धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांगो, छात्रों को न्याय दो — टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद कीर्ति आजाद ने 24 जुलाई को नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में स्पष्ट कहा कि जंतर मंतर पर आंदोलनरत छात्रों की एकमात्र और अटल माँग है — केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का तत्काल इस्तीफा। उनके अनुसार, इस्तीफे के अतिरिक्त किसी भी अन्य विषय पर फिलहाल कोई बातचीत नहीं होनी चाहिए।
आंदोलन की तुलना और ऐतिहासिक संदर्भ
कीर्ति आजाद ने इस छात्र आंदोलन को 1975 के बिहार आंदोलन से जोड़ते हुए कहा कि वह आंदोलन भी धीरे-धीरे पूरे देश में फैल गया था। हालाँकि, उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि मौजूदा आंदोलन अन्य आंदोलनों से इस अर्थ में भिन्न है कि यह सीधे तौर पर शिक्षा-व्यवस्था की खामियों और नीट पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दों पर केंद्रित है।
नीट विवाद और सरकार पर निशाना
आजाद ने कहा कि नीट पेपर लीक मामले में संलिप्त आरोपियों के विरुद्ध कार्रवाई दो वर्ष पहले ही हो जानी चाहिए थी। उन्होंने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) पर भी सवाल उठाए और कहा कि इसमें सत्तारूढ़ दल से जुड़े लोगों की भूमिका संदेह के घेरे में है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार सोनम वांगचुक के पास 26 दिनों बाद गई — यदि पहले दिन ही संवाद होता, तो स्थिति इतनी नहीं बिगड़ती।
मेट्रो बंद और युवाओं की आवाज़ दबाने का आरोप
टीएमसी सांसद ने 16 मेट्रो स्टेशनों को बंद किए जाने को 'दुर्भाग्यपूर्ण' बताया। उन्होंने कहा कि देश की 70 प्रतिशत से अधिक आबादी 30 वर्ष से कम आयु की है और ऐसे में इन युवाओं की माँगों को नज़रअंदाज़ करना सरकार की भूल है। उनके अनुसार, यही छात्र आगे चलकर डॉक्टर, इंजीनियर, आईएएस और आईपीएस अधिकारी बनेंगे।
पुलिस कार्रवाई और महंगाई पर तीखा हमला
आजाद ने पुलिस द्वारा छात्रों पर की गई कार्रवाई को अत्यंत कठोर शब्दों में नकारते हुए कहा कि अंग्रेजों के शासनकाल में भी युवाओं के साथ इस तरह का व्यवहार नहीं होता था। उन्होंने यह भी कहा कि आज देश में महंगाई का स्तर औपनिवेशिक काल से भी अधिक है। राम मंदिर चंदा विवाद पर भी उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा कि हर क्षेत्र में स्थिति बिगड़ी हुई है।
गरीब छात्रों के हित और सरकारी वादे
आजाद ने आरोप लगाया कि केंद्रीय मंत्रियों के बच्चे विदेश में पढ़ाई कर बेहतर अवसर पाते हैं, जबकि गरीब बच्चों के हितों पर 'लगातार कुठाराघात' किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जो कोचिंग सेंटर इन बच्चों को निःशुल्क शिक्षा देते हैं, उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। साथ ही, सरकारी स्कूलों को बंद किए जाने और सरकारी अस्पतालों में सुविधाओं के अभाव पर भी उन्होंने चिंता जताई। उनके अनुसार, 2014 में किए गए अधिकांश वादे आज तक पूरे नहीं हुए हैं। छात्रों का यह आंदोलन देश में बदलाव की आहट है — और सरकार को इसे गंभीरता से लेना होगा।