कर्नाटक में क्लाउड सीडिंग कार्यक्रम: कमज़ोर मानसून के बीच सरकार ने बनाईं दो निगरानी समितियाँ
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक सरकार ने 29 अगस्त 2026 को राज्य में चल रहे क्लाउड सीडिंग कार्यक्रम की देखरेख और वैज्ञानिक मार्गदर्शन के लिए दो विशेष समितियों का गठन किया है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब इस वर्ष राज्य के अधिकांश हिस्सों में मानसूनी वर्षा सामान्य से कम दर्ज की गई है। जल संसाधन मंत्रालय द्वारा शनिवार को जारी आधिकारिक आदेश में इन समितियों की संरचना और जिम्मेदारियाँ स्पष्ट की गई हैं।
निगरानी समिति की संरचना
पहली समिति, निगरानी समिति, क्लाउड सीडिंग कार्यक्रम की समग्र निगरानी, पर्यवेक्षण और समय-समय पर समीक्षा के लिए जिम्मेदार होगी। छह सदस्यीय इस समिति की अध्यक्षता अपर मुख्य सचिव एवं विकास आयुक्त करेंगे।
समिति में जल संसाधन विभाग के अपर मुख्य सचिव, राजस्व विभाग (आपदा प्रबंधन) के प्रधान सचिव, ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज विभाग और कृषि विभाग के सचिव, तथा कर्नाटक राज्य प्राकृतिक आपदा निगरानी केंद्र (KSNDMC) के प्रबंध निदेशक सदस्य के रूप में शामिल हैं। कर्नाटक सिंचाई निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक सदस्य सचिव की भूमिका निभाएंगे।
तकनीकी सलाहकार समिति का गठन
दूसरी समिति, तकनीकी सलाहकार और मूल्यांकन समिति, KSNDMC को कार्यक्रम के क्रियान्वयन में तकनीकी सहायता, वैज्ञानिक मार्गदर्शन और सिफारिशें प्रदान करेगी। KSNDMC के निदेशक इस समिति के अध्यक्ष होंगे, और इसमें आठ सदस्य, एक सदस्य सचिव और एक विशेष आमंत्रित सदस्य शामिल हैं।
इस समिति में भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) के प्रोफेसर नागेश कुमार, सेवानिवृत्त प्रोफेसर जी.एस. भट, ग्रामीण पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के पूर्व इंजीनियर-इन-चीफ एच.एस. प्रकाश कुमार, भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM), पुणे के संयुक्त निदेशक स्तर के प्रतिनिधि, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और कर्नाटक राज्य रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर के प्रतिनिधि शामिल हैं। कर्नाटक राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुख्य पर्यावरण अधिकारी भी इस समिति के सदस्य होंगे।
कर्नाटक नीरावरी निगम लिमिटेड (KNNL) के मलप्रभा परियोजना क्षेत्र के मुख्य अभियंता सदस्य सचिव के रूप में कार्य करेंगे, जबकि बेलगावी के जैन कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रमुख संजीव सांगमी को विशेष आमंत्रित सदस्य नियुक्त किया गया है।
कार्यक्रम का वित्तीय और प्रशासनिक ढाँचा
सरकार ने इस क्लाउड सीडिंग कार्यक्रम के लिए GST को छोड़कर ₹28.52 करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की है। कार्यक्रम का संयुक्त क्रियान्वयन जल संसाधन विभाग के अंतर्गत KNNL और राजस्व विभाग के अंतर्गत KSNDMC द्वारा किया जाएगा।
क्लाउड सीडिंग सेवाएं क्याथी क्लाइमेट मॉडिफिकेशन कंसल्टेंट्स एलएलपी के माध्यम से ली जाएंगी। गौरतलब है कि इस फर्म को कर्नाटक पारदर्शिता लोक खरीद (KTPP) अधिनियम के प्रावधानों से विशेष छूट दी गई है, जो सामान्यतः सरकारी खरीद प्रक्रियाओं पर लागू होती है।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक के कई जिलों में सूखे जैसी स्थिति की आशंका बनी हुई है और जलाशयों का जलस्तर चिंताजनक रूप से नीचे है। दोनों समितियों के गठन से उम्मीद की जा रही है कि क्लाउड सीडिंग अभियान को वैज्ञानिक आधार पर और अधिक प्रभावी ढंग से संचालित किया जा सकेगा। आने वाले हफ्तों में इन समितियों की पहली बैठकें और कार्यक्रम की विस्तृत कार्ययोजना सामने आने की संभावना है।