प्रयागराज में डेंगू, मलेरिया और स्वाइन फ्लू से बचाव की तैयारी, डॉ. मंसूर अहमद ने बताए ज़रूरी उपाय
सारांश
मुख्य बातें
प्रयागराज में मानसून के साथ बढ़ते मौसमी संक्रमणों — डेंगू, मलेरिया और स्वाइन फ्लू — से निपटने के लिए जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने अपनी तैयारियाँ पूरी कर ली हैं। तेज बहादुर सप्रू अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. मंसूर अहमद के अनुसार, अस्पताल में डेंगू के मरीज़ों के लिए अलग वार्ड, दवाएँ और जाँच की सुविधाएँ उपलब्ध करा दी गई हैं। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे लक्षणों को नज़रअंदाज़ न करें और समय रहते चिकित्सीय परामर्श लें।
स्वाइन फ्लू: हवा से फैलता है संक्रमण
डॉ. मंसूर अहमद ने बताया कि स्वाइन फ्लू एक वायुजनित संक्रमण है जो संक्रमित व्यक्ति के खाँसने या छींकने से निकलने वाली बूँदों के ज़रिए दूसरों तक पहुँचता है। सार्वजनिक स्थानों पर बिना सावधानी के खाँसना या छींकना संक्रमण के प्रसार का प्रमुख कारण बन सकता है। उन्होंने सलाह दी कि बुखार के साथ खाँसी-जुकाम होने पर मास्क अवश्य पहनें और सार्वजनिक जगहों पर रुमाल या टिश्यू का इस्तेमाल करें।
वायरल बुखार में उपचार और एंटीबायोटिक को लेकर सावधानी
डॉक्टर के अनुसार वायरल संक्रमण के दौरान पर्याप्त आराम और पानी का सेवन अत्यंत आवश्यक है। शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता मज़बूत रखने से भी संक्रमण से उबरने में मदद मिलती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वायरल बुखार के कई मामले समय के साथ स्वतः ठीक हो जाते हैं और मरीज़ को मुख्यतः लक्षणों के आधार पर पेरासिटामोल जैसी दवाएँ दी जाती हैं।
डॉ. अहमद ने एंटीबायोटिक के अनावश्यक उपयोग को लेकर भी आगाह किया। उनके अनुसार हर वायरल संक्रमण में एंटीबायोटिक की ज़रूरत नहीं होती — केवल तब जब द्वितीयक बैक्टीरियल संक्रमण की आशंका हो, तभी चिकित्सक की सलाह पर एंटीबायोटिक लेनी चाहिए। बिना ज़रूरत इनका सेवन हानिकारक हो सकता है।
ओपीडी में रोज़ाना 150-200 मरीज़, 10-12 बुखार के
डॉक्टर ने बताया कि उनकी ओपीडी में प्रतिदिन लगभग 150 से 200 मरीज़ आते हैं, जिनमें से करीब 10 से 12 मरीज़ बुखार, जुकाम और खाँसी के लक्षणों के साथ होते हैं। कुछ मरीज़ों में बुखार के साथ शरीर और जोड़ों में दर्द की शिकायत भी रहती है। ऐसे मामलों में चिकित्सक केवल लक्षणों पर निर्भर न रहकर विभिन्न संभावित कारणों को ध्यान में रखते हुए जाँच कराते हैं।
डेंगू के लक्षण और गंभीर स्थिति में तुरंत अस्पताल जाएँ
डॉ. मंसूर अहमद के अनुसार डेंगू में तेज़ बुखार के साथ शरीर पर चकत्ते, आँखों के पीछे दर्द, सिर में भारीपन, जी मिचलाना, उल्टी, अत्यधिक कमज़ोरी और जोड़ों में दर्द जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। गंभीर डेंगू में चक्कर आना, रक्तचाप गिरना और आंतरिक या बाह्य रक्तस्राव जैसी जटिलताएँ उत्पन्न हो सकती हैं। ऐसे संकेत मिलते ही मरीज़ को तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए, जहाँ उसे भर्ती कर निरंतर निगरानी में रखा जाता है।
बचाव के उपाय: घर में पानी जमा न होने दें
डेंगू से बचाव के लिए डॉ. अहमद ने घर और आसपास पानी जमा न होने देने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि डेंगू का मच्छर साफ पानी में भी पनपता है और दिन में काटता है, इसलिए कूलर, पुराने टायर, गमले और बर्तनों की नियमित सफाई ज़रूरी है। सप्ताह में कम से कम एक बार इन जगहों को खाली और साफ करें। पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनना और मच्छरदानी का उपयोग भी संक्रमण से बचाव में कारगर है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सतर्कता और समय पर उपचार ही इन बीमारियों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।