तमिलनाडु विधानसभा सत्र 18 जून से: राज्यपाल अर्लेकर के अभिभाषण पर टिकी नजरें, थामिझथाई विवाद की आँच बरकरार
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु विधानसभा का नया सत्र 18 जून 2025 से शुरू होने जा रहा है, जिसमें राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर परंपरा के अनुसार सदन को संबोधित करेंगे। सत्र शुरू होने से पहले ही राजनीतिक हलकों में यह बहस तेज हो गई है कि क्या वंदे मातरम्, राष्ट्रगान और तमिल राज्यगीत 'थामिझथाई वाझ्थु' के प्रस्तुति-क्रम को लेकर राजभवन और मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की टीवीके सरकार के बीच एक बार फिर टकराव होगा।
विवाद की पृष्ठभूमि
जो प्रक्रिया कभी एक सामान्य संवैधानिक औपचारिकता मानी जाती थी, वह हाल के वर्षों में तमिलनाडु में गहरे राजनीतिक रंग ले चुकी है। पूर्व राज्यपाल आर.एन. रवि के कार्यकाल में विधानसभा सत्रों के दौरान राष्ट्रीय प्रतीकों और सांस्कृतिक परंपराओं को लेकर कई बार सार्वजनिक विवाद हुए थे। अब यही विवाद नए राज्यपाल के कार्यकाल में भी जारी है।
10 मई को मुख्यमंत्री विजय और उनके मंत्रिमंडल के शपथ ग्रहण समारोह में वंदे मातरम् और राष्ट्रगान के बाद थामिझथाई वाझ्थु प्रस्तुत किया गया। बाद में हुए मंत्रिमंडल विस्तार में भी यही क्रम अपनाया गया, जिससे विपक्ष में तीखी प्रतिक्रिया हुई।
विपक्ष की आपत्तियाँ
विपक्षी दलों — विशेष रूप से द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) और उसके कुछ सहयोगी दलों — ने इस व्यवस्था की आलोचना की है। उनका कहना है कि थामिझथाई वाझ्थु को सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत में पहले की तरह प्रमुख स्थान मिलना चाहिए। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार तमिल सांस्कृतिक पहचान को कमज़ोर कर रही है।
केरल की घटना और अर्लेकर की आपत्ति
पड़ोसी राज्य केरल में मई में हुई एक घटना ने इस विवाद को और हवा दी है। केरल विधानसभा के उद्घाटन सत्र के दौरान राज्यपाल के अभिभाषण से पहले और बाद में केवल वंदे मातरम् का संक्षिप्त संस्करण बजाया गया था। रिपोर्टों के अनुसार, इस पर तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर ने आपत्ति जताई थी।
केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने स्पष्ट किया था कि कोई कानून वंदे मातरम् का पूरा संस्करण बजाना अनिवार्य नहीं करता और राज्य दीर्घकालीन परंपरा का पालन कर रहा है।
सरकार का रुख और कानूनी विकल्प
तमिलनाडु सरकार के मंत्री आधव अर्जुन ने बताया है कि राज्य सरकार ने यह मुद्दा राज्यपाल के समक्ष उठाया है और जनवरी में जारी केंद्रीय गृह मंत्रालय के एक परिपत्र के संदर्भ में कानूनी विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। सरकार का तर्क है कि उस परिपत्र में कहीं भी यह नहीं कहा गया कि थामिझथाई वाझ्थु जैसे राज्य गीतों को सरकारी कार्यक्रमों में पहले प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।
यह मुद्दा मुख्यमंत्री विजय ने 27 मई को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के दौरान भी उठाया था। बताया जाता है कि उन्होंने केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों में स्पष्टीकरण या संशोधन की माँग की, ताकि राज्य गीतों को सरकारी कार्यक्रमों में उनका पारंपरिक स्थान मिलता रहे।
18 जून की कार्यवाही का महत्व
इन सभी घटनाक्रमों के बीच 18 जून का विधानसभा सत्र राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सभी की निगाहें केवल सरकार के विधायी एजेंडे पर नहीं, बल्कि इस बात पर भी होंगी कि प्रोटोकॉल विवाद का कोई हल निकला है या राजभवन और राज्य सरकार के बीच नया टकराव सामने आएगा। यह सत्र तय करेगा कि तमिलनाडु में राजनीतिक-सांस्कृतिक पहचान की यह बहस किस दिशा में जाती है।