तमिलनाडु विधानसभा का पहला सत्र: राज्यपाल अर्लेकर ने 'वेट्री तमिझगम' विजन से खोला टीवीके सरकार का रोडमैप
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु में नवगठित तमिझगा वेट्री कषगम (टीवीके) सरकार के कार्यकाल की शुरुआत में 18 जून 2026 को चेन्नई में विधानसभा का पहला सत्र आयोजित हुआ। राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने 39 मिनट के अभिभाषण में मुख्यमंत्री विजय के नेतृत्व वाली सरकार की प्राथमिकताओं, सुशासन के एजेंडे और वर्ष 2031 तक राज्य को एक आदर्श राज्य बनाने के दीर्घकालिक विजन को विस्तार से सामने रखा। यह अभिभाषण तमिलनाडु की राजनीति में एक नए अध्याय का औपचारिक आगाज़ माना जा रहा है।
वेट्री तमिझगम: पाँच वर्षीय विकास योजना
राज्यपाल अर्लेकर ने अपने संबोधन के अंत में तिरुक्कुरल की एक पंक्ति उद्धृत करते हुए बताया कि सरकार ने अगले पाँच वर्षों के लिए 'वेट्री तमिझगम' नामक दीर्घकालिक विकास योजना तैयार की है। इस योजना का मूल उद्देश्य वर्ष 2031 तक तमिलनाडु को देश के शेष राज्यों के लिए एक अनुकरणीय मॉडल के रूप में स्थापित करना है। गौरतलब है कि यह योजना सरकार के पहले ही सत्र में घोषित की गई, जो नई सरकार की प्राथमिकताओं का स्पष्ट संकेत देती है।
कल्याण, खेल और मंदिर ऑडिट
राज्यपाल ने आश्वासन दिया कि वरिष्ठ नागरिकों और पेंशनभोगियों को मिलने वाले कल्याणकारी लाभ बिना किसी व्यवधान के जारी रहेंगे। खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं के लिए विश्वस्तरीय प्रशिक्षण सुविधाएँ उपलब्ध कराना भी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
पारदर्शी प्रशासन की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम उठाते हुए राज्यपाल ने घोषणा की कि हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ बंदोबस्ती (HR&CE) विभाग के अधीन सभी मंदिरों का ऑडिट कराया जाएगा और उनके संचालन में जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी। यह कदम राज्य में धार्मिक संस्थाओं के वित्तीय प्रबंधन को लेकर लंबे समय से चल रही बहस के बीच आया है।
जल विवाद और भूजल संरक्षण
अंतरराज्यीय जल विवादों पर सरकार की स्थिति स्पष्ट करते हुए राज्यपाल ने कहा कि तमिलनाडु कर्नाटक की प्रस्तावित मेकेदातु बाँध परियोजना का लगातार विरोध करता रहेगा और कावेरी जल पर निर्भर किसानों के हितों की रक्षा के लिए सभी उपलब्ध कानूनी विकल्प अपनाए जाएँगे। इसके साथ ही, मुल्लापेरियार बाँध विवाद पर भी राज्यपाल ने स्पष्ट किया कि केरल की नए बाँध की माँग के बावजूद तमिलनाडु अपने अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।
भूजल संरक्षण के लिए चेक डैम और वर्षा जल संचयन परियोजनाओं को बढ़ावा देने की भी घोषणा की गई।
कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा
नशीले पदार्थों के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए प्रत्येक जिले में एंटी-नारकोटिक्स इकाइयाँ गठित की गई हैं। अवैध शराब की बिक्री पर सख्त कार्रवाई का भी आश्वासन दिया गया। महिलाओं के विरुद्ध अपराधों पर कठोर रुख अपनाते हुए दोषियों को कड़ी सजा दिलाने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।
राज्यपाल ने दो-भाषा नीति के प्रति सरकार की अटल प्रतिबद्धता दोहराई और केंद्र सरकार से समेकित शिक्षा कार्यक्रमों के लिए आवश्यक वित्तीय सहायता देने की माँग की। भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन को भी सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में गिनाया गया।
ऐतिहासिक राजनीतिक बदलाव
राज्यपाल अर्लेकर ने टीवीके सरकार के गठन को तमिलनाडु की राजनीति में एक ऐतिहासिक परिवर्तन बताया। उन्होंने कहा कि 1967 में सी.एन. अन्नादुरै और 1977 में एम.जी. रामचंद्रन के सत्तारोहण के बाद मुख्यमंत्री विजय के नेतृत्व में टीवीके सरकार का गठन राज्य की राजनीति में तीसरा बड़ा जनादेश-आधारित बदलाव है। उल्लेखनीय है कि पार्टी ने अपने गठन के महज दो वर्षों के भीतर सरकार बनाई और हालिया विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी।
पिछले वर्षों में राज्यपाल के अभिभाषण को लेकर हुए विवादों से अलग, इस बार अर्लेकर ने अपने संबोधन में समाज सुधारक पेरियार ई.वी. रामासामी, डॉ. बी.आर. आंबेडकर, के. कामराज, वेलु नाचियार और अंजलाई अम्माल को सरकार की नीतियों के प्रेरणास्रोत के रूप में उद्धृत किया — जो राजभवन और सरकार के बीच सौहार्दपूर्ण संबंध का संकेत माना जा रहा है। आगे आने वाले सत्रों में इन घोषणाओं को विधायी और बजटीय रूप देना सरकार के सामने सबसे बड़ी परीक्षा होगी।