डेंगू-मलेरिया नियंत्रण के लिए जन भागीदारी अनिवार्य: डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने लखनऊ में संचारी रोग अभियान लॉन्च किया
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने 1 जुलाई 2026 को लखनऊ स्थित डॉ. राममनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस के एकेडमिक ब्लॉक से राज्यव्यापी संचारी रोग नियंत्रण अभियान का शुभारंभ किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि डेंगू, मलेरिया और इंसेफलाइटिस जैसी बीमारियों पर पूर्ण नियंत्रण तब तक संभव नहीं, जब तक आम नागरिक अपने घर और आसपास के परिवेश को साफ रखने में सक्रिय भूमिका नहीं निभाते।
अभियान का उद्देश्य और सरकारी प्रयास
पाठक ने बताया कि राज्य सरकार वर्ष में तीन बार संचारी रोग नियंत्रण एवं जागरूकता अभियान चलाती है, जिसमें 13 विभागों का समन्वय होता है। उन्होंने कहा कि इंसेफलाइटिस — जो कभी प्रदेश की सबसे गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक था — पर अब लगभग 99 प्रतिशत तक नियंत्रण प्राप्त कर लिया गया है। डेंगू और मलेरिया के मामलों में भी उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। यह ऐसे समय में आया है जब मानसून के साथ मच्छर जनित रोगों का खतरा बढ़ जाता है।
जनता से अपील: रोकथाम ही सबसे बड़ा उपाय
उपमुख्यमंत्री ने नागरिकों से घरों और आसपास पानी जमा न होने देने की अपील की, क्योंकि ठहरा हुआ पानी मच्छरों के लार्वा के पनपने का मुख्य स्रोत है। उन्होंने कहा कि सीलन, गंदगी और धूल से दूरी बनाएँ, भोजन से पहले साबुन से हाथ धोएँ, और बाज़ार में खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों तथा कोल्ड ड्रिंक के अत्यधिक सेवन से बचें। नियमित व्यायाम को भी उन्होंने रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए ज़रूरी बताया।
पाठक ने विशेष रूप से डेंगू के खतरे पर ध्यान दिलाते हुए कहा कि इस बीमारी में प्लेटलेट्स तेज़ी से घट सकती हैं, जिससे मरीज की जान जोखिम में पड़ सकती है। उन्होंने ज़ोर दिया कि बीमारी का इंतज़ार करने के बजाय मच्छरों के लार्वा को पनपने से रोकना ही सबसे प्रभावी रणनीति है — यह उपाय डेंगू, मलेरिया, इंसेफलाइटिस और चिकनगुनिया, सभी से बचाव करता है। गौरतलब है कि अब तक स्वास्थ्य अभियानों का फोकस उपचार पर अधिक और रोकथाम पर कम रहा है — इस अभियान में इसी खाई को पाटने की कोशिश है।
मेडिकल छात्रों से संवाद
इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री ने लोहिया संस्थान के एमबीबीएस प्रथम वर्ष और बीएससी नर्सिंग के विद्यार्थियों से सीधा संवाद किया। उन्होंने छात्रों से पढ़ाई, हॉस्टल की सुविधाओं और भोजन की गुणवत्ता के बारे में जानकारी ली। छात्रों ने भोजन और आवास व्यवस्था पर संतोष व्यक्त किया।
पाठक ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि उनके माता-पिता ने बड़ी उम्मीदों के साथ उन्हें यहाँ भेजा है और अनुशासन, मेहनत तथा आत्मविश्वास से हर चुनौती पर विजय पाई जा सकती है।
संस्थान निदेशक को निर्देश
उपमुख्यमंत्री ने संस्थान के निदेशक डॉ. सीएम सिंह को निर्देश दिए कि छात्रों के भोजन की गुणवत्ता की नियमित जाँच सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि संतुलित आहार में पर्याप्त प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और विटामिन मिलना चाहिए, और विद्यार्थियों की रहन-सहन व खान-पान की बेहतर व्यवस्था संस्थान की प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि वे किसी दिन स्वयं छात्रों के साथ भोजन करने आएँगे।
आगे की राह
यह अभियान मानसून सीज़न की शुरुआत के साथ ही लॉन्च किया गया है, जो समय की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है। सरकारी तंत्र के साथ-साथ नागरिक जागरूकता को इस लड़ाई का केंद्र बनाना ही आने वाले महीनों में संचारी रोगों पर असरदार नियंत्रण की कुंजी होगी।