1 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

मानसून में बुखार के पहले 24 घंटे अहम: केजीएमयू ने डेंगू, मलेरिया से बचाव के दिए अहम सुझाव

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
मानसून में बुखार के पहले 24 घंटे अहम: केजीएमयू ने डेंगू, मलेरिया से बचाव के दिए अहम सुझाव

सारांश

मानसून में बुखार को हल्के में लेना भारी पड़ सकता है — केजीएमयू के विशेषज्ञों ने साफ किया कि डेंगू का एडीज मच्छर गंदे नहीं, साफ पानी में पनपता है। पहले 24 घंटों में जांच और सप्ताह में 10 मिनट का घरेलू निरीक्षण — यही इस मौसम का सबसे जरूरी बचाव है।

मुख्य बातें

केजीएमयू लखनऊ के माइक्रोबायोलॉजी विभाग ने 1 अगस्त 2026 को मानसून संचारी रोग जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया।
विशेषज्ञों ने बुखार के पहले 24 घंटों में चिकित्सकीय जांच कराने की अपील की।
एडीज मच्छर गंदे नहीं, बल्कि साफ और रुके हुए पानी में पनपता है — यह आम भ्रांति दूर की गई।
सप्ताह में 10 मिनट घर के आसपास जमा पानी हटाने से डेंगू का खतरा काफी कम होता है।
बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक न लेने और पर्याप्त तरल पदार्थ लेने की सलाह दी गई।
कार्यक्रम उत्तर प्रदेश के संचारी रोग नियंत्रण एवं दस्तक अभियान के तहत आयोजित हुआ।

किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू), लखनऊ के माइक्रोबायोलॉजी विभाग ने 1 अगस्त 2026 को आमजन से अपील की है कि मानसून के दौरान बुखार को कभी नजरअंदाज न करें और लक्षण उभरने के पहले 24 घंटों के भीतर चिकित्सकीय जांच अवश्य कराएं। विभाग ने स्पष्ट किया कि डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड और अन्य संचारी रोगों का खतरा इस मौसम में सर्वाधिक रहता है, और समय पर पहचान ही गंभीर जटिलताओं से बचाव का सबसे कारगर उपाय है।

जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन

उत्तर प्रदेश शासन के विशेष संचारी रोग नियंत्रण एवं दस्तक अभियान के अंतर्गत केजीएमयू के माइक्रोबायोलॉजी विभाग ने 'मानसून सुरक्षा आपकी जिम्मेदारी – संचारी रोगों से बचाव हमारी प्राथमिकता' विषय पर एक जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम का शुभारंभ विभागाध्यक्ष प्रो. विमला वेंकटेश ने किया। उन्होंने कहा कि संचारी रोगों की रोकथाम केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं है — इसमें समाज की सक्रिय भागीदारी उतनी ही जरूरी है।

एडीज मच्छर के बारे में फैली भ्रांति

विशेषज्ञों ने एक प्रचलित भ्रांति को दूर करते हुए बताया कि डेंगू फैलाने वाला एडीज मच्छर गंदे पानी में नहीं, बल्कि साफ और रुके हुए पानी में पनपता है। प्रो. वेंकटेश ने लोगों से कूलर, गमले, बाल्टियाँ, ओवरहेड टैंक और पुराने टायरों में जमा पानी नियमित रूप से खाली करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सप्ताह में केवल 10 मिनट का निरीक्षण मच्छरों के प्रजनन को प्रभावी ढंग से रोक सकता है और पूरे परिवार को सुरक्षित रख सकता है।

विशेषज्ञों की सलाह

कार्यक्रम में अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ. शीतल वर्मा ने कहा कि मानसून में बुखार के पहले 24 घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। उन्होंने लोगों से बिना चिकित्सकीय सलाह के कोई भी दवा न लेने, पर्याप्त तरल पदार्थ लेते रहने और अनावश्यक एंटीबायोटिक के उपयोग से बचने की सलाह दी। डॉ. वर्मा ने यह भी बताया कि समय पर जांच से डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड, लेप्टोस्पायरोसिस और वायरल संक्रमणों के बीच सटीक पहचान संभव होती है, जिससे सही उपचार समय पर शुरू किया जा सकता है।

कार्यक्रम में क्या-क्या हुआ

कार्यक्रम के दौरान एमडी रेजिडेंट्स ने संचारी रोगों की रोकथाम पर पोस्टर प्रस्तुत किए। हाथों की स्वच्छता, ओआरएस घोल तैयार करने की विधि, मच्छरों के प्रजनन स्थलों की पहचान और मच्छररोधी उपायों का लाइव प्रदर्शन किया गया। इंटरएक्टिव क्विज, 'मिथक बनाम तथ्य' सत्र और विशेषज्ञ परिचर्चा के माध्यम से एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस और समुदाय स्तर पर बचाव के उपायों पर विस्तृत जानकारी दी गई। कार्यक्रम में प्रो. आर.के. कल्याण, प्रो. प्रशांत गुप्ता, डॉ. पारुल जैन, डॉ. सुरुचि शुक्ला, डॉ. वसुधा केसरवानी और डॉ. सर्वोदय त्रिपाठी सहित विभाग के संकाय सदस्य, रेजिडेंट डॉक्टर, छात्र-छात्राएं और शोधार्थी उपस्थित रहे।

आम जनता के लिए जरूरी सावधानियाँ

केजीएमयू के विभाग ने जनता से आग्रह किया कि घर और आसपास पानी जमा न होने दें, स्वच्छ पेयजल और सुरक्षित भोजन का सेवन करें, नियमित रूप से हाथ धोएं और मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाएं। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश के कई जिलों में संचारी रोगों के मामले बढ़ने की खबरें हैं — और विशेषज्ञों का मानना है कि सामुदायिक सतर्कता ही इस मौसम का सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि जागरूकता कार्यक्रम कितने लोगों तक पहुँचते हैं — खासकर उन ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों तक जहाँ संचारी रोगों का बोझ सबसे ज्यादा है। हर साल मानसून में यही सलाहें दोहराई जाती हैं, फिर भी उत्तर प्रदेश में डेंगू और मलेरिया के मामले बढ़ते रहते हैं। जब तक स्वास्थ्य ढाँचे में जमीनी स्तर पर जांच सुविधाएं और जागरूकता एक साथ नहीं पहुँचतीं, तब तक 'पहले 24 घंटे में जांच कराएं' की सलाह उन लाखों लोगों के लिए अधूरी रहेगी जिनके पास नजदीक कोई सरकारी स्वास्थ्य केंद्र ही नहीं है।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मानसून में बुखार होने पर सबसे पहले क्या करें?
केजीएमयू के विशेषज्ञों के अनुसार, बुखार के पहले 24 घंटों के भीतर चिकित्सकीय जांच अवश्य कराएं। बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवा, विशेषकर एंटीबायोटिक, न लें और पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेते रहें।
डेंगू का मच्छर कहाँ पनपता है?
डेंगू फैलाने वाला एडीज मच्छर गंदे पानी में नहीं, बल्कि साफ और रुके हुए पानी में पनपता है। कूलर, गमले, बाल्टियाँ, ओवरहेड टैंक और पुराने टायरों में जमा पानी इसके प्रमुख प्रजनन स्थल हैं।
घर पर डेंगू और मलेरिया से बचाव के लिए क्या करें?
सप्ताह में कम से कम एक बार 10 मिनट घर और आसपास जमा पानी की जांच कर उसे हटाएं। मच्छरदानी और मच्छररोधी उपायों का उपयोग करें, स्वच्छ पेयजल पिएं, सुरक्षित भोजन करें और नियमित रूप से हाथ धोएं।
केजीएमयू का यह जागरूकता कार्यक्रम किस अभियान के तहत था?
यह कार्यक्रम उत्तर प्रदेश शासन के विशेष संचारी रोग नियंत्रण एवं दस्तक अभियान के अंतर्गत आयोजित किया गया। इसमें पोस्टर प्रस्तुति, लाइव प्रदर्शन, इंटरएक्टिव क्विज और 'मिथक बनाम तथ्य' सत्र शामिल थे।
मानसून में कौन-से संचारी रोगों का खतरा सबसे ज्यादा रहता है?
केजीएमयू के विशेषज्ञों के अनुसार मानसून में डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड, लेप्टोस्पायरोसिस और विभिन्न वायरल संक्रमणों का खतरा सबसे अधिक रहता है। समय पर जांच से इन रोगों के बीच सटीक पहचान संभव होती है और उचित उपचार शुरू किया जा सकता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 9 महीने पहले
  6. 9 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले