29 अगस्त 2026
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सुबोध उनियाल का राहुल गांधी पर पलटवार: 'जातीय तनाव से राजनीतिक ज़मीन वापस पाने की कोशिश'

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सुबोध उनियाल का राहुल गांधी पर पलटवार: 'जातीय तनाव से राजनीतिक ज़मीन वापस पाने की कोशिश'

सारांश

उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने राहुल गांधी के जातिगत भेदभाव के आरोपों को राजनीतिक चाल बताया। उनका कहना है कि कांग्रेस अपना खोया वोट बैंक वापस पाने के लिए जातीय तनाव भड़का रही है — और हल्द्वानी विवाद जाति नहीं, धार्मिक नारों का मामला था।

मुख्य बातें

उत्तराखंड कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने 29 अगस्त को राहुल गांधी के जातिगत भेदभाव के आरोपों को खारिज किया।
उनियाल के अनुसार हल्द्वानी के रामलीला मैदान विवाद की जड़ जाति नहीं, बल्कि एक विशेष धर्म के नारों का विरोध था; BJP का इससे कोई संबंध नहीं।
उन्होंने उज्ज्वला योजना और हर घर नल-हर घर जल जैसी योजनाओं को जातिनिरपेक्ष बताया और कांग्रेस के शासनकाल में अनुसूचित जाति कल्याण पर सवाल उठाए।
मायावती और रामविलास पासवान का उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस का पारंपरिक वोट बैंक उससे पहले ही दूर हो चुका है।
उनियाल ने कहा कि उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में अनुसूचित जाति के साथ सामाजिक भेदभाव की स्थिति नहीं है और राज्य सरकार नई कल्याण योजनाएँ लाने पर विचार कर रही है।

उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने 29 अगस्त को कांग्रेस नेता राहुल गांधी के जातिगत भेदभाव संबंधी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए पलटवार किया। उनियाल ने आरोप लगाया कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) अपनी खोई हुई राजनीतिक ज़मीन वापस पाने के लिए जाति के मुद्दे को जानबूझकर हवा दे रही है और समाज में तनाव पैदा करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्तराखंड में अनुसूचित जाति के लोगों के साथ किसी प्रकार का भेदभाव नहीं है और पहाड़ी क्षेत्रों में सामाजिक सौहार्द की सुदृढ़ परंपरा सदा से रही है।

हल्द्वानी विवाद पर उनियाल का पक्ष

हल्द्वानी के रामलीला मैदान में हुए विवाद का उल्लेख करते हुए उनियाल ने कहा कि वहाँ पूर्व में भी अनेक बैठकें और सभाएँ आयोजित हो चुकी हैं, जिनमें अनुसूचित जाति के नेता भी सहभागी रहे हैं। उनके अनुसार, वह विवाद जाति आधारित नहीं था, बल्कि एक विशेष धर्म के नारे लगाए जाने के विरोध से उपजा था। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस पूरे मामले से भारतीय जनता पार्टी (BJP) अथवा उसके किसी कार्यकर्ता का कोई संबंध नहीं है।

कांग्रेस के शासनकाल पर सवाल

अनुसूचित जाति के कल्याण को लेकर राहुल गांधी के सवालों का जवाब देते हुए उनियाल ने कांग्रेस से पूछा कि दशकों तक सत्ता में रहने के बावजूद उसने इस वर्ग के उत्थान के लिए पर्याप्त कार्य क्यों नहीं किए। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं — मुफ्त अनाज वितरण, उज्ज्वला योजना और हर घर नल-हर घर जल — का उल्लेख करते हुए कहा कि इन योजनाओं में जाति या वर्ग के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जाता और सभी नागरिकों को समान रूप से लाभ मिलता है।

राजनीतिक वोट बैंक की बात

उनियाल ने कहा कि लंबे समय तक अनुसूचित जाति और मुस्लिम समुदाय का बड़ा हिस्सा कांग्रेस के साथ रहा, किंतु समय के साथ इन वर्गों ने अपना अलग राजनीतिक नेतृत्व चुना। उन्होंने मायावती और रामविलास पासवान जैसे नेताओं का उदाहरण देते हुए कहा कि विभिन्न सामाजिक वर्गों के कांग्रेस से दूर होने के पीछे ठोस राजनीतिक कारण रहे हैं। उनियाल ने आरोप लगाया कि अब कांग्रेस अपना वोट बैंक पुनः प्राप्त करने के लिए जातीय तनाव को बढ़ावा दे रही है, जिससे समाज और देश दोनों को नुकसान हो सकता है।

उत्तराखंड में सामाजिक सौहार्द का दावा

राज्य में भेदभाव की स्थिति के सवाल पर उनियाल ने कहा कि पहाड़ों और गाँवों में अनुसूचित जाति के लोगों के साथ गहरे सामाजिक और पारिवारिक संबंधों की परंपरा है। उन्होंने दावा किया कि गाँवों में लोग बुज़ुर्ग अनुसूचित जाति के व्यक्तियों को चाचा, दादा या भाई जैसे संबोधनों से पुकारते हैं। राहुल गांधी द्वारा स्कूल, पानी और विवाह जैसे मामलों में भेदभाव के आरोपों पर उनियाल ने कहा कि किसी व्यक्ति के आचरण को पूरे राजनीतिक दल या पूरे समाज से जोड़ना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति भेदभाव करता है तो उसके विरुद्ध उसके व्यक्तिगत आचरण के आधार पर कार्रवाई होनी चाहिए — पूरे उत्तराखंड को भेदभाव वाला प्रदेश बताना तथ्यों से परे है। राज्य सरकार आगे भी अनुसूचित जाति के कल्याण के लिए नई योजनाएँ लाने पर विचार कर रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह दोनों दलों के लिए संवेदनशील प्रश्न है। उनियाल ने सरकारी योजनाओं को जातिनिरपेक्ष बताया, लेकिन अनुसूचित जाति के लिए विशेष बजट आवंटन और योजनाओं के ज़मीनी क्रियान्वयन का स्वतंत्र सत्यापन इस दावे को परखने की कसौटी होगी। जाति-आधारित आरोप-प्रत्यारोप का यह दौर 2027 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव की पृष्ठभूमि में और अधिक राजनीतिक महत्व रखता है।
RashtraPress
29 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुबोध उनियाल ने राहुल गांधी के किस आरोप पर पलटवार किया?
उत्तराखंड कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के उन आरोपों को खारिज किया जिनमें उत्तराखंड में अनुसूचित जाति के साथ स्कूल, पानी और विवाह जैसे मामलों में भेदभाव की बात कही गई थी। उनियाल ने इसे राजनीतिक लाभ के लिए जातीय तनाव भड़काने की कोशिश बताया।
हल्द्वानी रामलीला मैदान विवाद क्या था और BJP का क्या कहना है?
हल्द्वानी के रामलीला मैदान में हुए विवाद को लेकर उनियाल ने कहा कि यह जाति आधारित नहीं था, बल्कि एक विशेष धर्म के नारे लगाए जाने के विरोध से जुड़ा था। उन्होंने दावा किया कि BJP या उसके कार्यकर्ताओं का इस मामले से कोई संबंध नहीं है।
उनियाल ने कांग्रेस के वोट बैंक पर क्या कहा?
उनियाल ने कहा कि अनुसूचित जाति और मुस्लिम समुदाय का बड़ा हिस्सा पहले ही कांग्रेस से दूर हो चुका है और मायावती व रामविलास पासवान जैसे नेताओं के उभरने से यह स्पष्ट होता है। उनके अनुसार कांग्रेस अब जातीय तनाव के ज़रिये यह वोट बैंक पुनः प्राप्त करने की कोशिश कर रही है।
उत्तराखंड सरकार अनुसूचित जाति के कल्याण के लिए क्या कर रही है?
उनियाल ने उज्ज्वला योजना, मुफ्त अनाज वितरण और हर घर नल-हर घर जल जैसी केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं का उल्लेख किया, जिनका लाभ उनके अनुसार बिना जाति भेद के सभी नागरिकों को मिलता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आगे भी नई कल्याण योजनाएँ लाने पर विचार कर रही है।
क्या उत्तराखंड में अनुसूचित जाति के साथ सामाजिक भेदभाव की स्थिति है?
उनियाल ने दावा किया कि उत्तराखंड के पहाड़ी और ग्रामीण क्षेत्रों में अनुसूचित जाति के लोगों के साथ सामाजिक और पारिवारिक संबंधों की मज़बूत परंपरा है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति के व्यक्तिगत आचरण को पूरे राज्य या समाज से जोड़कर उत्तराखंड को भेदभाव वाला प्रदेश बताना उचित नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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