कर्नाटक में ₹28.52 करोड़ का क्लाउड सीडिंग अभियान शुरू, जल संकट से बचाने की कोशिश
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक सरकार ने 4 सितंबर 2026 को बेंगलुरु के एचएएल हवाई अड्डे से ₹28.52 करोड़ (जीएसटी को छोड़कर) की लागत वाले क्लाउड सीडिंग कार्यक्रम का शुभारंभ किया, जिसका उद्देश्य राज्य में वर्षा की कमी को पूरा करना और आगामी महीनों में संभावित जल संकट को टालना है। जल संसाधन मंत्री एन. चेलुवरयास्वामी ने राष्ट्रीय तिरंगा और कर्नाटक ध्वज लहराते हुए विशेष विमान को हरी झंडी दिखाई।
मुख्य घटनाक्रम
मंत्री चेलुवरयास्वामी ने लॉन्च के अवसर पर कहा कि कर्नाटक में इस वर्ष सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है। उन्होंने चेतावनी दी, 'मानसून का मौसम इस महीने के अंत तक समाप्त हो जाएगा। अगर तब तक पर्याप्त पानी का भंडारण नहीं किया गया, तो अगले जून के अंत तक गंभीर जल संकट उत्पन्न हो सकता है।' उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि फिलहाल सूखे की गंभीरता का सटीक आकलन करना मुश्किल है।
मंत्री ने पूर्व के अनुभव का हवाला देते हुए बताया कि पहले किए गए क्लाउड सीडिंग अभियान में लगभग 35 प्रतिशत सफलता मिली थी। उन्होंने कहा, 'चाहे नुकसान हो या फायदा, हमारा एकमात्र उद्देश्य कर्नाटक के लोगों को इस परियोजना से लाभ दिलाना है।'
परियोजना की संरचना और कार्यान्वयन
इस परियोजना को संयुक्त रूप से कर्नाटक नीरवारी निगम लिमिटेड (केएनएल) — जल संसाधन विभाग के अंतर्गत — और कर्नाटक राज्य प्राकृतिक आपदा निगरानी केंद्र (केएसडीएमसी) — राजस्व विभाग के अंतर्गत — द्वारा क्रियान्वित किया जाएगा। क्लाउड सीडिंग का अनुबंध मेसर्स क्यथी क्लाइमेट मॉडिफिकेशन कंसल्टेंट्स एलएलपी को दिया गया है, जिसे कर्नाटक सार्वजनिक खरीद में पारदर्शिता (केटीपीपी) अधिनियम के प्रावधानों से छूट दी गई है।
सरकार ने वैज्ञानिक निगरानी के लिए दो समितियाँ गठित की हैं। अतिरिक्त मुख्य सचिव और विकास आयुक्त की अध्यक्षता में एक निगरानी समिति परियोजना के समग्र कार्यान्वयन की देखरेख करेगी। वहीं, केएसडीएमसी के निदेशक की अध्यक्षता में आठ सदस्यों वाली एक तकनीकी सलाहकार एवं मूल्यांकन समिति तकनीकी मार्गदर्शन देगी और हर दो घंटे में संचालन की जानकारी अपडेट करेगी।
तकनीकी पहलू
क्लाउड सीडिंग में बादलों में सिल्वर आयोडाइड, पोटैशियम आयोडाइड, ड्राई आइस और सोडियम क्लोराइड जैसे रसायन डाले जाते हैं, जो बादल के प्रकार और तापमान के अनुसार चुने जाते हैं। तकनीकी टीम डॉप्लर रडार की सहायता से बादल घनत्व, हवा की गति और अन्य वायुमंडलीय मापदंडों की निरंतर निगरानी करेगी।
गौरतलब है कि सरकार ने किसी विशिष्ट जिले को पहले से लक्षित नहीं किया है। विमानों की तैनाती वास्तविक समय के मौसम डेटा के आधार पर होगी, और वर्षा की कमी वाले क्षेत्रों, प्रमुख जलाशयों के जलग्रहण क्षेत्रों तथा कृषि संकट से जूझ रहे जिलों को प्राथमिकता दी जाएगी।
आम जनता और किसानों पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक के कई जिले मानसून की अनिश्चितता के कारण खरीफ फसलों पर दबाव झेल रहे हैं। मंत्री ने स्पष्ट किया कि किसानों के हितों की रक्षा और पेयजल भंडारण सुनिश्चित करना इस पहल के केंद्र में है। लॉन्च कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के राजनीतिक सचिव जी.सी. चंद्रशेखर, पूर्व मंत्री एच.के. पाटिल, विधायक कोनारेड्डी और अतिरिक्त मुख्य सचिव गौरव गुप्ता सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
क्या होगा आगे
तकनीकी समिति प्रत्येक ऑपरेशन की लोकेशन हर दो घंटे में अपडेट होने वाली मौसम संबंधी जानकारी के आधार पर तय करेगी। अभियान की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सितंबर के शेष सप्ताहों में राज्य के ऊपर बादलों की उपस्थिति और संवहन की परिस्थितियाँ कितनी अनुकूल रहती हैं।