28 जून 2026
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कोलकाता फुटपाथ हॉकर अतिक्रमण: मंत्री दिलीप घोष ने दी सख्त कार्रवाई की चेतावनी

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कोलकाता फुटपाथ हॉकर अतिक्रमण: मंत्री दिलीप घोष ने दी सख्त कार्रवाई की चेतावनी

सारांश

कोलकाता के फुटपाथ दशकों से हॉकरों के कब्जे में हैं — अब मंत्री दिलीप घोष ने सख्त चेतावनी दी है। रेलवे स्टेशनों पर चल रहे अतिक्रमण-विरोधी अभियान की तर्ज पर शहर के फुटपाथ खाली कराए जाएंगे, वरना कानूनी कार्रवाई होगी।

मुख्य बातें

मंत्री दिलीप घोष ने 28 जून 2026 को घोषणा की कि कोलकाता के फुटपाथ अवैध हॉकर स्टॉलों से मुक्त कराए जाएंगे।
यह अभियान राज्य के रेलवे स्टेशनों पर जारी अतिक्रमण-विरोधी कार्रवाई की तर्ज पर चलाया जाएगा।
घोष ने कहा कि अवैध कब्जेदार पैदल यात्रियों और कर-अदा करने वाले दुकानदारों, दोनों के लिए नुकसानदेह हैं।
फुटपाथ पर कब्जे के कारण पैदल यात्री सड़क के बीच से चलने को मजबूर होते हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ता है।
यह समस्या 34 वर्षों के वाम मोर्चा शासन से चली आ रही है; पिछली सरकारों पर उपेक्षा का आरोप।
अतिक्रमणकारियों को स्वेच्छा से हटने की चेतावनी, अन्यथा राज्य सरकार कानूनी कार्रवाई करेगी।

पश्चिम बंगाल के ग्रामीण विकास एवं पंचायत मामलों के मंत्री दिलीप घोष ने रविवार, 28 जून 2026 को स्पष्ट किया कि कोलकाता के फुटपाथों को अवैध हॉकर स्टॉलों से मुक्त कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह अभियान उसी तर्ज पर चलाया जाएगा जैसे राज्य के विभिन्न रेलवे स्टेशनों पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जा रही है।

मंत्री का सीधा संदेश

मीडियाकर्मियों से बात करते हुए घोष ने कहा, 'चाहे रेलवे स्टेशन हों या कोलकाता के फुटपाथ — ये जगहें कारोबार चलाने के लिए नहीं हैं।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि जिन लोगों ने अतीत में अवैध कब्जेदारों को प्रश्रय दिया या बढ़ावा दिया, उन्हें अब यह बात अच्छी तरह समझ लेनी चाहिए।

घोष ने तर्क दिया कि फुटपाथ उन पैदल चलने वालों के लिए हैं जो सरकार और नगर निकायों को कर चुकाते हैं। उन्होंने कहा कि अवैध कब्जेदार न केवल पैदल यात्रियों का रास्ता रोकते हैं, बल्कि उन वैध दुकानदारों के प्रवेश द्वार भी बंद कर देते हैं जो नियमित रूप से कर अदा करते हैं।

सुरक्षा जोखिम और यातायात संकट

घोष ने चेतावनी दी कि कोलकाता की सड़कें पहले से ही अत्यधिक भीड़-भाड़ वाली हैं और यातायात जाम यहाँ रोज़ की समस्या है। उन्होंने कहा कि फुटपाथों पर अवैध कब्जे के कारण पैदल यात्रियों को जान जोखिम में डालकर सड़क के बीचोंबीच चलना पड़ता है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा और बढ़ जाता है।

उन्होंने अतिक्रमणकारियों को स्वेच्छा से हटने की सलाह देते हुए कहा कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो राज्य सरकार कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई करेगी।

दशकों पुरानी समस्या

गौरतलब है कि कोलकाता के फुटपाथों और सार्वजनिक रास्तों पर अतिक्रमण की यह समस्या 34 वर्षों के वाम मोर्चा शासन के दौर से चली आ रही है। उत्तरी और दक्षिणी कोलकाता की कई प्रमुख सड़कों के फुटपाथ दशकों से हॉकरों के कब्जे में हैं। आलोचकों का कहना है कि पिछली सरकारों ने वोट बैंक की राजनीति के चलते इस समस्या को कभी गंभीरता से नहीं लिया।

पैदल यात्रियों और अवैध कब्जेदारों के बीच झगड़े और भीड़भाड़ के कारण सड़क दुर्घटनाएँ लंबे समय से शहर की बड़ी शिकायतों में शुमार रही हैं।

राजनीतिक पृष्ठभूमि

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और पश्चिम बंगाल में पार्टी के पूर्व अध्यक्ष रह चुके घोष अब राज्य सरकार में मंत्री हैं। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य में सार्वजनिक स्थानों पर अतिक्रमण के विरुद्ध कार्रवाई तेज़ हो रही है। यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि क्या यह घोषणा ठोस प्रशासनिक अभियान का रूप लेती है या केवल चेतावनी तक सीमित रहती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि गहरी राजनीतिक अर्थव्यवस्था की है — हॉकर संगठन दशकों से सत्तारूढ़ दलों के वोट-बैंक रहे हैं। असली परीक्षा यह है कि क्या यह चेतावनी ज़मीनी अभियान में बदलेगी, या रेलवे स्टेशन अभियान की तरह आंशिक और चुनिंदा रहेगी। बिना पुनर्वास नीति के केवल बेदखली सामाजिक तनाव को बढ़ा सकती है — यह पहलू घोष के बयान में अनुपस्थित है।
RashtraPress
28 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोलकाता के फुटपाथों से हॉकर हटाने की घोषणा किसने की?
पश्चिम बंगाल के ग्रामीण विकास एवं पंचायत मामलों के मंत्री दिलीप घोष ने 28 जून 2026 को यह घोषणा की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अवैध हॉकर स्टॉलों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करेगी।
कोलकाता फुटपाथ अतिक्रमण की समस्या कितनी पुरानी है?
यह समस्या 34 वर्षों के वाम मोर्चा शासन के समय से चली आ रही है। उत्तरी और दक्षिणी कोलकाता की प्रमुख सड़कों के फुटपाथ दशकों से हॉकरों के कब्जे में हैं और पिछली सरकारों पर इसे नज़रअंदाज़ करने का आरोप रहा है।
हॉकर अतिक्रमण से पैदल यात्रियों को क्या खतरा है?
फुटपाथ पर कब्जे के कारण पैदल यात्री सड़क के बीच से चलने को मजबूर होते हैं, जिससे दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ता है। कोलकाता की सड़कें पहले से भीड़भाड़ वाली हैं और यातायात जाम आम समस्या है।
क्या हॉकरों को हटाने के लिए कोई समयसीमा तय की गई है?
मंत्री घोष के बयान में कोई विशेष समयसीमा नहीं बताई गई। उन्होंने अतिक्रमणकारियों को स्वेच्छा से हटने की चेतावनी दी और कहा कि ऐसा न करने पर राज्य सरकार कानून के अनुसार कार्रवाई करेगी।
दिलीप घोष कौन हैं और पश्चिम बंगाल की राजनीति में उनकी क्या भूमिका है?
दिलीप घोष भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और पश्चिम बंगाल में पार्टी के पूर्व अध्यक्ष हैं। वर्तमान में वे राज्य सरकार में ग्रामीण विकास एवं पंचायत मामलों के मंत्री के रूप में कार्यरत हैं।
राष्ट्र प्रेस
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