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धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांगो, छात्रों को न्याय दो — टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद

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धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांगो, छात्रों को न्याय दो — टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद

सारांश

टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने जंतर मंतर पर छात्र आंदोलन को ऐतिहासिक करार दिया और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा एकमात्र स्वीकार्य हल बताया। नीट लीक, 16 मेट्रो स्टेशन बंद और पुलिस कार्रवाई पर सरकार को घेरते हुए कहा — यह छात्र देश में बदलाव लाकर रहेंगे।

मुख्य बातें

टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने 24 जुलाई को माँग की कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तत्काल इस्तीफा दें।
नीट पेपर लीक मामले में आरोपियों पर दो वर्ष पहले ही कार्रवाई होनी चाहिए थी — आजाद का आरोप।
आंदोलन के दौरान 16 मेट्रो स्टेशन बंद किए जाने को 'दुर्भाग्यपूर्ण' बताया।
देश की 70% से अधिक आबादी 30 वर्ष से कम आयु की है — युवाओं की उपेक्षा पर सरकार को आड़े हाथों लिया।
NTA पर सत्तारूढ़ दल से जुड़े लोगों की संलिप्तता का आरोप लगाया।
2014 के सरकारी वादों को अधूरा बताते हुए गरीब बच्चों के हितों की अनदेखी पर नाराज़गी जताई।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद कीर्ति आजाद ने 24 जुलाई को नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में स्पष्ट कहा कि जंतर मंतर पर आंदोलनरत छात्रों की एकमात्र और अटल माँग है — केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का तत्काल इस्तीफा। उनके अनुसार, इस्तीफे के अतिरिक्त किसी भी अन्य विषय पर फिलहाल कोई बातचीत नहीं होनी चाहिए।

आंदोलन की तुलना और ऐतिहासिक संदर्भ

कीर्ति आजाद ने इस छात्र आंदोलन को 1975 के बिहार आंदोलन से जोड़ते हुए कहा कि वह आंदोलन भी धीरे-धीरे पूरे देश में फैल गया था। हालाँकि, उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि मौजूदा आंदोलन अन्य आंदोलनों से इस अर्थ में भिन्न है कि यह सीधे तौर पर शिक्षा-व्यवस्था की खामियों और नीट पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दों पर केंद्रित है।

नीट विवाद और सरकार पर निशाना

आजाद ने कहा कि नीट पेपर लीक मामले में संलिप्त आरोपियों के विरुद्ध कार्रवाई दो वर्ष पहले ही हो जानी चाहिए थी। उन्होंने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) पर भी सवाल उठाए और कहा कि इसमें सत्तारूढ़ दल से जुड़े लोगों की भूमिका संदेह के घेरे में है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार सोनम वांगचुक के पास 26 दिनों बाद गई — यदि पहले दिन ही संवाद होता, तो स्थिति इतनी नहीं बिगड़ती।

मेट्रो बंद और युवाओं की आवाज़ दबाने का आरोप

टीएमसी सांसद ने 16 मेट्रो स्टेशनों को बंद किए जाने को 'दुर्भाग्यपूर्ण' बताया। उन्होंने कहा कि देश की 70 प्रतिशत से अधिक आबादी 30 वर्ष से कम आयु की है और ऐसे में इन युवाओं की माँगों को नज़रअंदाज़ करना सरकार की भूल है। उनके अनुसार, यही छात्र आगे चलकर डॉक्टर, इंजीनियर, आईएएस और आईपीएस अधिकारी बनेंगे।

पुलिस कार्रवाई और महंगाई पर तीखा हमला

आजाद ने पुलिस द्वारा छात्रों पर की गई कार्रवाई को अत्यंत कठोर शब्दों में नकारते हुए कहा कि अंग्रेजों के शासनकाल में भी युवाओं के साथ इस तरह का व्यवहार नहीं होता था। उन्होंने यह भी कहा कि आज देश में महंगाई का स्तर औपनिवेशिक काल से भी अधिक है। राम मंदिर चंदा विवाद पर भी उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा कि हर क्षेत्र में स्थिति बिगड़ी हुई है।

गरीब छात्रों के हित और सरकारी वादे

आजाद ने आरोप लगाया कि केंद्रीय मंत्रियों के बच्चे विदेश में पढ़ाई कर बेहतर अवसर पाते हैं, जबकि गरीब बच्चों के हितों पर 'लगातार कुठाराघात' किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जो कोचिंग सेंटर इन बच्चों को निःशुल्क शिक्षा देते हैं, उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। साथ ही, सरकारी स्कूलों को बंद किए जाने और सरकारी अस्पतालों में सुविधाओं के अभाव पर भी उन्होंने चिंता जताई। उनके अनुसार, 2014 में किए गए अधिकांश वादे आज तक पूरे नहीं हुए हैं। छात्रों का यह आंदोलन देश में बदलाव की आहट है — और सरकार को इसे गंभीरता से लेना होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उस आंदोलन का स्वरूप और राजनीतिक संदर्भ बिल्कुल भिन्न था। असली सवाल यह है कि NTA सुधार, पेपर-लीक रोकथाम तंत्र और परीक्षा की विश्वसनीयता बहाली के लिए ठोस नीतिगत प्रस्ताव कब आएँगे — इस्तीफे की माँग उस बहस को आगे नहीं बढ़ाती।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कीर्ति आजाद ने धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा क्यों माँगा?
टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने कहा कि नीट पेपर लीक विवाद और छात्रों के साथ पुलिस की कार्रवाई के मद्देनज़र केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा अनिवार्य है। उनके अनुसार, जंतर मंतर पर आंदोलनरत छात्रों की यही एकमात्र और अटल माँग है।
जंतर मंतर छात्र आंदोलन किस मुद्दे पर है?
यह आंदोलन मुख्यतः नीट पेपर लीक विवाद और NTA की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता की माँग को लेकर है। छात्र शिक्षा-व्यवस्था में सुधार और दोषियों पर कार्रवाई की माँग कर रहे हैं।
16 मेट्रो स्टेशन बंद होने पर कीर्ति आजाद ने क्या कहा?
आजाद ने इसे 'दुर्भाग्यपूर्ण' बताया और कहा कि देश की 70% से अधिक आबादी 30 वर्ष से कम आयु की है। ऐसे में छात्रों की आवाज़ दबाने के लिए मेट्रो बंद करना सरकार की असंवेदनशीलता दर्शाता है।
NTA पर कीर्ति आजाद के क्या आरोप हैं?
आजाद ने आरोप लगाया कि NTA में सत्तारूढ़ दल से जुड़े लोग शामिल हैं और नीट लीक मामले में दो वर्ष पहले ही कार्रवाई होनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि सरकार की निष्क्रियता ने देशभर में छात्र आंदोलन को जन्म दिया।
कीर्ति आजाद ने 1975 के बिहार आंदोलन से मौजूदा आंदोलन की तुलना क्यों की?
उन्होंने यह बताने के लिए यह तुलना की कि छात्र आंदोलन पूरे देश में फैलने की क्षमता रखते हैं। हालाँकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मौजूदा आंदोलन शिक्षा-केंद्रित होने के कारण अन्य आंदोलनों से भिन्न और अधिक विशिष्ट है।
राष्ट्र प्रेस
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