसे मुख्यधारा की आर्थिक रिपोर्टिंग अक्सर नजरअंदाज करती है। GDP पद्धति और आधार वर्ष को लेकर विशेषज्ञों की आपत्तियाँ नई नहीं हैं, लेकिन जब रघुराम राजन जैसे अर्थशास्त्री भी सार्वजनिक रूप से सवाल उठाते हैं, तो इसे केवल विपक्षी राजनीति कहकर खारिज करना उचित नहीं। ग्रोथ के आंकड़े और रोजगार, महँगाई, असंगठित क्षेत्र की वास्तविकता के बीच की खाई को पाटे बिना, GDP का आँकड़ा आम नागरिक के लिए अमूर्त ही बना रहेगा।
RashtraPress
4 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत की GDP वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत पर विवाद क्यों है?
विपक्षी नेताओं और कुछ अर्थशास्त्रियों का कहना है कि यह आंकड़ा आम जनता, विशेषकर गरीब और निम्न वर्ग की वास्तविक आर्थिक स्थिति को नहीं दर्शाता। CPI(M) के बेबी ने आंकड़ों में हेरफेर का आरोप लगाया है, जबकि सत्तापक्ष इसे विकास का प्रमाण बता रहा है।
मनोज झा ने संविधान के अनुच्छेद 39 का जिक्र क्यों किया?
RJD सांसद मनोज झा ने अनुच्छेद 39 का हवाला देते हुए कहा कि आर्थिक नीतियों का मूल्यांकन संसाधनों के न्यायपूर्ण वितरण की कसौटी पर होना चाहिए। उनका तर्क है कि GDP वृद्धि तब तक अर्थहीन है जब तक इसका लाभ समाज के सबसे कमजोर वर्गों तक न पहुँचे।
CPI(M) के एम. ए. बेबी ने किन अर्थशास्त्रियों का हवाला दिया?
बेबी ने पूर्व RBI गवर्नर रघुराम राजन और पूर्व वित्त सचिव का हवाला देते हुए कहा कि इन विशेषज्ञों ने GDP आंकड़ों की विश्वसनीयता पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि जो ग्रोथ रेट दिखाई जा रही है वह आंकड़ों के उपयोग के तरीके का परिणाम है।
CPI(M) इस मुद्दे पर आगे क्या कदम उठाएगी?
बेबी के अनुसार, CPI(M) अपने पोलित ब्यूरो में इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा करेगी और बैठक के बाद एक-दो दिनों में आधिकारिक बयान जारी किया जाएगा, जिसमें GDP की 'तथाकथित उछाल' पर पार्टी का नजरिया स्पष्ट होगा।
बिहार मंत्री श्रवण कुमार ने विपक्ष को क्या जवाब दिया?
मंत्री श्रवण कुमार ने विपक्ष को 2005 से पहले और बाद के बिहार की तुलना करने की चुनौती दी। उन्होंने कहा कि पहले गाँवों में सड़क, बिजली, पानी, स्कूल और अस्पताल नहीं थे, जबकि आज सभी बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध हैं।
राष्ट्र प्रेस
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