25 अगस्त 2026
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कर्नाटक में क्लाउड सीडिंग अभियान दो दिन में शुरू, ₹27 करोड़ खर्च से 60 दिन चलेगा कार्यक्रम

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कर्नाटक में क्लाउड सीडिंग अभियान दो दिन में शुरू, ₹27 करोड़ खर्च से 60 दिन चलेगा कार्यक्रम

सारांश

कर्नाटक सरकार वर्षा संकट से निपटने के लिए ₹27 करोड़ की लागत से 60 दिवसीय क्लाउड सीडिंग अभियान शुरू करने जा रही है। IIT, IISc और IMD के विशेषज्ञ तकनीकी निगरानी करेंगे। पिछली बार 18-20% सफलता मिली थी, इस बार 30% का लक्ष्य रखा गया है।

मुख्य बातें

जल संसाधन मंत्री एन.
चेलुवरायस्वामी ने 25 अगस्त को घोषणा की कि दो दिनों के भीतर क्लाउड सीडिंग अभियान शुरू होगा।
अभियान 60 दिनों तक चलेगा; लगभग 200 उड़ान घंटे और ₹27 करोड़ का अनुमानित खर्च, जो राज्य सरकार वहन करेगी।
IIT, IISc और IMD के विशेषज्ञ टेक्निकल कमेटी में शामिल होंगे; मॉनिटरिंग और फील्ड ऑपरेशन के लिए अलग समितियाँ बनेंगी।
पूर्व में कर्नाटक में तीन बार क्लाउड सीडिंग हो चुकी है, सफलता दर 18-20% ; इस बार 30% का लक्ष्य।
क्लाउड सीडिंग क्षेत्र के 15 किलोमीटर दायरे में वर्षा की संभावना; अभियान सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे तक चलेगा।
राज्य के चारों राजस्व मंडलों में अभियान संचालित होगा; झीलों-तालाबों को भरना और वर्षा आधारित कृषि को सहायता प्राथमिकता में।

कर्नाटक सरकार ने राज्य में गहराते वर्षा संकट से निपटने के लिए क्लाउड सीडिंग (कृत्रिम वर्षा) अभियान को हरी झंडी दे दी है। जल संसाधन मंत्री एन. चेलुवरायस्वामी ने मंगलवार, 25 अगस्त को बेंगलुरु में विधान सौधा में आयोजित प्रेस वार्ता में बताया कि अगले दो दिनों के भीतर यह अभियान प्रारंभ किया जा सकता है। राज्य के चारों राजस्व मंडलों में संचालित होने वाले इस कार्यक्रम पर लगभग ₹27 करोड़ का खर्च अनुमानित है, जिसे राज्य सरकार पूरी तरह वहन करेगी।

अभियान की संरचना और समितियाँ

मंत्री चेलुवरायस्वामी ने बताया कि मंगलवार की शाम तक तीन समितियों का गठन किया जाएगा — मॉनिटरिंग कमेटी, टेक्निकल कमेटी और फील्ड ऑपरेशन एवं इवैल्यूएशन कमेटी। मॉनिटरिंग कमेटी की देखरेख विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव करेंगे। टेक्निकल कमेटी में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT), भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) और भारतीय मौसम विभाग (IMD) के विशेषज्ञ शामिल होंगे।

इस संबंध में दो बैठकें पहले ही आयोजित की जा चुकी हैं और विभागीय सचिवों को प्रक्रिया में तेज़ी लाने के निर्देश दिए गए हैं।

अभियान की तकनीकी बारीकियाँ

यह अभियान 60 दिनों तक चलेगा, जिसमें लगभग 200 उड़ान घंटे का उपयोग किया जाएगा। क्लाउड सीडिंग का कार्य प्रतिदिन सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे तक संचालित होगा। मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह प्रक्रिया केवल तभी संभव है जब उपयुक्त बादल उपलब्ध हों, इसलिए अभियान बादलों की उपलब्धता के अनुसार चलाया जाएगा।

जिस क्षेत्र में क्लाउड सीडिंग की जाएगी, उसके लगभग 15 किलोमीटर के दायरे में वर्षा होने की संभावना रहती है। मंत्री के अनुसार सितंबर में घने बादलों की उपस्थिति अधिक रहने की संभावना है, जबकि अक्टूबर में बादलों की संख्या कम हो सकती है — इसलिए वर्तमान समय इस अभियान के लिए उपयुक्त माना जा रहा है।

पूर्व अनुभव और सफलता का लक्ष्य

गौरतलब है कि कर्नाटक में इससे पहले तीन बार क्लाउड सीडिंग की जा चुकी है, जिनकी सफलता दर लगभग 18 से 20 प्रतिशत रही थी। इस बार मंत्री ने उच्च लक्ष्य निर्धारित किया है। उन्होंने कहा, "यदि इस बार हमें 30 प्रतिशत सफलता भी मिल जाती है तो यह कार्यक्रम पूरी तरह सफल माना जाएगा।" IIT, IISc और IMD के विशेषज्ञों की भागीदारी से तकनीकी गुणवत्ता बेहतर होने की उम्मीद जताई जा रही है।

आम जनता और कृषि पर असर

चेलुवरायस्वामी ने चेतावनी दी कि बारिश की कमी के कारण आने वाले महीनों में जल संकट गहरा सकता है। मौसम पूर्वानुमान के अनुसार वर्षा की संभावना है, लेकिन यह लगातार नहीं होगी। उन्होंने कहा, "लोगों को उम्मीद है कि सरकार बारिश की कमी से राहत दिलाएगी। इन उम्मीदों को पूरा करना सरकार की जिम्मेदारी है।"

सरकार का लक्ष्य झीलों और तालाबों को भरना तथा वर्षा आधारित कृषि क्षेत्रों को सहायता देना है। मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि लोगों और पशुओं के लिए पेयजल उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है, इसी कारण राज्य सरकार इस परियोजना का संपूर्ण वित्तीय भार उठाने को तैयार है।

आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक के कई ज़िले सामान्य से कम वर्षा दर्ज कर रहे हैं और जलाशयों का स्तर चिंताजनक बना हुआ है। जल संसाधन विभाग अभियान के क्रियान्वयन की ज़िम्मेदारी संभालेगा। तीनों समितियों के गठन और तकनीकी तैयारी पूरी होते ही अभियान आरंभ होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 18-20% की पूर्व सफलता दर यह याद दिलाती है कि कृत्रिम वर्षा कोई रामबाण नहीं है। IIT, IISc और IMD की भागीदारी से वैज्ञानिक विश्वसनीयता बढ़ती है, पर असली सवाल यह है कि क्या 60 दिन और 200 उड़ान घंटे उस वर्षा-घाटे की भरपाई के लिए पर्याप्त हैं जो जलाशयों और खरीफ फसलों को प्रभावित कर रही है। ₹27 करोड़ का सरकारी खर्च जनता के प्रति जवाबदेही का संकेत है, लेकिन दीर्घकालिक जल प्रबंधन और वर्षा-आधारित कृषि के लिए ढाँचागत सुधारों के बिना, यह अभियान संकट का स्थायी समाधान नहीं बन सकता।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक में क्लाउड सीडिंग अभियान क्या है और यह कब शुरू होगा?
कर्नाटक सरकार राज्य में वर्षा की कमी दूर करने के लिए क्लाउड सीडिंग (कृत्रिम वर्षा) अभियान शुरू कर रही है, जो 25 अगस्त की घोषणा के दो दिनों के भीतर प्रारंभ होने की उम्मीद है। यह अभियान 60 दिनों तक राज्य के चारों राजस्व मंडलों में चलेगा।
क्लाउड सीडिंग अभियान पर कितना खर्च होगा और इसे कौन वहन करेगा?
इस अभियान पर लगभग ₹27 करोड़ का खर्च अनुमानित है, जिसे कर्नाटक राज्य सरकार पूरी तरह वहन करेगी। मंत्री चेलुवरायस्वामी ने स्पष्ट किया कि पेयजल और कृषि सहायता सरकार की प्राथमिकता है, इसलिए वित्तीय भार सरकार उठाएगी।
क्लाउड सीडिंग की निगरानी और तकनीकी मार्गदर्शन कौन करेगा?
तीन समितियाँ गठित की जाएंगी — मॉनिटरिंग कमेटी (अतिरिक्त मुख्य सचिव की अध्यक्षता में), टेक्निकल कमेटी (IIT, IISc और IMD के विशेषज्ञ) और फील्ड ऑपरेशन एवं इवैल्यूएशन कमेटी। ये समितियाँ अभियान की गुणवत्ता और परिणामों का मूल्यांकन करेंगी।
कर्नाटक में पहले क्लाउड सीडिंग के क्या परिणाम रहे हैं?
कर्नाटक में इससे पहले तीन बार क्लाउड सीडिंग की जा चुकी है, जिनकी सफलता दर लगभग 18 से 20 प्रतिशत रही। इस बार सरकार ने 30 प्रतिशत सफलता का लक्ष्य रखा है और विशेषज्ञ समितियों की भागीदारी से बेहतर परिणाम की उम्मीद जताई जा रही है।
क्लाउड सीडिंग से किसे और कैसे फायदा होगा?
इस अभियान का सीधा लाभ उन क्षेत्रों को मिलेगा जहाँ वर्षा की कमी से जल संकट और कृषि संकट उत्पन्न हो रहा है। क्लाउड सीडिंग क्षेत्र के 15 किलोमीटर के दायरे में वर्षा होने की संभावना रहती है, जिससे झीलें-तालाब भरेंगे, पेयजल उपलब्ध होगा और वर्षा आधारित खेती को राहत मिलेगी।
राष्ट्र प्रेस
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