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दीपक खत्री की पुलिस हिरासत 5 दिन बढ़ी, लॉरेंस बिश्नोई गैंग से एक दशक पुराना कनेक्शन उजागर

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दीपक खत्री की पुलिस हिरासत 5 दिन बढ़ी, लॉरेंस बिश्नोई गैंग से एक दशक पुराना कनेक्शन उजागर

सारांश

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े वकील दीपक खत्री उर्फ मामा की पुलिस हिरासत पाँच दिन और बढ़ाई। पुलिस ने 10 दिन माँगे थे। UAPA के तहत हथियार तस्करी और रंगदारी मामले में गिरफ्तार खत्री पर एक दशक से गैंग से जुड़े होने का आरोप है।

मुख्य बातें

राउज एवेन्यू कोर्ट ने 29 अगस्त को वकील दीपक खत्री उर्फ मामा की पुलिस हिरासत 5 दिन और बढ़ाई।
दिल्ली पुलिस ने 10 दिन की हिरासत माँगी थी, कोर्ट ने आंशिक रूप से मंजूरी दी।
खत्री को UAPA, 1967 के तहत अवैध हथियार सप्लाई और रंगदारी मामले में गिरफ्तार किया गया है।
डीसीपी संजीव यादव के अनुसार, 45 वर्षीय खत्री पिछले एक दशक से लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़ा है।
खत्री ने मेरठ के वेंकटेश्वर ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस से स्नातक के बाद दिल्ली बार काउंसिल की सदस्यता ली थी।

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने 29 अगस्त को लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े वकील दीपक खत्री उर्फ मामा की पुलिस हिरासत पाँच दिन और बढ़ा दी। दिल्ली पुलिस ने कोर्ट से 10 दिन की अतिरिक्त हिरासत की माँग की थी, लेकिन कोर्ट ने केवल पाँच दिन का रिमांड मंजूर किया। खत्री को गैरकानूनी गतिविधियाँ रोकथाम अधिनियम (UAPA), 1967 के तहत दर्ज उस मामले में गिरफ्तार किया गया है, जिसमें अवैध हथियारों की सप्लाई और रंगदारी के आरोप शामिल हैं।

तीन दिन की हिरासत पूरी होने पर पेशी

दीपक खत्री की पहली तीन दिन की पुलिस हिरासत शनिवार को समाप्त हो रही थी, जिसके बाद उसे कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने पुलिस की 10 दिन की माँग को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए पाँच दिन का रिमांड दिया। खत्री को लॉरेंस बिश्नोई की कानूनी टीम का हिस्सा बताया जाता है।

एक दशक से गैंग से जुड़ाव का आरोप

डीसीपी संजीव यादव ने बताया कि 45 वर्षीय दीपक खत्री पिछले एक दशक से बिश्नोई गैंग से जुड़ा हुआ है। अधिकारियों के अनुसार, हाल ही में हथियारों की तस्करी के एक मामले में उसकी भूमिका सामने आई, जिसके बाद गिरफ्तारी की गई। यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली पुलिस बिश्नोई नेटवर्क के कथित सहयोगियों पर शिकंजा कसने में जुटी है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि और वकालत का सफर

जाँच से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि दीपक खत्री ने लगभग दो साल पहले मेरठ के वेंकटेश्वर ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस से स्नातक की उपाधि प्राप्त की। इसके बाद उसने दिल्ली बार काउंसिल की सदस्यता ली और दिल्ली की निचली अदालतों में वकालत शुरू की।

कथित भूमिका: संपर्क सूत्र से हथियार तस्करी तक

अधिकारियों के अनुसार, खत्री कथित तौर पर मुवक्किलों की व्यवस्था करता था, समझौतों में हिस्सा लेता था और दिल्ली की निचली अदालतों में वकीलों के लिए संपर्क सूत्र का काम करता था। जाँच एजेंसियाँ अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि उसने वकालत की आड़ में गैंग के लिए किस हद तक काम किया। गौरतलब है कि UAPA एक कड़ा कानून है जिसके तहत जमानत मिलना अत्यंत कठिन होता है।

आगे क्या होगा

पाँच दिन की हिरासत समाप्त होने के बाद दीपक खत्री को पुनः कोर्ट में पेश किया जाएगा, जहाँ पुलिस और रिमांड की माँग कर सकती है या न्यायिक हिरासत में भेजने की अर्जी दे सकती है। जाँच का दायरा बिश्नोई गैंग के कानूनी और लॉजिस्टिक नेटवर्क तक फैला हुआ बताया जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

दलालों और संपर्क सूत्रों का एक नेटवर्क जो जेल में बंद नेताओं को बाहरी दुनिया से जोड़े रखता है। UAPA का प्रयोग यहाँ संकेत देता है कि पुलिस इसे महज़ एक व्यक्तिगत अपराध नहीं, बल्कि संगठित आतंकी ढाँचे का हिस्सा मान रही है। असली सवाल यह है कि क्या जाँच एजेंसियाँ इस नेटवर्क की पूरी परतें उघाड़ पाएंगी, या यह मामला भी अदालती पेचीदगियों में उलझकर रह जाएगा।
RashtraPress
29 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दीपक खत्री कौन है और उसे क्यों गिरफ्तार किया गया?
दीपक खत्री उर्फ मामा एक वकील है जिसे लॉरेंस बिश्नोई गैंग की कानूनी टीम का हिस्सा बताया जाता है। उसे UAPA के तहत अवैध हथियारों की सप्लाई और रंगदारी से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया गया है।
राउज एवेन्यू कोर्ट ने कितने दिन की हिरासत मंजूर की?
कोर्ट ने 29 अगस्त को दीपक खत्री की पुलिस हिरासत 5 दिन और बढ़ाई। दिल्ली पुलिस ने 10 दिन की माँग की थी, लेकिन कोर्ट ने केवल पाँच दिन का रिमांड दिया।
दीपक खत्री का लॉरेंस बिश्नोई गैंग से क्या संबंध बताया जा रहा है?
डीसीपी संजीव यादव के अनुसार, 45 वर्षीय दीपक खत्री पिछले एक दशक से बिश्नोई गैंग से जुड़ा हुआ है। वह कथित तौर पर मुवक्किलों की व्यवस्था करता था, समझौतों में हिस्सा लेता था और अदालतों में वकीलों के लिए संपर्क सूत्र का काम करता था।
UAPA क्या है और इस मामले में इसका प्रयोग क्यों हुआ?
गैरकानूनी गतिविधियाँ रोकथाम अधिनियम (UAPA), 1967 एक कड़ा कानून है जो आतंकवाद और संगठित अपराध से जुड़े मामलों में लागू होता है। इसके तहत जमानत मिलना बेहद कठिन होता है। इस मामले में इसका प्रयोग संकेत देता है कि पुलिस खत्री की भूमिका को संगठित आपराधिक नेटवर्क का हिस्सा मान रही है।
राष्ट्र प्रेस
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