सुबोध उनियाल का राहुल गांधी पर पलटवार: 'जातीय तनाव से राजनीतिक ज़मीन वापस पाने की कोशिश'
सारांश
मुख्य बातें
उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने 29 अगस्त को कांग्रेस नेता राहुल गांधी के जातिगत भेदभाव संबंधी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए पलटवार किया। उनियाल ने आरोप लगाया कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) अपनी खोई हुई राजनीतिक ज़मीन वापस पाने के लिए जाति के मुद्दे को जानबूझकर हवा दे रही है और समाज में तनाव पैदा करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्तराखंड में अनुसूचित जाति के लोगों के साथ किसी प्रकार का भेदभाव नहीं है और पहाड़ी क्षेत्रों में सामाजिक सौहार्द की सुदृढ़ परंपरा सदा से रही है।
हल्द्वानी विवाद पर उनियाल का पक्ष
हल्द्वानी के रामलीला मैदान में हुए विवाद का उल्लेख करते हुए उनियाल ने कहा कि वहाँ पूर्व में भी अनेक बैठकें और सभाएँ आयोजित हो चुकी हैं, जिनमें अनुसूचित जाति के नेता भी सहभागी रहे हैं। उनके अनुसार, वह विवाद जाति आधारित नहीं था, बल्कि एक विशेष धर्म के नारे लगाए जाने के विरोध से उपजा था। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस पूरे मामले से भारतीय जनता पार्टी (BJP) अथवा उसके किसी कार्यकर्ता का कोई संबंध नहीं है।
कांग्रेस के शासनकाल पर सवाल
अनुसूचित जाति के कल्याण को लेकर राहुल गांधी के सवालों का जवाब देते हुए उनियाल ने कांग्रेस से पूछा कि दशकों तक सत्ता में रहने के बावजूद उसने इस वर्ग के उत्थान के लिए पर्याप्त कार्य क्यों नहीं किए। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं — मुफ्त अनाज वितरण, उज्ज्वला योजना और हर घर नल-हर घर जल — का उल्लेख करते हुए कहा कि इन योजनाओं में जाति या वर्ग के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जाता और सभी नागरिकों को समान रूप से लाभ मिलता है।
राजनीतिक वोट बैंक की बात
उनियाल ने कहा कि लंबे समय तक अनुसूचित जाति और मुस्लिम समुदाय का बड़ा हिस्सा कांग्रेस के साथ रहा, किंतु समय के साथ इन वर्गों ने अपना अलग राजनीतिक नेतृत्व चुना। उन्होंने मायावती और रामविलास पासवान जैसे नेताओं का उदाहरण देते हुए कहा कि विभिन्न सामाजिक वर्गों के कांग्रेस से दूर होने के पीछे ठोस राजनीतिक कारण रहे हैं। उनियाल ने आरोप लगाया कि अब कांग्रेस अपना वोट बैंक पुनः प्राप्त करने के लिए जातीय तनाव को बढ़ावा दे रही है, जिससे समाज और देश दोनों को नुकसान हो सकता है।
उत्तराखंड में सामाजिक सौहार्द का दावा
राज्य में भेदभाव की स्थिति के सवाल पर उनियाल ने कहा कि पहाड़ों और गाँवों में अनुसूचित जाति के लोगों के साथ गहरे सामाजिक और पारिवारिक संबंधों की परंपरा है। उन्होंने दावा किया कि गाँवों में लोग बुज़ुर्ग अनुसूचित जाति के व्यक्तियों को चाचा, दादा या भाई जैसे संबोधनों से पुकारते हैं। राहुल गांधी द्वारा स्कूल, पानी और विवाह जैसे मामलों में भेदभाव के आरोपों पर उनियाल ने कहा कि किसी व्यक्ति के आचरण को पूरे राजनीतिक दल या पूरे समाज से जोड़ना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति भेदभाव करता है तो उसके विरुद्ध उसके व्यक्तिगत आचरण के आधार पर कार्रवाई होनी चाहिए — पूरे उत्तराखंड को भेदभाव वाला प्रदेश बताना तथ्यों से परे है। राज्य सरकार आगे भी अनुसूचित जाति के कल्याण के लिए नई योजनाएँ लाने पर विचार कर रही है।