मद्रास हाईकोर्ट ने 'वंदे मातरम' सर्कुलर को चुनौती देने की दी अनुमति, नई याचिका दाखिल होगी
सारांश
मुख्य बातें
मद्रास हाईकोर्ट ने 7 जून 2025 को याचिकाकर्ता को केंद्रीय गृह मंत्रालय के उस सर्कुलर को सीधे चुनौती देते हुए नई याचिका दाखिल करने की अनुमति प्रदान कर दी, जिसमें सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत 'वंदे मातरम' के गायन से करने का निर्देश दिया गया था। अदालत ने स्पष्ट किया कि सर्कुलर की वैधता को चुनौती दिए बिना इस विषय पर कोई विशेष निर्देश देना न्यायोचित नहीं होगा।
मामले की पृष्ठभूमि
यह विवाद चेन्नई निवासी अनन्या राधाकृष्णन द्वारा दायर याचिका से उपजा है। याचिका में तमिलनाडु में सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत परंपरागत रूप से 'तमिल थाई वाज़्तु' से किए जाने की व्यवस्था को पुनः स्थापित करने की मांग की गई थी। यह याचिका 10 मई को तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री विजय और उनकी मंत्रिपरिषद के शपथ ग्रहण समारोह के बाद दाखिल की गई थी।
याचिका में उल्लेख किया गया कि उक्त शपथ ग्रहण समारोह की शुरुआत 'वंदे मातरम' और राष्ट्रगान से हुई, जबकि 'तमिल थाई वाज़्तु' का गायन बाद में किया गया — जो राज्य की स्थापित परंपरा के विपरीत था।
याचिकाकर्ता का तर्क
याचिकाकर्ता का कहना था कि तमिलनाडु में दशकों से सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत 'तमिल थाई वाज़्तु' से होती रही है और समापन राष्ट्रगान के साथ किया जाता है। उनके अनुसार इस परंपरा में बदलाव से राज्य की सांस्कृतिक पहचान और भावनाओं पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
याचिका में यह भी रेखांकित किया गया कि 'तमिल थाई वाज़्तु', जिसे तमिल विद्वान मनोन्मनीयम सुंदरनार ने 1891 में रचा था, तमिल समाज की सांस्कृतिक विरासत और पहचान का प्रतीक है। याचिकाकर्ता ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध 'वंदे मातरम' या राष्ट्रगान से नहीं, बल्कि केवल राज्य की परंपरागत व्यवस्था को बहाल रखने की माँग से है।
अदालत की टिप्पणी
मुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और जस्टिस जी. अरुल मुरुगन की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि गृह मंत्रालय का यह सर्कुलर केवल तमिलनाडु तक सीमित नहीं है — यह पूरे देश के राज्यों पर लागू होता है। इसलिए सर्कुलर की वैधता को चुनौती दिए बिना अदालत से राहत माँगना उचित प्रक्रिया नहीं है।
अदालत का निर्णय
खंडपीठ की इस स्पष्ट टिप्पणी के बाद याचिकाकर्ता के वकील ने मौजूदा याचिका वापस लेने और केंद्र सरकार के सर्कुलर को सीधे चुनौती देते हुए नई याचिका दाखिल करने की अनुमति माँगी। अदालत ने यह अनुरोध स्वीकार करते हुए याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी और नई कानूनी कार्यवाही शुरू करने की छूट प्रदान की।
यह मामला केंद्र-राज्य सांस्कृतिक संबंधों और भाषाई पहचान के व्यापक प्रश्न को अदालत के समक्ष ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आने वाले हफ्तों में नई याचिका दाखिल होने के बाद इस विषय पर विधिक बहस और तेज़ होने की संभावना है।