बदरीनाथ चढ़ावा चोरी: गणेश गोदियाल का CM धामी पर हमला, मंदिर समिति अध्यक्ष की नियुक्ति पर उठाए सवाल
सारांश
मुख्य बातें
उत्तराखंड के बदरीनाथ मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले में दूसरी गिरफ्तारी के बाद राजनीतिक पारा चढ़ गया है। उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने 20 जुलाई को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर सीधा निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि राज्य सरकार मंदिर समिति के वरिष्ठ पदाधिकारियों को बचाने में लगी है, जबकि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था दाँव पर है। गोदियाल ने माँग की कि मुख्यमंत्री सार्वजनिक रूप से सामने आकर पूरे मामले पर अपनी स्थिति स्पष्ट करें।
दूसरे आरोपी के बयान से मामला गहराया
गोदियाल के अनुसार, चोरी मामले में गिरफ्तार दूसरे आरोपी ने पूछताछ के दौरान कथित तौर पर स्वीकार किया कि उसे यह कृत्य करने के निर्देश वरिष्ठ स्तर से मिले थे। आरोपी ने पूछताछ में प्रमोद नौटियाल का नाम लिया और कहा कि उन्हीं के माध्यम से उसे निर्देश दिए गए थे।
गोदियाल ने तर्क दिया कि मंदिर समिति में अध्यक्ष के अलावा वरिष्ठ स्तर पर कोई अन्य स्वतंत्र निर्णय लेने वाला नहीं होता, इसलिए इस मामले में जिम्मेदारी तय होना स्वाभाविक है। उन्होंने यह भी कहा कि इस पूरे विवाद पर मीडिया और जनता में चर्चा जारी है, लेकिन सरकार की चुप्पी कई गंभीर सवाल खड़े करती है।
मंदिर समिति अध्यक्ष की नियुक्ति पर सवाल
कांग्रेस अध्यक्ष ने मंदिर समिति के अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर धामी सरकार पर तीखा प्रहार किया। उनका आरोप है कि जिस व्यक्ति को पहले तराई बीज विकास निगम में भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते बर्खास्त किया जा चुका हो, उसे इतने प्रतिष्ठित धार्मिक संस्थान का अध्यक्ष नियुक्त करना गंभीर चूक है।
गोदियाल ने कहा कि बदरीनाथ मंदिर समिति की स्थापना आदि शंकराचार्य ने की थी और इस पद पर नियुक्ति से पहले व्यक्ति के संपूर्ण अतीत और कार्यशैली की गहन जाँच अनिवार्य थी। उनके अनुसार, मुख्यमंत्री ने यह आवश्यक जाँच-पड़ताल किए बिना केवल 'कृपा' दिखाई, जिसके कारण अब यह स्थिति उत्पन्न हुई है।
सरकार पर मिलीभगत का आरोप
गोदियाल ने आरोप लगाया कि तथ्य सामने आने के बावजूद मुख्यमंत्री की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि स्थिति ऐसी बन गई है जैसे 'तुम मेरी पोल मत खोलो, मैं तुम्हारी पोल नहीं खोलूंगा' — यानी पारस्परिक संरक्षण की राजनीति चल रही है।
उन्होंने यह भी बताया कि इस पूरे विवाद की जड़ें तब जुड़ीं जब उन्होंने सहकारिता क्षेत्र के कथित घोटालों को सार्वजनिक रूप से उठाया, जिसके बाद उन पर जाँच का दबाव बनाया गया। गोदियाल ने कहा कि उन्हें अपनी जाँच से कोई आपत्ति नहीं, लेकिन सवाल यह है कि उनकी जाँच का भय दिखाकर अन्य दोषियों पर कार्रवाई क्यों रोकी जा रही है।
श्रद्धालुओं की आस्था और आगे की राह
बदरीनाथ धाम करोड़ों हिंदू श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है और चढ़ावे में चोरी जैसी घटना लोगों के विश्वास को गहरा आघात पहुँचाती है। गोदियाल ने माँग की कि यदि कांग्रेस के आरोप गलत हैं, तो सरकार तथ्यों के साथ सार्वजनिक जवाब दे।
दूसरी गिरफ्तारी के बाद जाँच का दायरा बढ़ गया है और अब सभी की नज़रें जाँच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। राजनीतिक दबाव बढ़ने के साथ यह देखना होगा कि धामी सरकार इन आरोपों का किस रूप में जवाब देती है।