कर्नाटक में क्लाउड सीडिंग अभियान दो दिन में शुरू, ₹27 करोड़ खर्च से 60 दिन चलेगा कार्यक्रम
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक सरकार ने राज्य में गहराते वर्षा संकट से निपटने के लिए क्लाउड सीडिंग (कृत्रिम वर्षा) अभियान को हरी झंडी दे दी है। जल संसाधन मंत्री एन. चेलुवरायस्वामी ने मंगलवार, 25 अगस्त को बेंगलुरु में विधान सौधा में आयोजित प्रेस वार्ता में बताया कि अगले दो दिनों के भीतर यह अभियान प्रारंभ किया जा सकता है। राज्य के चारों राजस्व मंडलों में संचालित होने वाले इस कार्यक्रम पर लगभग ₹27 करोड़ का खर्च अनुमानित है, जिसे राज्य सरकार पूरी तरह वहन करेगी।
अभियान की संरचना और समितियाँ
मंत्री चेलुवरायस्वामी ने बताया कि मंगलवार की शाम तक तीन समितियों का गठन किया जाएगा — मॉनिटरिंग कमेटी, टेक्निकल कमेटी और फील्ड ऑपरेशन एवं इवैल्यूएशन कमेटी। मॉनिटरिंग कमेटी की देखरेख विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव करेंगे। टेक्निकल कमेटी में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT), भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) और भारतीय मौसम विभाग (IMD) के विशेषज्ञ शामिल होंगे।
इस संबंध में दो बैठकें पहले ही आयोजित की जा चुकी हैं और विभागीय सचिवों को प्रक्रिया में तेज़ी लाने के निर्देश दिए गए हैं।
अभियान की तकनीकी बारीकियाँ
यह अभियान 60 दिनों तक चलेगा, जिसमें लगभग 200 उड़ान घंटे का उपयोग किया जाएगा। क्लाउड सीडिंग का कार्य प्रतिदिन सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे तक संचालित होगा। मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह प्रक्रिया केवल तभी संभव है जब उपयुक्त बादल उपलब्ध हों, इसलिए अभियान बादलों की उपलब्धता के अनुसार चलाया जाएगा।
जिस क्षेत्र में क्लाउड सीडिंग की जाएगी, उसके लगभग 15 किलोमीटर के दायरे में वर्षा होने की संभावना रहती है। मंत्री के अनुसार सितंबर में घने बादलों की उपस्थिति अधिक रहने की संभावना है, जबकि अक्टूबर में बादलों की संख्या कम हो सकती है — इसलिए वर्तमान समय इस अभियान के लिए उपयुक्त माना जा रहा है।
पूर्व अनुभव और सफलता का लक्ष्य
गौरतलब है कि कर्नाटक में इससे पहले तीन बार क्लाउड सीडिंग की जा चुकी है, जिनकी सफलता दर लगभग 18 से 20 प्रतिशत रही थी। इस बार मंत्री ने उच्च लक्ष्य निर्धारित किया है। उन्होंने कहा, "यदि इस बार हमें 30 प्रतिशत सफलता भी मिल जाती है तो यह कार्यक्रम पूरी तरह सफल माना जाएगा।" IIT, IISc और IMD के विशेषज्ञों की भागीदारी से तकनीकी गुणवत्ता बेहतर होने की उम्मीद जताई जा रही है।
आम जनता और कृषि पर असर
चेलुवरायस्वामी ने चेतावनी दी कि बारिश की कमी के कारण आने वाले महीनों में जल संकट गहरा सकता है। मौसम पूर्वानुमान के अनुसार वर्षा की संभावना है, लेकिन यह लगातार नहीं होगी। उन्होंने कहा, "लोगों को उम्मीद है कि सरकार बारिश की कमी से राहत दिलाएगी। इन उम्मीदों को पूरा करना सरकार की जिम्मेदारी है।"
सरकार का लक्ष्य झीलों और तालाबों को भरना तथा वर्षा आधारित कृषि क्षेत्रों को सहायता देना है। मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि लोगों और पशुओं के लिए पेयजल उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है, इसी कारण राज्य सरकार इस परियोजना का संपूर्ण वित्तीय भार उठाने को तैयार है।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक के कई ज़िले सामान्य से कम वर्षा दर्ज कर रहे हैं और जलाशयों का स्तर चिंताजनक बना हुआ है। जल संसाधन विभाग अभियान के क्रियान्वयन की ज़िम्मेदारी संभालेगा। तीनों समितियों के गठन और तकनीकी तैयारी पूरी होते ही अभियान आरंभ होने की उम्मीद है।