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क्या दिल्ली क्राइम ब्रांच ने लॉरेंस बिश्नोई गैंग के वांछित शूटर को गिरफ्तार किया?

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क्या दिल्ली क्राइम ब्रांच ने लॉरेंस बिश्नोई गैंग के वांछित शूटर को गिरफ्तार किया?

सारांश

दिल्ली क्राइम ब्रांच ने एक बड़ी कार्रवाई में लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े वांछित शूटर को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी न केवल संगठित अपराध के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह बताती है कि पुलिस ऐसे अपराधियों पर लगातार नज़र रख रही है। जानिए इस गिरफ्तारी की पूरी कहानी।

मुख्य बातें

प्रदीप शर्मा उर्फ गोलू की गिरफ्तारी संगठित अपराध के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कार्रवाई है।
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने राजस्थान पुलिस के साथ मिलकर यह सफलता हासिल की।
गिरफ्तारी से साबित होता है कि पुलिस ऐसे अपराधियों पर नजर रख रही है।

नई दिल्ली, 18 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। संगठित अपराध, रंगदारी और अवैध हथियारों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत क्राइम ब्रांच को एक बड़ी सफलता मिली है। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (एजीएस) टीम ने राजस्थान पुलिस के साथ मिलकर लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े एक वांछित शूटर को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान आगरा निवासी प्रदीप शर्मा उर्फ गोलू (23) के रूप में हुई है।

क्राइम ब्रांच के अनुसार, आरोपी को राजस्थान के जिला गंगानगर स्थित थाना रायसिंह नगर में दर्ज एफआईआर संख्या 710/2025 और 416/25 के तहत बीएनएस की धारा 308(2), 308(4), 308(5), 111(6), 111(7) व 61(2) में वांछित घोषित किया गया था। इन मामलों में उसके सहयोगियों द्वारा गंभीर अपराध किए जाने की आशंका जताई गई थी।

जांच में सामने आया है कि मार्च 2025 में लॉरेंस बिश्नोई गैंग के सदस्यों ने राजस्थान के गंगानगर जिले के जवाहर नगर क्षेत्र में रहने वाले एक व्यवसायी से चार करोड़ रुपए की रंगदारी मांगी थी। व्यवसायी द्वारा रकम देने से इनकार करने पर गैंग ने अपने शूटर प्रदीप उर्फ गोलू को व्यवसायी के घर पर फायरिंग करने का आदेश दिया। इसके बाद मई 2025 में प्रदीप उर्फ गोलू ने अपने साथियों के साथ मिलकर व्यवसायी पर गोलीबारी की। इस संबंध में थाना जवाहर नगर, राजस्थान में एफआईआर संख्या 285/2025, धारा 109(2)/308/3(5) बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया गया था। इस केस में आरोपी और उसके सहयोगियों को गिरफ्तार किया गया था, हालांकि बाद में वह जमानत पर रिहा हो गया।

जमानत पर रिहा होने के बाद भी आरोपी ने आपराधिक गतिविधियां नहीं छोड़ीं और लॉरेंस बिश्नोई गैंग के सदस्यों को अवैध हथियार और गोला-बारूद की आपूर्ति करने लगा। इसी कड़ी में गैंग के चार सदस्यों को भारी मात्रा में हथियारों और कारतूसों के साथ गिरफ्तार किया गया। इस मामले में थाना जवाहर नगर, राजस्थान में एफआईआर संख्या 710/2025 आर्म्स एक्ट की धारा 3/7/25(1-ए)/25(6) के तहत दर्ज की गई, जिसमें प्रदीप उर्फ गोलू को बरामद हथियारों का मुख्य स्रोत बताया गया।

राजधानी और आसपास के इलाकों में बढ़ते संगठित अपराध, रंगदारी, फायरिंग और अवैध हथियारों की घटनाओं को देखते हुए दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच लगातार ऐसे अपराधियों पर नजर बनाए हुए है। इसी क्रम में एंटी गैंगस्टर स्क्वॉड (एजीएस) को अंतरराज्यीय स्तर पर सक्रिय अपराधियों की पहचान और गिरफ्तारी की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

डीसीपी/क्राइम ब्रांच हर्ष इंदोरा के निर्देश पर एजीएस की एक विशेष टीम का गठन किया गया, जिसका नेतृत्व इंस्पेक्टर कृष्ण कुमार ने किया। टीम में एसआई अगम प्रसाद, एसआई मुकेश कुमार, एसआई नवीन, एसआई राजबीर, एएसआई गोविंद, हेड कांस्टेबल पप्पू और हेड कांस्टेबल अनूप शामिल थे। टीम की निगरानी एसीपी/एजीएस भगवती प्रसाद द्वारा की जा रही थी।

पुख्ता सूचना के आधार पर 16 जनवरी को राजस्थान पुलिस के सहयोग से दिल्ली के उत्तम नगर इलाके में छापा मारा गया, जहां से आरोपी प्रदीप शर्मा उर्फ गोलू को गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ के दौरान आरोपी की भूमिका संदिग्ध पाए जाने पर राजस्थान पुलिस ने उसे आगे की जांच के लिए अपनी हिरासत में ले लिया। प्रदीप शर्मा उर्फ गोलू मूल रूप से आगरा, उत्तर प्रदेश का रहने वाला है और वर्तमान में दिल्ली के उत्तम नगर इलाके में रह रहा था। वह पहले भी राजस्थान के गंगानगर में फायरिंग की घटना में शामिल रहा है और लॉरेंस बिश्नोई गैंग के निर्देश पर व्यवसायियों को निशाना बनाता रहा है। फिलहाल वह राजस्थान क्षेत्र में लॉरेंस गैंग का सक्रिय सदस्य बनकर काम कर रहा था।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिससे यह स्पष्ट होता है कि वे अपराधियों पर नज़र रखने में सक्षम हैं। इस तरह की कार्रवाइयां समाज में सुरक्षा का एहसास दिलाती हैं और यह सुनिश्चित करती हैं कि अपराधी कानून की पकड़ से बच न सकें।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रदीप शर्मा उर्फ गोलू क्यों वांछित था?
प्रदीप शर्मा उर्फ गोलू को लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े गंभीर अपराधों के लिए वांछित घोषित किया गया था, जिसमें रंगदारी और फायरिंग शामिल हैं।
क्राइम ब्रांच ने किस तरह की कार्रवाई की?
क्राइम ब्रांच ने राजस्थान पुलिस के साथ मिलकर प्रदीप शर्मा की गिरफ्तारी के लिए एक ऑपरेशन चलाया।
प्रदीप शर्मा की गिरफ्तारी की क्या अहमियत है?
यह गिरफ्तारी संगठित अपराध के खिलाफ पुलिस की सक्रियता को दर्शाती है और समाज में सुरक्षा का एहसास कराती है।
कौन-कौन से अधिकारी इस ऑपरेशन में शामिल थे?
इस ऑपरेशन में इंस्पेक्टर कृष्ण कुमार, एसआई अगम प्रसाद, मुकेश कुमार, नवीन, राजबीर, एएसआई गोविंद और हेड कांस्टेबल पप्पू और अनूप शामिल थे।
लॉरेंस बिश्नोई गैंग का क्या इतिहास है?
लॉरेंस बिश्नोई गैंग एक कुख्यात अपराधी समूह है, जो रंगदारी, हत्या और अन्य गंभीर अपराधों में शामिल है।
राष्ट्र प्रेस
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