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नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने चीनी राजदूत से मुलाकात में भूस्खलन सहायता पर जताया आभार

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नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने चीनी राजदूत से मुलाकात में भूस्खलन सहायता पर जताया आभार

सारांश

नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने काठमांडू में चीनी राजदूत से मुलाकात कर भूस्खलन राहत में चीन की मदद पर आभार जताया। साथ ही स्पष्ट किया कि नेपाल किसी देश से सीधे जलवायु क्षतिपूर्ति नहीं माँगेगा, बल्कि UNFCCC और पेरिस समझौते के तहत बहुपक्षीय वित्त की राह अपनाएगा।

मुख्य बातें

नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने 3 सितंबर को काठमांडू में चीनी राजदूत चांग माओमिंग से मुलाकात की।
नेपाल ने गंभीर भूस्खलन के दौरान चीन द्वारा दी गई निस्वार्थ सहायता के लिए आभार व्यक्त किया।
खनाल ने स्पष्ट किया कि नेपाल चीन सहित किसी विशेष देश से सीधे जलवायु क्षतिपूर्ति नहीं माँगेगा।
नेपाल UNFCCC और पेरिस समझौते के ढाँचे के तहत अंतरराष्ट्रीय जलवायु वित्त हासिल करने का प्रयास करेगा।
दोनों पक्षों ने जलवायु परिवर्तन को साझा वैश्विक चुनौती बताते हुए आपसी सहयोग जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई।

नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने 3 सितंबर को काठमांडू में चीनी राजदूत चांग माओमिंग से मुलाकात के दौरान स्पष्ट किया कि नेपाली सरकार संकट की घड़ी में चीन द्वारा दी गई निस्वार्थ सहायता के लिए कृतज्ञ है। हाल ही में नेपाल में आए गंभीर भूस्खलन के बाद चीन ने बचाव कार्यों में कई स्तरों पर मदद की थी।

मुख्य घटनाक्रम

विदेश मंत्री खनाल ने इस बैठक में कहा कि नेपाल और चीन हिमालय की साझा प्राकृतिक पारिस्थितिक व्यवस्था में बंधे हैं और दोनों देश जलवायु परिवर्तन के प्रत्यक्ष प्रभाव झेल रहे हैं। उन्होंने इस बात पर सहमति जताई कि जलवायु परिवर्तन से निपटना अंतरराष्ट्रीय समुदाय की सामूहिक जिम्मेदारी है।

जलवायु न्याय पर नेपाल का रुख

खनाल ने यह भी स्पष्ट किया कि नेपाल का चीन सहित किसी विशेष देश से 'जलवायु क्षतिपूर्ति' की माँग करने का कोई इरादा नहीं है। नेपाल संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन ढाँचा समझौते (UNFCCC) और पेरिस समझौते के तहत स्थापित बहुपक्षीय तंत्र के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सहायता प्राप्त करने की दिशा में काम करेगा। यह ऐसे समय में आया है जब विकासशील देश जलवायु वित्त पर वैश्विक मंचों पर दबाव बढ़ा रहे हैं।

चीनी राजदूत की प्रतिक्रिया

चीनी राजदूत चांग माओमिंग ने कहा कि भूस्खलन की गंभीर स्थिति उत्पन्न होने के बाद चीन ने नेपाल के राहत एवं बचाव कार्यों में अनेक तरीकों से सहयोग किया। उन्होंने विश्वास जताया कि दोनों पक्षों के संयुक्त प्रयासों से दोनों देशों की जनता इस आपदा को मिलकर पार करेगी और आगे बढ़ेगी।

जलवायु सहयोग पर साझा प्रतिबद्धता

चांग ने जोर देकर कहा कि जलवायु परिवर्तन समूची मानवता के लिए एक साझा चुनौती है और कोई भी देश इसके प्रभाव से अछूता नहीं रह सकता। उन्होंने कहा कि चीन नेपाल सहित अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ संवाद और सहयोग को और मजबूत करने तथा जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों की प्रभावी रोकथाम के लिए प्रतिबद्ध है। गौरतलब है कि यह बैठक नेपाल-चीन द्विपक्षीय संबंधों को आपदा-प्रबंधन और पर्यावरणीय सहयोग के नए आयाम देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है — यह काठमांडू की बीजिंग के साथ संतुलित रिश्ते बनाए रखने की रणनीति को दर्शाता है। हिमालयी देश होने के नाते नेपाल जलवायु परिवर्तन का सर्वाधिक शिकार है, फिर भी वह बहुपक्षीय मंचों का रास्ता चुन रहा है — जो भारत और पश्चिमी देशों के साथ संबंध बिगाड़े बिना चीन को साधने की कोशिश है। यह देखना होगा कि UNFCCC के तहत मिलने वाला जलवायु वित्त नेपाल की वास्तविक जरूरतों को पूरा कर पाता है या नहीं, क्योंकि अब तक इस तंत्र से छोटे पर्वतीय देशों को पर्याप्त धनराशि नहीं मिल सकी है।
RashtraPress
4 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने चीनी राजदूत से क्यों मुलाकात की?
3 सितंबर को काठमांडू में हुई इस बैठक का मुख्य उद्देश्य नेपाल में आए गंभीर भूस्खलन के दौरान चीन द्वारा दी गई राहत सहायता पर आभार व्यक्त करना और जलवायु परिवर्तन पर द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाना था।
नेपाल ने जलवायु क्षतिपूर्ति पर क्या रुख अपनाया है?
नेपाल ने स्पष्ट किया है कि वह चीन सहित किसी विशेष देश से सीधे जलवायु क्षतिपूर्ति की माँग नहीं करेगा। इसके बजाय, नेपाल UNFCCC और पेरिस समझौते के तहत स्थापित बहुपक्षीय तंत्र के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सहायता प्राप्त करने की कोशिश करेगा।
भूस्खलन के बाद चीन ने नेपाल की किस प्रकार सहायता की?
चीनी राजदूत चांग माओमिंग के अनुसार, गंभीर भूस्खलन उत्पन्न होने के बाद चीन ने नेपाल के बचाव एवं राहत कार्यों में कई तरीकों से सहयोग किया। हालाँकि सहायता की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं कराई गई है।
नेपाल और चीन के बीच जलवायु सहयोग का आधार क्या है?
दोनों देश हिमालय की साझा प्राकृतिक पारिस्थितिक व्यवस्था में बंधे हैं और जलवायु परिवर्तन से समान रूप से प्रभावित हैं। दोनों पक्षों ने माना कि जलवायु परिवर्तन समूची मानवता की साझा चुनौती है और इससे निपटना अंतरराष्ट्रीय समुदाय की सामूहिक जिम्मेदारी है।
इस बैठक का नेपाल-चीन संबंधों पर क्या असर होगा?
यह बैठक नेपाल-चीन द्विपक्षीय संबंधों को आपदा-प्रबंधन और पर्यावरणीय सहयोग के नए आयाम देने की दिशा में एक कदम मानी जा रही है। दोनों पक्षों ने संवाद और सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई है।
राष्ट्र प्रेस
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