10 अगस्त 2026
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तमिलनाडु विधानसभा में 'तमिल थाई वाज्तु' प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास, सीएम विजय ने सभी दलों का आभार जताया

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तमिलनाडु विधानसभा में 'तमिल थाई वाज्तु' प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास, सीएम विजय ने सभी दलों का आभार जताया

सारांश

तमिलनाडु विधानसभा ने 10 अगस्त को सर्वसम्मति से तय किया कि 'तमिल थाई वाज्तु' सभी सरकारी कार्यक्रमों में सबसे पहले गाया जाएगा। सीएम विजय ने इसे तमिल भाषा, संस्कृति और सभ्यता का ऐतिहासिक सम्मान बताया — और यह एकजुटता राजनीतिक मतभेदों से परे रही।

मुख्य बातें

तमिलनाडु विधानसभा ने 10 अगस्त 2026 को 'तमिल थाई वाज्तु' को सरकारी कार्यक्रमों में प्रथम स्थान देने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया।
जोसेफ विजय ने प्रस्ताव पेश किया और सभी दलों का आभार जताया।
यह नियम सरकारी विभागों, शिक्षण संस्थानों, विश्वविद्यालयों और सार्वजनिक उपक्रमों पर लागू होगा।
'तमिल थाई वाज्तु' को 1970 के सरकारी आदेश से मान्यता मिली थी और 2021 में इसे आधिकारिक राज्य गीत घोषित किया गया।
विजय ने इसे तमिल भाषा, संस्कृति और सभ्यता के सम्मान की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया।

तमिलनाडु विधानसभा ने 10 अगस्त 2026 को एक ऐतिहासिक प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया, जिसके तहत राज्य के सभी सरकारी विभागों, शिक्षण संस्थानों, विश्वविद्यालयों, सार्वजनिक उपक्रमों और सरकार से संबद्ध संगठनों के कार्यक्रमों में 'तमिल थाई वाज्तु' को सर्वप्रथम गाना अनिवार्य किया गया है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय द्वारा पेश किए गए इस प्रस्ताव को सदन के सभी दलों का समर्थन मिला, जिसे विजय ने तमिल भाषा और सांस्कृतिक पहचान के लिए एक ऐतिहासिक सम्मान बताया।

प्रस्ताव में क्या है

इस प्रस्ताव के अनुसार, तमिलनाडु के सरकारी कार्यक्रमों में किसी भी अन्य देशभक्ति गीत से पहले 'तमिल थाई वाज्तु' का गायन अनिवार्य होगा। यह नियम सरकारी विभागों, स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और राज्य के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों — सभी पर समान रूप से लागू होगा। गौरतलब है कि यह प्रस्ताव उस चल रही राजनीतिक बहस के संदर्भ में महत्वपूर्ण है, जिसमें यह तय करना था कि सरकारी आयोजनों में विभिन्न देशभक्ति गीतों को किस क्रम में गाया जाए।

तमिल थाई वाज्तु की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

'तमिल थाई वाज्तु' मूलतः कवि मनोनमनीयम सुंदरनार की रचना 'मनोनमनीयम' से लिया गया गीत है। यह परंपरागत रूप से तमिलनाडु में सरकारी कार्यक्रमों का हिस्सा रहा है और 1970 में जारी एक सरकारी आदेश से इसे आधिकारिक मान्यता मिली थी। बाद में 2021 में इसे औपचारिक रूप से राज्य गीत के रूप में अधिसूचित किया गया। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में भाषाई और सांस्कृतिक पहचान को लेकर विमर्श तेज हो रहा है।

सीएम विजय की प्रतिक्रिया

प्रस्ताव पारित होने के बाद मुख्यमंत्री विजय ने अपने आधिकारिक एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर सभी दलों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने लिखा, "यह पूरी तरह से मानते हुए कि तमिल सिर्फ एक भाषा नहीं, बल्कि एक सोच, संस्कृति और सभ्यता है, और तमिल हमारी जिंदगी और चेतना है, तमिलनाडु सरकार ने यह ऐतिहासिक प्रस्ताव अपनाया है।" उन्होंने यह भी कहा कि 10 अगस्त का यह दिन तमिलनाडु के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज रहेगा।

विजय ने अपने पोस्ट में आगे लिखा, "मैं इस प्रस्ताव का सर्वसम्मति से समर्थन करने और इसे पास करने के लिए सभी पार्टियों का दिल से शुक्रिया अदा करता हूं। तमिल थाई की महिमा पूरी दुनिया में बढ़े। तमिलनाडु की जीत का सफर जारी रहे।"

राजनीतिक एकजुटता का संदेश

मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि इस प्रस्ताव पर मिले सर्वसम्मत समर्थन ने यह सिद्ध किया कि जब तमिलनाडु की भाषाई और सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा का प्रश्न उठता है, तो राजनीतिक मतभेद गौण हो जाते हैं। उन्होंने इस प्रस्ताव को तमिल भाषा की प्राचीनता, विशिष्टता, गौरव और सांस्कृतिक चेतना को सुरक्षित रखने की सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया।

आगे क्या होगा

विधानसभा में प्रस्ताव पारित होने के बाद अब इसे सरकारी आदेश के रूप में लागू किए जाने की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है। राज्य के सभी संबंधित विभागों को इस निर्देश का पालन सुनिश्चित करना होगा। यह कदम तमिलनाडु में भाषाई स्वाभिमान की राजनीति को नई दिशा दे सकता है और अन्य राज्यों में भी इसी तरह की पहलों को प्रेरित कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तमिलनाडु का यह सर्वसम्मत कदम राज्य की सांस्कृतिक स्वायत्तता की सामूहिक पुनर्पुष्टि है। उल्लेखनीय यह है कि विपक्षी दलों ने भी बिना किसी आपत्ति के समर्थन दिया — जो दर्शाता है कि तमिल अस्मिता की राजनीति पार्टी लाइनों से ऊपर है। असली प्रश्न यह है कि क्या यह प्रस्ताव केवल प्रतीकात्मक रहेगा या इसके क्रियान्वयन की निगरानी के लिए कोई ठोस तंत्र भी बनेगा।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'तमिल थाई वाज्तु' प्रस्ताव क्या है और इसे क्यों पास किया गया?
यह तमिलनाडु विधानसभा द्वारा 10 अगस्त 2026 को सर्वसम्मति से पारित वह प्रस्ताव है जो सरकारी विभागों, शिक्षण संस्थानों और सार्वजनिक उपक्रमों के कार्यक्रमों में 'तमिल थाई वाज्तु' को सर्वप्रथम गाना अनिवार्य बनाता है। यह उस बहस के बीच आया है जिसमें सरकारी आयोजनों में देशभक्ति गीतों के क्रम को लेकर विवाद चल रहा था।
'तमिल थाई वाज्तु' का इतिहास क्या है?
'तमिल थाई वाज्तु' कवि मनोनमनीयम सुंदरनार की कृति 'मनोनमनीयम' से लिया गया गीत है। इसे 1970 के सरकारी आदेश द्वारा सरकारी कार्यक्रमों में शामिल किया गया और 2021 में इसे आधिकारिक तमिलनाडु राज्य गीत के रूप में मान्यता दी गई।
सीएम विजय ने इस प्रस्ताव पर क्या कहा?
मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने कहा कि तमिल सिर्फ एक भाषा नहीं, बल्कि एक सोच, संस्कृति और सभ्यता है। उन्होंने इस प्रस्ताव को तमिल पहचान के लिए ऐतिहासिक सम्मान बताया और सभी दलों का हृदय से आभार जताया।
यह प्रस्ताव किन संस्थाओं पर लागू होगा?
यह प्रस्ताव तमिलनाडु के सभी सरकारी विभागों, स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और राज्य से संबद्ध अन्य संगठनों पर लागू होगा। इन सभी के आयोजनों में 'तमिल थाई वाज्तु' को किसी भी अन्य गीत से पहले गाना होगा।
क्या सभी राजनीतिक दलों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया?
हाँ, तमिलनाडु विधानसभा में यह प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हुआ, अर्थात सभी दलों के सदस्यों ने इसका समर्थन किया। सीएम विजय ने इसे भाषाई और सांस्कृतिक पहचान के प्रश्न पर राजनीतिक एकता का प्रमाण बताया।
राष्ट्र प्रेस
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