23 जुलाई 2026
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तमिलनाडु विधानसभा सत्र 18 जून से: राज्यपाल अर्लेकर के अभिभाषण पर टिकी नजरें, थामिझथाई विवाद की आँच बरकरार

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तमिलनाडु विधानसभा सत्र 18 जून से: राज्यपाल अर्लेकर के अभिभाषण पर टिकी नजरें, थामिझथाई विवाद की आँच बरकरार

सारांश

तमिलनाडु विधानसभा का सत्र 18 जून से शुरू होगा, लेकिन असली सवाल यह है कि राज्यपाल अर्लेकर का अभिभाषण बिना विवाद के होगा या थामिझथाई वाझ्थु और वंदे मातरम् के क्रम पर राजभवन व टीवीके सरकार के बीच एक और टकराव देखने को मिलेगा।

मुख्य बातें

तमिलनाडु विधानसभा का सत्र 18 जून 2025 से शुरू होगा; राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर सदन को संबोधित करेंगे।
10 मई के शपथ ग्रहण समारोह में वंदे मातरम् और राष्ट्रगान के बाद थामिझथाई वाझ्थु बजाया गया, जिससे विपक्ष में नाराज़गी।
DMK और सहयोगी दलों ने माँग की कि तमिल राज्यगीत को सरकारी कार्यक्रमों में पहले स्थान पर रखा जाए।
मंत्री आधव अर्जुन ने बताया कि सरकार केंद्रीय गृह मंत्रालय के जनवरी परिपत्र पर कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है।
मुख्यमंत्री विजय ने 27 मई को PM मोदी से मिलकर केंद्रीय दिशा-निर्देशों में स्पष्टीकरण की माँग की।
केरल में भी इसी तरह का विवाद सामने आया, जहाँ राज्यपाल अर्लेकर ने वंदे मातरम् के संक्षिप्त संस्करण पर आपत्ति जताई थी।

तमिलनाडु विधानसभा का नया सत्र 18 जून 2025 से शुरू होने जा रहा है, जिसमें राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर परंपरा के अनुसार सदन को संबोधित करेंगे। सत्र शुरू होने से पहले ही राजनीतिक हलकों में यह बहस तेज हो गई है कि क्या वंदे मातरम्, राष्ट्रगान और तमिल राज्यगीत 'थामिझथाई वाझ्थु' के प्रस्तुति-क्रम को लेकर राजभवन और मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की टीवीके सरकार के बीच एक बार फिर टकराव होगा।

विवाद की पृष्ठभूमि

जो प्रक्रिया कभी एक सामान्य संवैधानिक औपचारिकता मानी जाती थी, वह हाल के वर्षों में तमिलनाडु में गहरे राजनीतिक रंग ले चुकी है। पूर्व राज्यपाल आर.एन. रवि के कार्यकाल में विधानसभा सत्रों के दौरान राष्ट्रीय प्रतीकों और सांस्कृतिक परंपराओं को लेकर कई बार सार्वजनिक विवाद हुए थे। अब यही विवाद नए राज्यपाल के कार्यकाल में भी जारी है।

10 मई को मुख्यमंत्री विजय और उनके मंत्रिमंडल के शपथ ग्रहण समारोह में वंदे मातरम् और राष्ट्रगान के बाद थामिझथाई वाझ्थु प्रस्तुत किया गया। बाद में हुए मंत्रिमंडल विस्तार में भी यही क्रम अपनाया गया, जिससे विपक्ष में तीखी प्रतिक्रिया हुई।

विपक्ष की आपत्तियाँ

विपक्षी दलों — विशेष रूप से द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) और उसके कुछ सहयोगी दलों — ने इस व्यवस्था की आलोचना की है। उनका कहना है कि थामिझथाई वाझ्थु को सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत में पहले की तरह प्रमुख स्थान मिलना चाहिए। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार तमिल सांस्कृतिक पहचान को कमज़ोर कर रही है।

केरल की घटना और अर्लेकर की आपत्ति

पड़ोसी राज्य केरल में मई में हुई एक घटना ने इस विवाद को और हवा दी है। केरल विधानसभा के उद्घाटन सत्र के दौरान राज्यपाल के अभिभाषण से पहले और बाद में केवल वंदे मातरम् का संक्षिप्त संस्करण बजाया गया था। रिपोर्टों के अनुसार, इस पर तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर ने आपत्ति जताई थी।

केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने स्पष्ट किया था कि कोई कानून वंदे मातरम् का पूरा संस्करण बजाना अनिवार्य नहीं करता और राज्य दीर्घकालीन परंपरा का पालन कर रहा है।

सरकार का रुख और कानूनी विकल्प

तमिलनाडु सरकार के मंत्री आधव अर्जुन ने बताया है कि राज्य सरकार ने यह मुद्दा राज्यपाल के समक्ष उठाया है और जनवरी में जारी केंद्रीय गृह मंत्रालय के एक परिपत्र के संदर्भ में कानूनी विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। सरकार का तर्क है कि उस परिपत्र में कहीं भी यह नहीं कहा गया कि थामिझथाई वाझ्थु जैसे राज्य गीतों को सरकारी कार्यक्रमों में पहले प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।

यह मुद्दा मुख्यमंत्री विजय ने 27 मई को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के दौरान भी उठाया था। बताया जाता है कि उन्होंने केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों में स्पष्टीकरण या संशोधन की माँग की, ताकि राज्य गीतों को सरकारी कार्यक्रमों में उनका पारंपरिक स्थान मिलता रहे।

18 जून की कार्यवाही का महत्व

इन सभी घटनाक्रमों के बीच 18 जून का विधानसभा सत्र राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सभी की निगाहें केवल सरकार के विधायी एजेंडे पर नहीं, बल्कि इस बात पर भी होंगी कि प्रोटोकॉल विवाद का कोई हल निकला है या राजभवन और राज्य सरकार के बीच नया टकराव सामने आएगा। यह सत्र तय करेगा कि तमिलनाडु में राजनीतिक-सांस्कृतिक पहचान की यह बहस किस दिशा में जाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन गहराई में यह राज्यपाल-राज्य सरकार संबंधों की उस दरार को उजागर करता है जो दक्षिण भारत के कई राज्यों में बढ़ती जा रही है। गौरतलब है कि आर.एन. रवि के कार्यकाल में भी यही टकराव था — अर्थात् यह किसी एक राज्यपाल की व्यक्तिगत शैली नहीं, बल्कि संरचनात्मक तनाव है। केंद्रीय गृह मंत्रालय का परिपत्र अस्पष्ट है और उसी अस्पष्टता का राजनीतिक दोहन हो रहा है — दोनों तरफ से। जब तक केंद्र स्पष्ट वैधानिक मार्गदर्शन नहीं देता, हर सत्र एक नए टकराव का मंच बनता रहेगा।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तमिलनाडु विधानसभा का अगला सत्र कब शुरू होगा?
तमिलनाडु विधानसभा का सत्र 18 जून 2025 से शुरू होगा। सत्र के पहले दिन राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर परंपरा के अनुसार सदन को संबोधित करेंगे।
थामिझथाई वाझ्थु विवाद क्या है?
यह विवाद सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम्, राष्ट्रगान और तमिल राज्यगीत 'थामिझथाई वाझ्थु' के प्रस्तुति-क्रम को लेकर है। 10 मई के शपथ ग्रहण समारोह में थामिझथाई वाझ्थु को वंदे मातरम् और राष्ट्रगान के बाद बजाया गया, जिस पर विपक्षी दलों ने आपत्ति जताई।
तमिलनाडु सरकार ने इस विवाद पर क्या रुख अपनाया है?
मंत्री आधव अर्जुन के अनुसार, राज्य सरकार ने यह मुद्दा राज्यपाल के समक्ष उठाया है और केंद्रीय गृह मंत्रालय के जनवरी परिपत्र पर कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है। सरकार का कहना है कि परिपत्र में राज्य गीतों को पहले बजाने पर कोई रोक नहीं है।
क्या मुख्यमंत्री विजय ने इस मुद्दे को केंद्र के सामने उठाया?
हाँ, मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने 27 मई को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के दौरान यह मुद्दा उठाया। बताया जाता है कि उन्होंने केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों में स्पष्टीकरण या संशोधन की माँग की।
केरल में भी ऐसा विवाद क्यों हुआ और तमिलनाडु से इसका क्या संबंध है?
मई में केरल विधानसभा के उद्घाटन सत्र में वंदे मातरम् का केवल संक्षिप्त संस्करण बजाया गया, जिस पर राज्यपाल अर्लेकर ने आपत्ति जताई थी। इस घटना ने तमिलनाडु में 18 जून के सत्र को लेकर चर्चा और तेज कर दी है, क्योंकि दोनों राज्यों में एक जैसे प्रोटोकॉल विवाद सामने आए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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