निशु आजाद का दर्द: 'बाहर निकलने में शर्म आती थी', स्वतंत्र भारद्वाज की 72 घंटे में गिरफ्तारी का भरोसा
सारांश
मुख्य बातें
नाबालिग निशु आजाद ने शुक्रवार, 4 सितंबर को खुलासा किया कि जंतर-मंतर पर उनके पिता के साथ हुई मारपीट के बाद से वह घर से बाहर निकलने में शर्म महसूस कर रही हैं। आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज के समर्थकों द्वारा लगातार बलात्कार और हत्या की धमकियाँ मिलने के कारण वह हफ्तों तक स्कूल नहीं जा सकीं। दिल्ली पुलिस ने पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने के बाहर हुए विरोध-प्रदर्शन के बाद 72 घंटे के भीतर आरोपी को गिरफ्तार करने का आश्वासन दिया है।
निशु की आपबीती
पत्रकारों से बात करते हुए निशु आजाद ने कहा, 'इतने दिनों से, जो लोग उनका समर्थन करते हैं, वे मुझे गालियाँ दे रहे थे और मेरे साथ रेप की धमकी दे रहे थे। मैंने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। मुझे उम्मीद है कि पुलिस अब कार्रवाई करेगी ताकि मुझे ये सब और न सहना पड़े।'
उन्होंने आगे कहा, 'जिस तरह से ये लोग मुझे गालियाँ दे रहे थे, धमकी दे रहे थे और मेरे अश्लील स्टिकर बना रहे थे, मुझे घर से बाहर निकलने में भी शर्म आ रही थी। इस घटना की वजह से मैं दो से तीन सप्ताह तक स्कूल नहीं गई। अब जाती हूँ, तो मुझे लगता है कि हर कोई मुझे जज कर रहा है।'
विवाद की पृष्ठभूमि
यह विवाद तब शुरू हुआ जब आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज ने एक कथित वायरल वीडियो में दावा किया कि उसने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान छात्रा के पिता के साथ मारपीट की थी और दिल्ली पुलिस ने उसे इसलिए छोड़ दिया क्योंकि उसके 'राजनीतिक संबंध' हैं। नाबालिग लड़की ने यह भी कहा कि पुलिस पहले 'कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रही थी', लेकिन अब आखिरकार उसकी शिकायत पर कार्रवाई हुई है।
गौरतलब है कि निशु उस समय 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) के प्रदर्शन में अपने पिता के साथ शामिल थीं, जब यह घटना घटी।
विरोध-प्रदर्शन और राजनीतिक समर्थन
नई दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन के बाहर हुए विरोध-प्रदर्शन में आजाद समाज पार्टी के प्रमुख एवं सांसद चंद्रशेखर आजाद, पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव और इंडियन यूथ कांग्रेस भी शामिल हुए।
इस प्रदर्शन के बाद दिल्ली पुलिस ने आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज को पॉक्सो अधिनियम, एससी/एसटी एक्ट और हत्या के प्रयास के तहत 72 घंटे के भीतर गिरफ्तार करने का भरोसा दिया।
नेताओं की प्रतिक्रिया
सांसद चंद्रशेखर आजाद ने कहा, 'संजय (पीड़ित) और उनकी बेटी को लगातार रेप, एसिड अटैक और हत्या की धमकियाँ मिल रही हैं। वे डर के साये में जी रहे हैं। अगर देश की राजधानी में यह हाल है, तो आप सोच सकते हैं कि ग्रामीण इलाकों में क्या स्थिति होगी।' उन्होंने चेतावनी दी कि अगर वादे के मुताबिक गिरफ्तारियाँ नहीं हुईं, तो वे पुलिस कमिश्नर के दफ्तर और जरूरत पड़ने पर गृह मंत्रालय का भी 'घेराव' करेंगे।
सीजेपी के प्रतिनिधि सौरव दास ने कहा कि उन्हें दिल्ली पुलिस पर भरोसा है कि वह अपना वादा पूरा करेगी और आरोपियों को खुलेआम घूमने नहीं दिया जाएगा।
आगे क्या होगा
दिल्ली पुलिस के 72 घंटे के आश्वासन के बाद अब सभी की निगाहें आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी पर टिकी हैं। साथ ही, निशु द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर में धमकी देने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है। यह मामला राजधानी में नाबालिगों की सुरक्षा और पुलिस की जवाबदेही पर एक बड़े सवाल के रूप में उभरा है।