राम मंदिर चढ़ावा चोरी: कांग्रेस का मोदी पर हमला — '40 दिनों में 70 चोरियाँ, जवाबदेही से बचना नामुमकिन'
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने शुक्रवार, 10 जुलाई को चंडीगढ़ में मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण में जवाबदेही से नहीं बच सकते, क्योंकि उन्होंने शंकराचार्यों सहित सभी को दरकिनार कर मंदिर निर्माण का पूरा श्रेय स्वयं लिया था। उनके साथ पंजाब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और अन्य वरिष्ठ नेता उपस्थित थे।
आस्था पर हमला: कांग्रेस का आरोप
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) की सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म प्रमुख श्रीनेत ने कहा कि यह प्रकरण महज चोरी या डकैती नहीं है, बल्कि उन करोड़ों हिंदुओं की आस्था और विश्वास पर 'क्रूर हमला' है जिन्होंने अपनी मेहनत की कमाई मंदिर के लिए दान की थी। उन्होंने दावा किया कि 40 दिनों के भीतर 70 चोरियाँ हुई हैं और ऐसी घटना इतिहास में पहले कभी नहीं हुई।
श्रीनेत ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर 'घोर पाप' करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जब पीएम ने स्वयं हर उपलब्धि का श्रेय लिया, तो अब वे इस विफलता पर चुप नहीं रह सकते।
एसआईटी प्रमुख की नियुक्ति पर सवाल
कांग्रेस नेता ने विशेष जाँच दल (SIT) के प्रमुख विजय विश्वास पंत की नियुक्ति पर सवाल उठाया। उनका आरोप था कि पंत पर स्वयं धोखाधड़ी की प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज है। श्रीनेत ने व्यंग्यात्मक लहजे में पूछा कि इतने बड़े मामले की जाँच के लिए क्या इनसे बेहतर कोई और उपलब्ध नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि SIT की रिपोर्ट अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है।
ट्रस्ट पदाधिकारियों पर निशाना
श्रीनेत ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय बंसल और उनके सहयोगी अनिल मिश्रा को जाँच के दायरे से बाहर रखे जाने पर सवाल उठाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल इस्तीफा देना कोई समाधान नहीं है।
उन्होंने यह भी पूछा कि जब अयोध्या के राम मंदिर में उत्तर प्रदेश पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बल पहले से तैनात थे, तो एक पूर्व BJP सांसद की निजी सुरक्षा एजेंसी को ₹1 करोड़ प्रति माह पर नियुक्त करने की क्या आवश्यकता थी।
कोषाध्यक्ष की भूमिका पर प्रश्नचिह्न
ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद गिरि की कार्यशैली पर भी कांग्रेस ने निशाना साधा। श्रीनेत ने बताया कि गोविंद गिरि ने स्वयं दावा किया था कि वे अयोध्या में नहीं रहते और खातों की समीक्षा के लिए महीने में मात्र पाँच दिन किसी और को नियुक्त करते हैं। उन्होंने पूछा कि क्या यही करोड़ों हिंदुओं की आस्था के प्रति जिम्मेदारी की भावना है।
आगे क्या होगा
कांग्रेस ने SIT रिपोर्ट को तत्काल सार्वजनिक करने, ट्रस्ट के सभी पदाधिकारियों से पूछताछ और स्वतंत्र जाँच की माँग की है। यह प्रकरण आने वाले दिनों में संसद और राज्य विधानसभाओं में भी गूँजने की संभावना है, क्योंकि विपक्ष इसे धार्मिक आस्था से जुड़े भ्रष्टाचार के रूप में प्रस्तुत कर रहा है।