कोलकाता में डेंगू उन्मूलन अभियान: KMC और मेट्रो रेलवे का संयुक्त अभियान 3 सितंबर तक
सारांश
मुख्य बातें
कोलकाता नगर निगम (KMC) और मेट्रो रेलवे कोलकाता ने 29 अगस्त को शहर में डेंगू उन्मूलन के लिए एक संयुक्त विशेष अभियान की शुरुआत की, जो 3 सितंबर तक चलेगा। यह अभियान एस्प्लेनेड मेट्रो स्टेशन क्षेत्र से प्रारंभ हुआ और शहर के सभी मेट्रो स्टेशनों तथा दक्षिण पूर्वी रेलवे के विभिन्न स्टेशनों तक विस्तारित होगा।
अभियान का दायरा और संचालन
KMC प्रशासक स्मिता पांडे और मेट्रो रेलवे कोलकाता की प्रधान मुख्य चिकित्सा अधिकारी (PCMO) रीना मुखर्जी संयुक्त रूप से इस अभियान का नेतृत्व कर रही हैं। अभियान के तहत मेट्रो स्टेशनों और उनके आसपास के क्षेत्रों के साथ-साथ ट्रेन कार शेड क्षेत्रों में भी सफाई और जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे।
रेलवे आवास क्षेत्रों में उन परित्यक्त ज़मीनों या परिसरों के मालिकों को नोटिस भेजे जा रहे हैं, जहाँ झाड़ियों के कारण पानी जमा हो रहा है या जमा होने की संभावना है। ये नोटिस नगर निगम अधिनियम, 1994 की धारा 496 के तहत जारी किए जाएंगे।
जुर्माने और सख्त कार्रवाई का प्रावधान
अभियान के अंतर्गत प्रतिबंधित प्लास्टिक या गंदगी कहीं भी फेंकने पर ₹200 से ₹400 तक का जुर्माना लगाया जाएगा। कहीं भी थूकने या गंदगी फेंकने पर जुर्माने के साथ-साथ दोषी को सख्त चेतावनी दी जाएगी और उसे वह स्थान साफ करने के लिए कहा जाएगा। इस घटना को कैमरे में रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर अपलोड किया जाएगा।
मंत्री की अपील: जन आंदोलन बनाना ज़रूरी
पश्चिम बंगाल के नगर मामलों और शहरी विकास मंत्री अग्निमित्रा पॉल अभियान के शुभारंभ पर उपस्थित रहे। उन्होंने कहा, 'यह केवल सरकार की लड़ाई नहीं है; इसे जन आंदोलन में बदलना होगा। आम जनता के जागरूक हुए बिना डेंगू का उन्मूलन नहीं हो सकता।'
मंत्री पॉल ने यह भी कहा कि फुटपाथों पर अतिक्रमण नहीं होना चाहिए और व्यापारियों को कम से कम दो-तिहाई जगह आवागमन के लिए खाली रखनी चाहिए। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि घरों या टंकियों में पानी जमा न होने दें और पानी की टंकियों की नियमित सफाई करें।
आगे की योजना: केवल मानसून तक सीमित नहीं
अधिकारियों के अनुसार यह अभियान केवल मानसून के मौसम या कुछ दिनों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य में भी जारी रखा जाएगा। बताया गया है कि इसे सिंचाई विभाग और लोक निर्माण विभाग जैसे अन्य सरकारी विभागों के साथ मिलकर राज्य भर में संचालित किया जाएगा। यह पहल ऐसे समय में आई है जब पश्चिम बंगाल में मानसून के दौरान डेंगू के मामलों में वृद्धि एक वार्षिक चुनौती बनी हुई है।