4 सितंबर 2026
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कर्नाटक में ₹28.52 करोड़ का क्लाउड सीडिंग अभियान शुरू, जल संकट से बचाने की कोशिश

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कर्नाटक में ₹28.52 करोड़ का क्लाउड सीडिंग अभियान शुरू, जल संकट से बचाने की कोशिश

सारांश

कर्नाटक ने ₹28.52 करोड़ की लागत से क्लाउड सीडिंग अभियान शुरू किया है — मानसून के कमज़ोर रहने और जून 2027 तक गंभीर जल संकट की चेतावनी के बीच यह राज्य सरकार का बड़ा दांव है। पूर्व अभियान में 35% सफलता मिली थी; इस बार डॉप्लर रडार और दो-दो घंटे की निगरानी से बेहतर नतीजों की उम्मीद है।

मुख्य बातें

कर्नाटक सरकार ने 4 सितंबर 2026 को ₹28.52 करोड़ (जीएसटी को छोड़कर) की लागत से क्लाउड सीडिंग कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
जल संसाधन मंत्री एन.
चेलुवरयास्वामी ने बेंगलुरु एचएएल हवाई अड्डे से विशेष विमान को हरी झंडी दिखाई।
पूर्व के क्लाउड सीडिंग अभियान में 35 प्रतिशत सफलता मिली थी; इस बार डॉप्लर रडार से हर 2 घंटे में निगरानी होगी।
अनुबंध मेसर्स क्यथी क्लाइमेट मॉडिफिकेशन कंसल्टेंट्स एलएलपी को दिया गया; केटीपीपी अधिनियम से छूट प्राप्त।
मंत्री ने चेतावनी दी कि पर्याप्त भंडारण न हुआ तो जून 2027 तक गंभीर जल संकट संभव।
कोई विशिष्ट जिला पूर्व-निर्धारित नहीं; वास्तविक समय मौसम डेटा के आधार पर जलाशय क्षेत्रों और कृषि-संकट वाले जिलों को प्राथमिकता।

कर्नाटक सरकार ने 4 सितंबर 2026 को बेंगलुरु के एचएएल हवाई अड्डे से ₹28.52 करोड़ (जीएसटी को छोड़कर) की लागत वाले क्लाउड सीडिंग कार्यक्रम का शुभारंभ किया, जिसका उद्देश्य राज्य में वर्षा की कमी को पूरा करना और आगामी महीनों में संभावित जल संकट को टालना है। जल संसाधन मंत्री एन. चेलुवरयास्वामी ने राष्ट्रीय तिरंगा और कर्नाटक ध्वज लहराते हुए विशेष विमान को हरी झंडी दिखाई।

मुख्य घटनाक्रम

मंत्री चेलुवरयास्वामी ने लॉन्च के अवसर पर कहा कि कर्नाटक में इस वर्ष सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है। उन्होंने चेतावनी दी, 'मानसून का मौसम इस महीने के अंत तक समाप्त हो जाएगा। अगर तब तक पर्याप्त पानी का भंडारण नहीं किया गया, तो अगले जून के अंत तक गंभीर जल संकट उत्पन्न हो सकता है।' उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि फिलहाल सूखे की गंभीरता का सटीक आकलन करना मुश्किल है।

मंत्री ने पूर्व के अनुभव का हवाला देते हुए बताया कि पहले किए गए क्लाउड सीडिंग अभियान में लगभग 35 प्रतिशत सफलता मिली थी। उन्होंने कहा, 'चाहे नुकसान हो या फायदा, हमारा एकमात्र उद्देश्य कर्नाटक के लोगों को इस परियोजना से लाभ दिलाना है।'

परियोजना की संरचना और कार्यान्वयन

इस परियोजना को संयुक्त रूप से कर्नाटक नीरवारी निगम लिमिटेड (केएनएल) — जल संसाधन विभाग के अंतर्गत — और कर्नाटक राज्य प्राकृतिक आपदा निगरानी केंद्र (केएसडीएमसी) — राजस्व विभाग के अंतर्गत — द्वारा क्रियान्वित किया जाएगा। क्लाउड सीडिंग का अनुबंध मेसर्स क्यथी क्लाइमेट मॉडिफिकेशन कंसल्टेंट्स एलएलपी को दिया गया है, जिसे कर्नाटक सार्वजनिक खरीद में पारदर्शिता (केटीपीपी) अधिनियम के प्रावधानों से छूट दी गई है।

सरकार ने वैज्ञानिक निगरानी के लिए दो समितियाँ गठित की हैं। अतिरिक्त मुख्य सचिव और विकास आयुक्त की अध्यक्षता में एक निगरानी समिति परियोजना के समग्र कार्यान्वयन की देखरेख करेगी। वहीं, केएसडीएमसी के निदेशक की अध्यक्षता में आठ सदस्यों वाली एक तकनीकी सलाहकार एवं मूल्यांकन समिति तकनीकी मार्गदर्शन देगी और हर दो घंटे में संचालन की जानकारी अपडेट करेगी।

तकनीकी पहलू

क्लाउड सीडिंग में बादलों में सिल्वर आयोडाइड, पोटैशियम आयोडाइड, ड्राई आइस और सोडियम क्लोराइड जैसे रसायन डाले जाते हैं, जो बादल के प्रकार और तापमान के अनुसार चुने जाते हैं। तकनीकी टीम डॉप्लर रडार की सहायता से बादल घनत्व, हवा की गति और अन्य वायुमंडलीय मापदंडों की निरंतर निगरानी करेगी।

गौरतलब है कि सरकार ने किसी विशिष्ट जिले को पहले से लक्षित नहीं किया है। विमानों की तैनाती वास्तविक समय के मौसम डेटा के आधार पर होगी, और वर्षा की कमी वाले क्षेत्रों, प्रमुख जलाशयों के जलग्रहण क्षेत्रों तथा कृषि संकट से जूझ रहे जिलों को प्राथमिकता दी जाएगी।

आम जनता और किसानों पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक के कई जिले मानसून की अनिश्चितता के कारण खरीफ फसलों पर दबाव झेल रहे हैं। मंत्री ने स्पष्ट किया कि किसानों के हितों की रक्षा और पेयजल भंडारण सुनिश्चित करना इस पहल के केंद्र में है। लॉन्च कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के राजनीतिक सचिव जी.सी. चंद्रशेखर, पूर्व मंत्री एच.के. पाटिल, विधायक कोनारेड्डी और अतिरिक्त मुख्य सचिव गौरव गुप्ता सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

क्या होगा आगे

तकनीकी समिति प्रत्येक ऑपरेशन की लोकेशन हर दो घंटे में अपडेट होने वाली मौसम संबंधी जानकारी के आधार पर तय करेगी। अभियान की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सितंबर के शेष सप्ताहों में राज्य के ऊपर बादलों की उपस्थिति और संवहन की परिस्थितियाँ कितनी अनुकूल रहती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

समाधान नहीं — और 35% की पिछली सफलता दर इस ₹28.52 करोड़ के दांव की सीमाएँ खुद ही उजागर करती है। असली सवाल यह है कि केटीपीपी अधिनियम से छूट देकर पारदर्शिता को दरकिनार क्यों किया गया, जबकि सार्वजनिक धन की जवाबदेही सबसे ज़रूरी है। क्लाउड सीडिंग एक अनुपूरक उपाय है, न कि जलाशय प्रबंधन और दीर्घकालिक जल नीति का विकल्प — और कर्नाटक की आवर्ती सूखे की समस्या यह माँग करती है कि सरकार तात्कालिक उपायों के साथ-साथ संरचनात्मक सुधारों पर भी उतनी ही ऊर्जा लगाए।
RashtraPress
4 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक का क्लाउड सीडिंग कार्यक्रम क्या है?
यह कर्नाटक सरकार द्वारा शुरू किया गया एक वैज्ञानिक अभियान है जिसमें विशेष विमानों से बादलों में सिल्वर आयोडाइड जैसे रसायन डालकर कृत्रिम वर्षा कराने की कोशिश की जाती है। इसकी अनुमानित लागत ₹28.52 करोड़ (जीएसटी को छोड़कर) है और इसे 4 सितंबर 2026 को बेंगलुरु के एचएएल हवाई अड्डे से लॉन्च किया गया।
कर्नाटक को क्लाउड सीडिंग की ज़रूरत क्यों पड़ी?
राज्य में इस वर्ष सामान्य से कम वर्षा हुई है और मानसून के अंत तक पर्याप्त जलाशय भंडारण न होने पर जून 2027 तक गंभीर जल संकट की आशंका है। किसानों की खरीफ फसलें भी दबाव में हैं, जिसके चलते सरकार ने यह कदम उठाया।
क्लाउड सीडिंग ऑपरेशन कौन चलाएगा और निगरानी कैसे होगी?
अनुबंध मेसर्स क्यथी क्लाइमेट मॉडिफिकेशन कंसल्टेंट्स एलएलपी को दिया गया है। केएनएल और केएसडीएमसी संयुक्त रूप से इसे क्रियान्वित करेंगे। एक निगरानी समिति और आठ सदस्यों वाली तकनीकी सलाहकार समिति हर दो घंटे में डॉप्लर रडार डेटा के आधार पर अभियान को अपडेट करेगी।
क्लाउड सीडिंग में किन रसायनों का उपयोग होता है?
बादल के प्रकार और तापमान के अनुसार सिल्वर आयोडाइड, पोटैशियम आयोडाइड, ड्राई आइस और सोडियम क्लोराइड जैसे पदार्थों का उपयोग किया जा सकता है। ये रसायन बादलों में नमी को संघनित कर वर्षा को प्रेरित करते हैं।
किन क्षेत्रों को क्लाउड सीडिंग में प्राथमिकता मिलेगी?
सरकार ने पहले से कोई विशिष्ट जिला तय नहीं किया है। वास्तविक समय के मौसम डेटा के आधार पर वर्षा की कमी वाले क्षेत्रों, प्रमुख जलाशयों के जलग्रहण क्षेत्रों और कृषि संकट से जूझ रहे जिलों को प्राथमिकता दी जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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