मानसून में बुखार के पहले 24 घंटे अहम: केजीएमयू ने डेंगू, मलेरिया से बचाव के दिए अहम सुझाव
सारांश
मुख्य बातें
किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू), लखनऊ के माइक्रोबायोलॉजी विभाग ने 1 अगस्त 2026 को आमजन से अपील की है कि मानसून के दौरान बुखार को कभी नजरअंदाज न करें और लक्षण उभरने के पहले 24 घंटों के भीतर चिकित्सकीय जांच अवश्य कराएं। विभाग ने स्पष्ट किया कि डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड और अन्य संचारी रोगों का खतरा इस मौसम में सर्वाधिक रहता है, और समय पर पहचान ही गंभीर जटिलताओं से बचाव का सबसे कारगर उपाय है।
जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन
उत्तर प्रदेश शासन के विशेष संचारी रोग नियंत्रण एवं दस्तक अभियान के अंतर्गत केजीएमयू के माइक्रोबायोलॉजी विभाग ने 'मानसून सुरक्षा आपकी जिम्मेदारी – संचारी रोगों से बचाव हमारी प्राथमिकता' विषय पर एक जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम का शुभारंभ विभागाध्यक्ष प्रो. विमला वेंकटेश ने किया। उन्होंने कहा कि संचारी रोगों की रोकथाम केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं है — इसमें समाज की सक्रिय भागीदारी उतनी ही जरूरी है।
एडीज मच्छर के बारे में फैली भ्रांति
विशेषज्ञों ने एक प्रचलित भ्रांति को दूर करते हुए बताया कि डेंगू फैलाने वाला एडीज मच्छर गंदे पानी में नहीं, बल्कि साफ और रुके हुए पानी में पनपता है। प्रो. वेंकटेश ने लोगों से कूलर, गमले, बाल्टियाँ, ओवरहेड टैंक और पुराने टायरों में जमा पानी नियमित रूप से खाली करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सप्ताह में केवल 10 मिनट का निरीक्षण मच्छरों के प्रजनन को प्रभावी ढंग से रोक सकता है और पूरे परिवार को सुरक्षित रख सकता है।
विशेषज्ञों की सलाह
कार्यक्रम में अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ. शीतल वर्मा ने कहा कि मानसून में बुखार के पहले 24 घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। उन्होंने लोगों से बिना चिकित्सकीय सलाह के कोई भी दवा न लेने, पर्याप्त तरल पदार्थ लेते रहने और अनावश्यक एंटीबायोटिक के उपयोग से बचने की सलाह दी। डॉ. वर्मा ने यह भी बताया कि समय पर जांच से डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड, लेप्टोस्पायरोसिस और वायरल संक्रमणों के बीच सटीक पहचान संभव होती है, जिससे सही उपचार समय पर शुरू किया जा सकता है।
कार्यक्रम में क्या-क्या हुआ
कार्यक्रम के दौरान एमडी रेजिडेंट्स ने संचारी रोगों की रोकथाम पर पोस्टर प्रस्तुत किए। हाथों की स्वच्छता, ओआरएस घोल तैयार करने की विधि, मच्छरों के प्रजनन स्थलों की पहचान और मच्छररोधी उपायों का लाइव प्रदर्शन किया गया। इंटरएक्टिव क्विज, 'मिथक बनाम तथ्य' सत्र और विशेषज्ञ परिचर्चा के माध्यम से एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस और समुदाय स्तर पर बचाव के उपायों पर विस्तृत जानकारी दी गई। कार्यक्रम में प्रो. आर.के. कल्याण, प्रो. प्रशांत गुप्ता, डॉ. पारुल जैन, डॉ. सुरुचि शुक्ला, डॉ. वसुधा केसरवानी और डॉ. सर्वोदय त्रिपाठी सहित विभाग के संकाय सदस्य, रेजिडेंट डॉक्टर, छात्र-छात्राएं और शोधार्थी उपस्थित रहे।
आम जनता के लिए जरूरी सावधानियाँ
केजीएमयू के विभाग ने जनता से आग्रह किया कि घर और आसपास पानी जमा न होने दें, स्वच्छ पेयजल और सुरक्षित भोजन का सेवन करें, नियमित रूप से हाथ धोएं और मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाएं। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश के कई जिलों में संचारी रोगों के मामले बढ़ने की खबरें हैं — और विशेषज्ञों का मानना है कि सामुदायिक सतर्कता ही इस मौसम का सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है।