29 अगस्त 2026
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तमिल थाई वाजथु पहले गाने पर BJP नेता नारायणन तिरुपति बोले — 'कोई विवाद नहीं होना चाहिए'

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तमिल थाई वाजथु पहले गाने पर BJP नेता नारायणन तिरुपति बोले — 'कोई विवाद नहीं होना चाहिए'

सारांश

BJP नेता नारायणन तिरुपति ने साफ कहा — 'तमिल थाई वाजथु' को पहले गाने में कोई आपत्ति नहीं। साथ ही उन्होंने विधानसभा स्पीकर जेसीडी प्रभाकर पर पद का उपयोग धर्म-प्रचार के लिए करने का आरोप लगाया और मुख्यमंत्री विजय से हस्तक्षेप की माँग की।

मुख्य बातें

BJP नेता नारायणन तिरुपति ने 29 अगस्त को कहा कि 'तमिल थाई वाजथु' को राष्ट्रगान से पहले गाने में कोई आपत्ति नहीं।
उनके अनुसार राज्य गीत, राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान — तीनों समान रूप से महत्वपूर्ण हैं और गाने का क्रम विवाद का विषय नहीं होना चाहिए।
विवाद की जड़ में स्पीकर जेसीडी प्रभाकर का 8-9 अगस्त को चेन्नई में '5वें नेशनल मार्च फॉर लाइफ' में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लेना है।
तिरुपति ने स्पीकर पर आरोप लगाया कि वे अपने संवैधानिक पद का उपयोग ईसाई धर्म को बढ़ावा देने के लिए कर रहे हैं।
जोसेफ विजय से अपील की गई कि वे स्पीकर को ऐसे कार्यों से रोकें जो सरकार की छवि को नुकसान पहुँचाएँ।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता नारायणन तिरुपति ने शनिवार, 29 अगस्त को स्पष्ट किया कि तमिलनाडु के राज्य गीत 'तमिल थाई वाजथु' को राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत से पहले गाने में कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने कहा कि गाने का क्रम नहीं, बल्कि भावना मायने रखती है — और तमिलनाडु भारत का अभिन्न अंग है।

मुख्य बयान

तिरुपति ने कहा, 'तमिल थाई वाजथु, हमारा राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रगान — ये तीनों समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। इनमें से किसे पहले, दूसरे या तीसरे नंबर पर गाया जाए, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। ये सभी हमारी जीवनरेखा हैं।' उन्होंने आगे कहा, 'अगर लोग तमिलनाडु राज्य गीत को पहले गाना चाहते हैं, तो इसमें कोई समस्या नहीं है — इसे कोई विवाद का विषय नहीं बनाना चाहिए।'

विवाद की पृष्ठभूमि

यह बयान उस विवाद के बीच आया है जो तमिलनाडु विधानसभा के स्पीकर जेसीडी प्रभाकर के एक कार्यक्रम में भाग लेने के बाद उठा। प्रभाकर ने 8 और 9 अगस्त को चेन्नई में आयोजित गर्भपात-विरोधी रैली '5वें नेशनल मार्च फॉर लाइफ' में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की थी। गौरतलब है कि यह रैली एक विशेष धार्मिक दृष्टिकोण से संचालित मानी जाती है, जिसके बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ सामने आईं।

स्पीकर पर आरोप

तिरुपति ने स्पीकर प्रभाकर पर सीधा निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अपने संवैधानिक पद का उपयोग एक विशेष धर्म को बढ़ावा देने के लिए कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'जेसीडी प्रभाकर शुरू से ही ईसाई धर्म के समर्थक रहे हैं और उसे बढ़ावा देने की कोशिश करते रहे हैं। किसी की अपनी आस्था में कोई आपत्ति नहीं, लेकिन लोकतंत्र में संवैधानिक पद का उपयोग किसी एक धर्म को प्रोत्साहित करने के लिए नहीं होना चाहिए।'

मुख्यमंत्री को सलाह

BJP नेता ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय से अपील की कि वे स्पीकर को ऐसे कार्यों से रोकें जो टीवीके (तमिझागा वेट्री कषगम) नेतृत्व वाली सरकार की छवि को नुकसान पहुँचा सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी ने हिंदू धर्म के संदर्भ में इसी प्रकार का आचरण किया होता, तो उसे तुरंत 'सांप्रदायिक' करार दिया जाता — यह दोहरा मानदंड स्वीकार्य नहीं है।

आगे की स्थिति

तमिलनाडु में राज्य गीत बनाम राष्ट्रगान के क्रम को लेकर यह पहली बार नहीं है कि राजनीतिक बहस छिड़ी हो। यह विवाद राज्य की पहचान और राष्ट्रीय एकता के बीच संतुलन की उस व्यापक बहस का हिस्सा है जो दक्षिण भारत में समय-समय पर उभरती रहती है। अब देखना यह होगा कि स्पीकर प्रभाकर और सत्तारूढ़ दल इस पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो 'छद्म धर्मनिरपेक्षता' की भाषा में लिपटा है। यह दोहरी चाल — एक तरफ सुलह, दूसरी तरफ आरोप — बताती है कि तमिलनाडु में BJP अभी भी अपनी पहचान तय करने की कोशिश में है। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक जाती है वह यह है कि राज्य गीत बनाम राष्ट्रगान की यह बहस दरअसल संघवाद और सांस्कृतिक स्वायत्तता की उस गहरी बेचैनी की अभिव्यक्ति है जो दक्षिण भारत में लंबे समय से सुलग रही है।
RashtraPress
29 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तमिल थाई वाजथु और राष्ट्रगान के क्रम को लेकर विवाद क्या है?
यह बहस इस बात पर है कि सरकारी कार्यक्रमों में तमिलनाडु का राज्य गीत 'तमिल थाई वाजथु' राष्ट्रगान से पहले गाया जाए या बाद में। BJP नेता नारायणन तिरुपति ने 29 अगस्त को कहा कि क्रम से कोई फर्क नहीं पड़ता और इसे विवाद का विषय नहीं बनाना चाहिए।
BJP नेता नारायणन तिरुपति ने क्या कहा?
तिरुपति ने कहा कि 'तमिल थाई वाजथु', राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रगान — तीनों समान रूप से महत्वपूर्ण हैं और इनमें से किसे पहले गाया जाए, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु भारत का अभिन्न अंग है इसलिए इस पर कोई विवाद नहीं होना चाहिए।
स्पीकर जेसीडी प्रभाकर पर क्या आरोप लगाए गए हैं?
BJP नेता तिरुपति ने आरोप लगाया कि स्पीकर जेसीडी प्रभाकर अपने संवैधानिक पद का उपयोग ईसाई धर्म को बढ़ावा देने के लिए कर रहे हैं। यह विवाद तब उठा जब प्रभाकर ने 8-9 अगस्त को चेन्नई में '5वें नेशनल मार्च फॉर लाइफ' रैली में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया।
मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय से BJP ने क्या माँग की?
BJP नेता ने मुख्यमंत्री विजय से अपील की कि वे स्पीकर प्रभाकर को ऐसे कार्यों से रोकें जो टीवीके नेतृत्व वाली सरकार की साख को नुकसान पहुँचा सकते हैं। तिरुपति ने कहा कि ऐसी हरकतें सरकार के लिए ही राजनीतिक रूप से हानिकारक हैं।
तमिलनाडु में राज्य गीत बनाम राष्ट्रगान की बहस पहले भी उठी है?
हाँ, तमिलनाडु में क्षेत्रीय पहचान और राष्ट्रीय प्रतीकों के क्रम को लेकर समय-समय पर बहस होती रही है। यह विवाद दक्षिण भारत में संघवाद और सांस्कृतिक स्वायत्तता की व्यापक बहस का हिस्सा है।
राष्ट्र प्रेस
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